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Kannauj News: हवा का रूख बताता है मंशेश्वरनाथ मंदिर की चोटी पर लगा चंद्रमा
Sun, 16 Jul 2023 11:23 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sun, 16 Jul 2023 11:23 PM IST
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छिबरामऊ। नगर के ऐतिहासिक मंदिरों में शामिल मंशेश्वरनाथ मंदिर का अलग ही महत्व है। आमतौर पर शिवमंदिरों की चोटी पर त्रिशूल लगा होता है। लेकिन मंशेश्वरनाथ मंदिर की चोटी पर त्रिशूल की जगह चंद्रमा लगा हुआ है। यह चंद्रमा हवा के रूख के साथ ही घूमता है, जिससे लोगों का हवा के रूख का आसानी से पता चल जाता है।
मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में यहां इमली का बाग था। राहगीर यहां विश्राम कर थकान उतारते थे। एक रात यहां स्थित एक टीले का आकार बढ़ने लगा। सुबह जब लोगों ने इस स्थान को खोदा तो जमीन के गर्भ से काले पत्थर का शिवलिंग निकला। बाद में भक्तों ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाकर शिवलिंग स्थापित करवाई। मंदिर की दीवार पर लगी अरबी भाषा में एक शिलापट भी लगा है, जिसमें शक संवत 1876 लिखा हुआ है। शिलापट से इस मंदिर की प्राचीनता का अनुमान स्वयं ही लगाया जा सकता है। मान्यता है कि यहां भक्त अपनी जो भी मंशा लेकर आता है, अवश्य ही पूर्ण होती है। इसीलिए इनका नाम मंशेश्वरनाथ रखा गया। नगर के कुछ युवकों ने बुजुर्गों के सहयोग से इस प्राचीन मंदिर को भव्य रूप प्रदान कर इसकी धार्मिक महत्व्र पर चार चांद लगा दिए। बीते कई वर्षों से यहां प्रतिदिन सुबह चार बजे से ही पूजा अर्चना के लिए भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जो देर सायं तक अनवरत चलता रहता है। महा शिवरात्रि और सावन समेत आम दिनों में भी यहां पूजा के लिए भक्तों का मेला लगा रहता है।
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मंदिर को लेकर पौराणिक मान्यता है कि मुगल शासक औरंगजेब के शासनकाल में यहां इमली का बाग था। राहगीर यहां विश्राम कर थकान उतारते थे। एक रात यहां स्थित एक टीले का आकार बढ़ने लगा। सुबह जब लोगों ने इस स्थान को खोदा तो जमीन के गर्भ से काले पत्थर का शिवलिंग निकला। बाद में भक्तों ने इस स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाकर शिवलिंग स्थापित करवाई। मंदिर की दीवार पर लगी अरबी भाषा में एक शिलापट भी लगा है, जिसमें शक संवत 1876 लिखा हुआ है। शिलापट से इस मंदिर की प्राचीनता का अनुमान स्वयं ही लगाया जा सकता है। मान्यता है कि यहां भक्त अपनी जो भी मंशा लेकर आता है, अवश्य ही पूर्ण होती है। इसीलिए इनका नाम मंशेश्वरनाथ रखा गया। नगर के कुछ युवकों ने बुजुर्गों के सहयोग से इस प्राचीन मंदिर को भव्य रूप प्रदान कर इसकी धार्मिक महत्व्र पर चार चांद लगा दिए। बीते कई वर्षों से यहां प्रतिदिन सुबह चार बजे से ही पूजा अर्चना के लिए भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। जो देर सायं तक अनवरत चलता रहता है। महा शिवरात्रि और सावन समेत आम दिनों में भी यहां पूजा के लिए भक्तों का मेला लगा रहता है।
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