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रेल हादसों में गई 112 की जान, मुआवजा किसी को नहीं

Tue, 02 Jan 2018 01:42 AM IST
राहुल दुबे, अमर उजाला कन्नौज
राहुल दुबे, अमर उजाला कन्नौज Updated Tue, 02 Jan 2018 01:42 AM IST
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Life of 112 in Rail Accidents, no compensation to anyone
डेमो - फोटो : demo
सफर का सबसे सुरक्षित साधन मानी जाने वाली ट्रेन से हुए हादसों में दो साल में 112 लोगों ने जान गंवाई। चौकाने वाली बात तो ये है कि इनमें से 48 मृतकों के परिजनों ने क्लेम के लिए रेल विभाग में दावा ठोंका, लेकिन किसी को भी क्लेम नहीं मिल सका। रेल विभाग की जांच में यह कहते हुए इन क्लेमों को खारिज कर दिया गया कि हादसे विभाग की गलती से नहीं हुए।
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 रेलवे हादसों में 2016 में 69 और 2017 में 43 लोगों की मौत हुई। 2016 में हादसों के शिकार हुए 69 में से 22 व 2017 में 43 में से 26 मृतकों के परिजनों ने मुआवजे के लिए रेल विभाग में क्लेम का दावा प्रस्तुत किया। मृतकों के परिजनों का कहना था कि हादसे रेल विभाग की गलती से हुए, ऐसे में उन्हें नियमाुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए। बरेली मंडल स्तर पर इन क्लेमों की जांच कराई गई। आश्चर्य की बात ये है कि जांच में विभाग ने सभी के सभी दावों को खारिज कर दिया और कहा कि हादसों के पीछे विभाग की कोई गलती नहीं थी। एसआई संजय राय के मुताबिक, 112 मौतों में एक सुसाइड का मामला भी है। किसी भी मौत में रेलवे की कोई गलती नहीं थी। लोगों ने रेलवे एक्ट का उल्लघंन किया और इसमें उनकी जान गई। इन कारणों के चलते कोई मुआवजा नहीं दिया गया।  
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सफर के दौरान बरतें सावधानी
कन्नौज। यदि आप पायदान पर बैठकर, गेट पर लटककर, या रेल की छत पर बैठकर यात्रा करते हैं, तोे ऐसा न करें। रेलवे एक्ट की धारा 156 व 147 में यह रेल नियमों का सीधा उल्लघंन है। ऐसा करने से यदि आप हादसे का शिकार हो रहे हैं तो विभाग की तरफ से मुआवजे का प्रावधान नहीं है। आरपीएफ एसआई संजय कुमार राय ने बताया कि ट्रेन में चिह्नित स्थान पर न बैठकर अन्य कहीं भी बैठकर यात्रा करने पर रेलवे एक्ट की धारा 156 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके तहत 500 रुपये जुर्माना या तीन माह की सजा या दोनों कार्रवाई हो सकती है। ओवरब्रिज का उपयोग न करते हुए रेलवे लाइन से होकर प्लेटफार्म बदलने पर, बंद क्रासिंग के नीचे से निकलने या अपने दो पहिया वाहन के निकालने, ट्रेस लाइन क्रास करने पर रेलवे एक्ट की धारा 147 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसके तहत छह माह की सजा या 1000 रुपये जुर्माना या दोनों का प्रावधान है। यह न्यायिक मजिस्ट्रेट के विवेक पर निर्भर करता है। ऐसे ही महिला बोगी में यात्रा करते पाए जाने पर रेलवे एक्ट 162 के तहत कार्रवाई की जाती है। इसमें 500 रुपये जुर्माना या एक माह की सजा या दोनों का प्रावधान है।
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2017 में 831 चालान
कन्नौज। ट्रेस पास करते हुए पकड़े जाने पर, पायदान पर यात्रा करने वाले व महिला बोगी में यात्रियों के खिलाफ आरपीएफ ने एक्शन लेते सन 2017 में अभी तक 831 लोगों का चालान किया है। आरपीएफ एसआई संजय कुमार राय ने बताया कि 2017 में पायदान पर बैठकर यात्रा करने वाले यात्रियों 240 चालान व ट्रेस लाइन पार करने के कुल 286 लोगाें का चालान किया गया। ऐसे ही महिला बोगी में यात्रा करने वाले 305 लोगों के चालान किए गए।


जागरुकता अभियान का फायदा, मृत्यु दर हुई कम
कन्नौज। दो वर्षों में हुई एक सैंकड़ा से भी अधिक मौतों को रोकने के लिए आरपीएफ ने समय-समय पर संरक्षा अभियान को गति देकर लोगाें को जागरुक भी किया। इसका फायदा भी मिल रहा है। 2016 में 69 मौतें व 11 घायल हुए तो वहीं 2017 में यह आंकड़े कम होकर 43 मौतों पर आ गए है। वहीं 2017 में घायल होने वाली संख्या 10 है। रेलवे के राजस्व में करीब ढाई लाख की बढ़ोत्तरी की है। एसआई संजय कुमार राय ने बताया कि 156, 147 व 162 के तहत चालान कर रेलवे ने 2017 में दो लाख 44 हजार 650 रुपयाें की वसूली की है।
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