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काऊ मिल्क प्लांट: हवाई निकला दुग्ध विकास मंत्री का वादा
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अधिकारियों से वार्ता करती लखनऊ से आई टीम।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। 13 सितंबर 2018 को उमर्दा में 141 करोड़ की लागत से बने देश के इकलौते काऊ मिल्क प्लांट का निरीक्षण करने आए दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी का वादा हकीकत नहीं बन पाया। उन्होंने निरीक्षण के दौरान एक महीने के भीतर यानी नवरात्र तक प्लांट को हर हाल में चालू कराने का वादा किया था। निरीक्षण के दौरान अफसरों को प्लांट के सामने की सड़क को जल्द से जल्द बनवाने के भी निर्देश दिए थे। सड़क आज तक नहीं बनी। 14 जिलों की तरक्की से जुड़े इस प्लांट को चालू करने में शासन कतई संजीदा नहीं है। जिलाधिकारी ने करीब डेढ़ साल पहले प्लांट के सामने की सड़क बनवाने का प्रस्ताव भेजा था। कई बार रिमाइंडर भी भेजे। नतीजा सिफर है। अफसरों की सुस्ती से फाइल अभी तक आगे नहीं बढ़ी।
गोपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से काऊ मिल्क प्लांट का निर्माण कार्य 2013 में शुरू किया गया था। उमर्दा में 8.76 एकड़ भूमि पर बने इस प्लांट को जुलाई 2017 में शुरू किया जाना था। इसे बनने में मार्च 2018 तक का समय लग गया। प्लांट को गुजरात की इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी (आईडीएमसी) ने लगाया है। मार्च 2018 में इसकी सफल टेस्टिंग भी कर ली गई। इसके बावजूद प्लांट में दूध आना शुरू नहीं हुआ। इसके पीछे का प्रमुख कारण प्लांट के सामने स्थित तीन किमी लंबी सड़क है। इस सड़क को बनाने के लिए दुग्ध विकास विभाग ने पांच करोड़ की धनराशि मुहैया करा दी थी। करीब 12 मीटर चौड़ी इस सड़क को बनाने के लिए डीएम रवींद्र कुमार के स्तर से प्रस्ताव शासन को भेजा गया। जवाब न आने पर कई बार रिमाइंडर भेजे, अभी तक मामला आगे नहीं बढ़ा है।
13 सितंबर 2018 को दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी प्लांट का निरीक्षण करने आए थे। वह प्लांट के सामने की सड़क जल्द बनवाने के निर्देश दे गए थे। कहा था, नवरात्र (वर्ष 2018 के नवरात्र) में प्लांट को चालू कर दिया जाएगा। संभावना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद उद्घाटन करने आएं। उनके इन निर्देशों के बाद भी कोई असर नहीं हुआ। न तो सड़क बनी, और न ही प्लांट का उद्घाटन हो पाया। इससे पहले 28 अगस्त 2018 को प्रमुख सचिव दुग्ध विकास विभाग डॉ. सुधीर एम. बोवड़े ने भी प्लांट का निरीक्षण किया था।
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लखनऊ से आई टीम बोली...सड़क बिना नहीं चालू होगा प्लांट
कन्नौज। एक साल बाद शुक्रवार को दुग्ध विकास विभाग की प्रभारी गुणवत्ता शबनम चौधरी की अध्यक्षता में प्रभारी अभियंत्रण राधेश्याम कुशवाहा, प्रभारी ऑपरेशन राजीव सिन्हा के साथ टीम लखनऊ से प्लांट पहुंची। प्लांट के जनरल मैनेजर संतोष दिवाकर, स्थानीय प्रभारी नवीन चंद्रा, कार्यदायी संस्था आईटीएमसी के प्रबंधक आरके मिश्रा के साथ बैठक की। बैठक के दौरान टीम ने साफ कहा कि दूध से भरे टैंकरों के लिए यह सड़क उपयुक्त नहीं है। कभी भी हादसा हो सकता है। बिना सड़क बने प्लांट को चालू नहीं किया जा सकता है।
गोपालकों को प्रति लीटर पांच रुपये मिलेगा प्रोत्साहन
कन्नौज। प्लांट में गाय का दूध देने वाले गोपालकों को पांच रुपये प्रति लीटर के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। विभाग भैंस के दूध से पांच रुपये ज्यादा में गाय का दूध लेगा। इससे कि गोपालक मिलावट न कर सकें। मिलावट को प्लांट में करीब पांच करोड़ कीमत की लगी फ्रांस की मशीन पकड़ लेगी।
नोडल एजेंसी 12 जिलों से उपलब्ध कराएगी रोजाना एक लाख लीटर दूध
प्लांट को दूध उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (नोडल एजेंसी) को दी गई है। यह कन्नौज के साथ ही फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, मैनपुरी, बाराबंकी, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद, आगरा, बरेली और शाहजहांपुर के गोपालकों से दूध लेकर प्लांट तक पहुंचाएगी। एजेंसी प्लांट को रोजाना करीब एक लाख लीटर दूध उपलब्ध कराएगी।
