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Kannauj News: लाडो के पापा ने डॉक्टर पर दर्ज कराए केस को लिया वापस
Sun, 01 Jun 2025 12:23 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Sun, 01 Jun 2025 12:23 AM IST
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कन्नौज। निजी अस्पताल में छात्रा रुचि गुप्ता की मौत के मामले में 13 दिन बाद शनिवार को एक नया मोड़ आया है। राजनीतिक हस्तक्षेप के बाद छात्रा के परिजनों ने डॉक्टर के खिलाफ दर्ज रिपोर्ट को वापस लेने के लिए एसपी विनोद कुमार को शपथपत्र सौंप दिया। पिता ने स्वीकार किया कि बेटी की गलत इंजेक्शन लगाने से मौत नहीं हुई थी। दबाव के चलते अस्पताल संचालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी थी।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष विपिन द्विवेदी और सौरिख नगर पंचायत अध्यक्ष राहुल गुप्ता के साथ छात्रा रुचि के परिजन एसपी से मिले। छात्रा के पिता राजेश गुप्ता ने एसपी को तीन शपथ पत्र दिए। इसमें बताया गया कि वह कृष्णा हॉस्पिटल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। उनकी बेटी को गलत इंजेक्शन नहीं दिया गया था। बहकावे में आकर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। उन्होंने बताया कि 27 मई को उन्हें शपथपत्र दाखिल करने से रोका गया था और काफी दबाव भी बनाया गया पर अब वह कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
भाजपा जिला उपाध्यक्ष विपिन द्विवेदी ने बताया कि छात्रा की मौत के बाद कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंकने लगे और उन्होंने बवाल करा दिया था। परिजन विरोध में तब भी थे। कुछ लोग जातीय संघर्ष भी कराना चाहते थे। परिजनों की सूझबूझ से वह अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। एसपी ने बताया कि परिजनों के हलफनामे के आधार पर विवेचना में फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाएगी।
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गौरतलब है कि 18 मई को छिबरामऊ के पूर्वी बाईपास पर एक निजी अस्पताल में तालग्राम थाना क्षेत्र के ग्राम बेहटा खास निवासी राजेश गुप्ता ने 15 वर्षीय बेटी रुचि को भर्ती कराया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था और अलीगढ़ कानपुर हाईवे जाम कर दिया था। बाद में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इस मामले में अस्पताल संचालक वैभव दुबे और सहयोगी उत्कर्ष को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गले की फांस बना रहेगा पुलिस का मुकदमा
छात्रा की मौत के अगले दिन कोतवाली छिबरामऊ का घेराव करने और हंगामा व तोड़फोड़ करने पर उपनिरीक्षक राजेश प्रताप सिंह ने 15 नामजद और 120 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी थी। इस मामले में पुलिस वीडियो फुटेज से आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास भी कर रही है। यह रिपोर्ट अब भी गले की फांस बना रहेगा। एसपी का कहना है कि कुछ लोगों ने कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास किया था, जिस कारण पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी। इस मामले में किसी निर्दोष पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जबकि दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।
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भाजपा जिला उपाध्यक्ष विपिन द्विवेदी और सौरिख नगर पंचायत अध्यक्ष राहुल गुप्ता के साथ छात्रा रुचि के परिजन एसपी से मिले। छात्रा के पिता राजेश गुप्ता ने एसपी को तीन शपथ पत्र दिए। इसमें बताया गया कि वह कृष्णा हॉस्पिटल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं। उनकी बेटी को गलत इंजेक्शन नहीं दिया गया था। बहकावे में आकर रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। उन्होंने बताया कि 27 मई को उन्हें शपथपत्र दाखिल करने से रोका गया था और काफी दबाव भी बनाया गया पर अब वह कानूनी कार्रवाई नहीं चाहते हैं।
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भाजपा जिला उपाध्यक्ष विपिन द्विवेदी ने बताया कि छात्रा की मौत के बाद कुछ लोग राजनीतिक रोटियां सेंकने लगे और उन्होंने बवाल करा दिया था। परिजन विरोध में तब भी थे। कुछ लोग जातीय संघर्ष भी कराना चाहते थे। परिजनों की सूझबूझ से वह अपने मंसूबों में सफल नहीं हो सके। एसपी ने बताया कि परिजनों के हलफनामे के आधार पर विवेचना में फाइनल रिपोर्ट लगा दी जाएगी।
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गौरतलब है कि 18 मई को छिबरामऊ के पूर्वी बाईपास पर एक निजी अस्पताल में तालग्राम थाना क्षेत्र के ग्राम बेहटा खास निवासी राजेश गुप्ता ने 15 वर्षीय बेटी रुचि को भर्ती कराया था। वहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई थी। परिजनों ने गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा किया था और अलीगढ़ कानपुर हाईवे जाम कर दिया था। बाद में रिपोर्ट दर्ज करा दी थी। इस मामले में अस्पताल संचालक वैभव दुबे और सहयोगी उत्कर्ष को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
गले की फांस बना रहेगा पुलिस का मुकदमा
छात्रा की मौत के अगले दिन कोतवाली छिबरामऊ का घेराव करने और हंगामा व तोड़फोड़ करने पर उपनिरीक्षक राजेश प्रताप सिंह ने 15 नामजद और 120 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करा दी थी। इस मामले में पुलिस वीडियो फुटेज से आरोपियों की पहचान कर गिरफ्तारी के प्रयास भी कर रही है। यह रिपोर्ट अब भी गले की फांस बना रहेगा। एसपी का कहना है कि कुछ लोगों ने कानून व्यवस्था को बिगाड़ने का प्रयास किया था, जिस कारण पुलिस को रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी। इस मामले में किसी निर्दोष पर कोई कार्रवाई नहीं होगी, जबकि दोषी को छोड़ा नहीं जाएगा।