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शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रहा कुपोषण
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जिला अस्पताल के एनआरसी केंद्र में भर्ती अति कुपोषित बच्चे।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। सरकार कुपोषण समाप्त करने के लिए तमाम योजनाएं चला रही है। इसके बाद भी कुपोषित बच्चों की संख्या में इजाफा हो रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक जिले में 4027 बच्चे कुपोषण के शिकार हैं। अतिकुपोषित बच्चों की संख्या 684 है। कुपोषित बच्चे 3,343 हैं। तालग्राम व जलालाबाद ब्लाक में सबसे अधिक बच्चे अति कुपोषित हैं। विभाग इन बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।
अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 12 बेड हैं। बच्चों को गंभीर हालत में यहां भर्ती कराया जाता है। इन्हें दवा समेत पोषाहार, दूध के अलावा अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। विभागीय अफसर मानीटरिंग करते हैं। बच्चों के सही होने पर इन्हें घर भेज दिया जाता है।
अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की सूचना नजदीक के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देने पर ऐसे बच्चों को डबल पोषाहार और विटामिन की दवा दी जाती हैं। हर सप्ताह वजन किया जाता है। बच्चों के खानपान पर विशेष निगाह रखी जाती है।
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स्वास्थ्य पोषण मिशन के तहत जिला कार्यक्रम विभाग की ओर से गांव-गांव चौपाल लगाई जाती है। इसमें बच्चों के खानपान के बारे में जोर दिया जाता है। माता-पिता को बच्चों को खाने में कौन-कौन सी चीजें देनी चाहिए, यह जानकारी चौपाल में दी जाती है।
ब्लाकवार अतिकुपोषित बच्चे (लाल श्रेणी)
ब्लाक अति कुपोषित बच्चे
उमर्दा 70
जलालाबाद 99
छिबरामऊ 65
कन्नौज 86
सौरिख 98
तालग्राम 129
हसेरन 64
गुगरापुर 44
शहरी क्षेत्र 29
ब्लाकवार कुपोषित बच्चे (पीली श्रेणी)
ब्लाक कुपोषित बच्चे
उमर्दा 400
जलालाबाद 231
छिबरामऊ 873
कन्नौज 461
सौरिख 375
तालग्राम 502
हसेरन 261
गुगरापुर 160
शहरी क्षेत्र 80
शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कम जागरूक हैं। महिलाएं गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म लेने पर खानपान पर ध्यान नहीं देती हैं। इससे बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए डबल पोषाहार समेत अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। चौपाल लगाकर माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है।
- नीलम कटियार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।
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अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए पोषण पुनर्वास केंद्र (एनआरसी) में 12 बेड हैं। बच्चों को गंभीर हालत में यहां भर्ती कराया जाता है। इन्हें दवा समेत पोषाहार, दूध के अलावा अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। विभागीय अफसर मानीटरिंग करते हैं। बच्चों के सही होने पर इन्हें घर भेज दिया जाता है।
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अति कुपोषित और कुपोषित बच्चों की सूचना नजदीक के प्राथमिक व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में देने पर ऐसे बच्चों को डबल पोषाहार और विटामिन की दवा दी जाती हैं। हर सप्ताह वजन किया जाता है। बच्चों के खानपान पर विशेष निगाह रखी जाती है।
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स्वास्थ्य पोषण मिशन के तहत जिला कार्यक्रम विभाग की ओर से गांव-गांव चौपाल लगाई जाती है। इसमें बच्चों के खानपान के बारे में जोर दिया जाता है। माता-पिता को बच्चों को खाने में कौन-कौन सी चीजें देनी चाहिए, यह जानकारी चौपाल में दी जाती है।
ब्लाकवार अतिकुपोषित बच्चे (लाल श्रेणी)
ब्लाक अति कुपोषित बच्चे
उमर्दा 70
जलालाबाद 99
छिबरामऊ 65
कन्नौज 86
सौरिख 98
तालग्राम 129
हसेरन 64
गुगरापुर 44
शहरी क्षेत्र 29
ब्लाकवार कुपोषित बच्चे (पीली श्रेणी)
ब्लाक कुपोषित बच्चे
उमर्दा 400
जलालाबाद 231
छिबरामऊ 873
कन्नौज 461
सौरिख 375
तालग्राम 502
हसेरन 261
गुगरापुर 160
शहरी क्षेत्र 80
शहर की अपेक्षा ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कम जागरूक हैं। महिलाएं गर्भावस्था से लेकर बच्चे के जन्म लेने पर खानपान पर ध्यान नहीं देती हैं। इससे बच्चे कुपोषण का शिकार हो जाते हैं। कुपोषित बच्चों को सामान्य श्रेणी में लाने के लिए डबल पोषाहार समेत अन्य सुविधाएं दी जाती हैं। चौपाल लगाकर माता-पिता को जागरूक किया जा रहा है।
- नीलम कटियार, प्रभारी जिला कार्यक्रम अधिकारी।