काऊ मिल्क प्लांट की सड़क के लिए शासन को 2018 में प्रस्ताव भेजा जा चुका है। रिमाइंडर भी गए हैं। वह एक बार फिर रिमाइंडर भेज रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी।
प्लांट के निर्माण के समय ही सड़क का निर्माण हो जाता तो आज यह समस्या नहीं होती। आश्चर्य की बात है कि प्रस्ताव बनाते समय संकरी सड़क की ओर किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया, जरा सी चूक के कारण 141 करोड़ से बना प्लांट चालू नहीं हो पा रहा है।
- राजेश सचान, जनरल मैनेजर, काऊ मिल्क प्लांट।
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गोपालकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से काऊ मिल्क प्लांट का निर्माण कार्य 2013 में शुरू किया गया था। उमर्दा में 8.76 एकड़ भूमि पर बने इस प्लांट को जुलाई 2017 में शुरू किया जाना था। इसे बनने में मार्च 2018 तक का समय लग गया। प्लांट को गुजरात की इंडियन डेयरी मशीनरी कंपनी (आईडीएमसी) ने लगाया है। मार्च 2018 में इसकी सफल टेस्टिंग भी कर ली गई। इसके बावजूद प्लांट में दूध आना शुरू नहीं हुआ। इसके पीछे का प्रमुख कारण प्लांट के सामने स्थित तीन किमी लंबी सड़क है। इस सड़क को बनाने के लिए दुग्ध विकास विभाग ने पांच करोड़ की धनराशि मुहैया करा दी थी। करीब 12 मीटर चौड़ी इस सड़क को बनाने के लिए डीएम रवींद्र कुमार के स्तर से प्रस्ताव शासन को भेजा गया। जवाब न आने पर कई बार रिमाइंडर भेजे, अभी तक मामला आगे नहीं बढ़ा है।
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13 सितंबर 2018 को दुग्ध विकास मंत्री लक्ष्मीनारायण चौधरी प्लांट का निरीक्षण करने आए थे। वह प्लांट के सामने की सड़क जल्द बनवाने के निर्देश दे गए थे। कहा था, नवरात्र (वर्ष 2018 के नवरात्र) में प्लांट को चालू कर दिया जाएगा। संभावना है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद उद्घाटन करने आएं। उनके इन निर्देशों के बाद भी कोई असर नहीं हुआ। न तो सड़क बनी, और न ही प्लांट का उद्घाटन हो पाया। इससे पहले 28 अगस्त 2018 को प्रमुख सचिव दुग्ध विकास विभाग डॉ. सुधीर एम. बोवड़े ने भी प्लांट का निरीक्षण किया था।
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लखनऊ से आई टीम बोली...सड़क बिना नहीं चालू होगा प्लांट
कन्नौज। एक साल बाद शुक्रवार को दुग्ध विकास विभाग की प्रभारी गुणवत्ता शबनम चौधरी की अध्यक्षता में प्रभारी अभियंत्रण राधेश्याम कुशवाहा, प्रभारी ऑपरेशन राजीव सिन्हा के साथ टीम लखनऊ से प्लांट पहुंची। प्लांट के जनरल मैनेजर संतोष दिवाकर, स्थानीय प्रभारी नवीन चंद्रा, कार्यदायी संस्था आईटीएमसी के प्रबंधक आरके मिश्रा के साथ बैठक की। बैठक के दौरान टीम ने साफ कहा कि दूध से भरे टैंकरों के लिए यह सड़क उपयुक्त नहीं है। कभी भी हादसा हो सकता है। बिना सड़क बने प्लांट को चालू नहीं किया जा सकता है।
गोपालकों को प्रति लीटर पांच रुपये मिलेगा प्रोत्साहन
कन्नौज। प्लांट में गाय का दूध देने वाले गोपालकों को पांच रुपये प्रति लीटर के हिसाब से प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। विभाग भैंस के दूध से पांच रुपये ज्यादा में गाय का दूध लेगा। इससे कि गोपालक मिलावट न कर सकें। मिलावट को प्लांट में करीब पांच करोड़ कीमत की लगी फ्रांस की मशीन पकड़ लेगी।
नोडल एजेंसी 12 जिलों से उपलब्ध कराएगी रोजाना एक लाख लीटर दूध
प्लांट को दूध उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी उत्तर प्रदेश कोआपरेटिव डेयरी फेडरेशन (नोडल एजेंसी) को दी गई है। यह कन्नौज के साथ ही फर्रुखाबाद, कानपुर नगर, मैनपुरी, बाराबंकी, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, फिरोजाबाद, आगरा, बरेली और शाहजहांपुर के गोपालकों से दूध लेकर प्लांट तक पहुंचाएगी। एजेंसी प्लांट को रोजाना करीब एक लाख लीटर दूध उपलब्ध कराएगी।
काऊ मिल्क प्लांट की सड़क के लिए शासन को 2018 में प्रस्ताव भेजा जा चुका है। रिमाइंडर भी गए हैं। वह एक बार फिर रिमाइंडर भेज रहे हैं। उम्मीद है कि जल्द सड़क का निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाएगा।
- रवींद्र कुमार, जिलाधिकारी।
प्लांट के निर्माण के समय ही सड़क का निर्माण हो जाता तो आज यह समस्या नहीं होती। आश्चर्य की बात है कि प्रस्ताव बनाते समय संकरी सड़क की ओर किसी ने ध्यान क्यों नहीं दिया, जरा सी चूक के कारण 141 करोड़ से बना प्लांट चालू नहीं हो पा रहा है।
- राजेश सचान, जनरल मैनेजर, काऊ मिल्क प्लांट।