{"_id":"60f31da88ebc3e834152bd42","slug":"kannauj-news-kannauj-news-knp640846263","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरदोई के खाद्य विपणन अधिकारी की बोलेरो से हुआ था अपहरण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरदोई के खाद्य विपणन अधिकारी की बोलेरो से हुआ था अपहरण
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कन्नौज। गुरसहायगंज के खाद व्यापारी और पल्लेदार के अपहरण मामले में एक और खुलासा हुआ है। पुलिस के हाथ एक और शख्स सुमित लगा। यह फोन कर फिरौती मांगने के लिए लगाया गया था। पेशे से इंजीनियर है। शनिवार को पुलिस कार्यालय में एसपी प्रशांत वर्मा ने प्रेसवार्ता कर सुमित की गिरफ्तारी की पुष्टि की।
तफ्तीश में सामने आया है कि दस जुलाई को एक बर्थडे पार्टी में रंजीत यादव और सुमित यादव की मुलाकात गुरसहायगंज क्षेत्र के कामिल सिद्दीकी से हुई थी। रंजीत यादव फतेहगढ़ के हिस्ट्रीशीटर राममिस्टर का भतीजा है। रंजीत और सुमित पुराने दोस्त हैं। रंजीत की कामिल से भी दोस्ती थी। बर्थडे पार्टी में ही तीनों दोस्तों ने अपहरण की घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया। इसके बाद कामिल ने अपने क्षेत्र के खाद व्यापारी विकास गुप्ता का प्रस्ताव रखा। विकास की शादी में बहुत खर्च हुआ था। इसी आधार पर इसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
कामिल ने रेकी का जिम्मा संभाला। तब तक रंजीत यादव ने प्रस्ताव की जानकारी अपने हिस्ट्रीशीटर चाचा राममिस्टर यादव और चाचा के साथी भूपेंद्र यादव को दी। घटना को अंजाम देने के लिए रंजीत और सुमित ने फर्रुखाबाद में बोलेरो तलाशना शुरू किया। कोई भी बोलेरो घटना व प्रस्ताव में शामिल होने लायक नहीं मिली। इसके बाद रंजीत ने हरदोई के खाद्य विपणन अधिकारी विजय सिंह यादव के ड्राइवर पंकज राठौर से संपर्क साधा। उसकी बोलेरो बुक कर ली। बोलेरो में उत्तर प्रदेश सरकार लिखा था। सफेद पर्दे लगे होने से पुलिस के सामने से निकलना आसान रहा। जहां कहीं चेकिंग देखते, वहां हूटर बजा देते थे।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुरसहायगंज के कामिल ने खाद व्यापारी विकास गुप्ता की आने व जाने तक की काफी जानकारी सुमित और रंजीत तक पहुंचा दी थी। गुरुवार को बोलेरो में सवार होकर राममिस्टर यादव, भूपेंद्र यादव, पंकज राठौर, रंजीत यादव व सुमित यादव गुरसहायगंज पहुंचे। रंजीत ने दुकान पर लिखे नंबर पर फोन किया। विकास के चाचा अविनाश से खाद लेने की बात कही। अविनाश ने खाद देने के लिए विकास को दुकान पर भेज दिया। विकास अपने साथ पल्लेदार असलम को लेकर पहुंचा। विकास और असलम के दुकान पर पहुंचते ही रंजीत ने खुद को खाद्य विपणन अधिकारी बताकर नकली खाद बेचने की बात कहते हुए बोलेरो में बैठा लिया। बाद में असलम की पीठ पर पिस्टल लगाकर सुमित ने असलम को बैठा कर दोनों को अगवा कर लिया।
सुमित ने बुक की थी बोलेरो
फतेहगढ़ के रमपुरा गांव के सुमित यादव ने हरदोई जिले में तैनात खाद्य विपणन अधिकारी की प्राइवेट बोलेरो के ड्राइवर पंकज राठौर से बुक किया था। बोलेरो प्राइवेट थी, उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था। पर्दे भी सफेद लगे थे। अब पंकज का इस अपहरण में कितना योगदान है, यह पुलिस उससे अभी कबूल नहीं करा पाई है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित कुमार यादव नोएडा के सेक्टर 18 मेें निजी कंपनी में इंजीनियर था। कोरोना कर्फ्यू के दौरान अपने घर पर आया था। दस जुलाई को बर्थडे पार्टी में सुमित की रंजीत और कामिल से मुलाकात हुई। अपहरण का प्लान तैयार किया गया।
घटना में शामिल छह अन्य की तलाश जारी
इस घटना में गुरसहायगंज क्षेत्र का कामिल सिद्दिकी, फतेहगढ़ क्षेत्र के हिमांशु दूबे, शिवनाथ और रंजीत कुमार की तलाश जारी है। दो अन्य अज्ञात की भी तलाश की जा रही है। भागे आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को लगता है कि अभी कुछ और नाम भी आ सकते हैं।
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तफ्तीश में सामने आया है कि दस जुलाई को एक बर्थडे पार्टी में रंजीत यादव और सुमित यादव की मुलाकात गुरसहायगंज क्षेत्र के कामिल सिद्दीकी से हुई थी। रंजीत यादव फतेहगढ़ के हिस्ट्रीशीटर राममिस्टर का भतीजा है। रंजीत और सुमित पुराने दोस्त हैं। रंजीत की कामिल से भी दोस्ती थी। बर्थडे पार्टी में ही तीनों दोस्तों ने अपहरण की घटना को अंजाम देने का प्लान बनाया। इसके बाद कामिल ने अपने क्षेत्र के खाद व्यापारी विकास गुप्ता का प्रस्ताव रखा। विकास की शादी में बहुत खर्च हुआ था। इसी आधार पर इसे तुरंत स्वीकार कर लिया गया।
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कामिल ने रेकी का जिम्मा संभाला। तब तक रंजीत यादव ने प्रस्ताव की जानकारी अपने हिस्ट्रीशीटर चाचा राममिस्टर यादव और चाचा के साथी भूपेंद्र यादव को दी। घटना को अंजाम देने के लिए रंजीत और सुमित ने फर्रुखाबाद में बोलेरो तलाशना शुरू किया। कोई भी बोलेरो घटना व प्रस्ताव में शामिल होने लायक नहीं मिली। इसके बाद रंजीत ने हरदोई के खाद्य विपणन अधिकारी विजय सिंह यादव के ड्राइवर पंकज राठौर से संपर्क साधा। उसकी बोलेरो बुक कर ली। बोलेरो में उत्तर प्रदेश सरकार लिखा था। सफेद पर्दे लगे होने से पुलिस के सामने से निकलना आसान रहा। जहां कहीं चेकिंग देखते, वहां हूटर बजा देते थे।
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पुलिस सूत्रों के मुताबिक गुरसहायगंज के कामिल ने खाद व्यापारी विकास गुप्ता की आने व जाने तक की काफी जानकारी सुमित और रंजीत तक पहुंचा दी थी। गुरुवार को बोलेरो में सवार होकर राममिस्टर यादव, भूपेंद्र यादव, पंकज राठौर, रंजीत यादव व सुमित यादव गुरसहायगंज पहुंचे। रंजीत ने दुकान पर लिखे नंबर पर फोन किया। विकास के चाचा अविनाश से खाद लेने की बात कही। अविनाश ने खाद देने के लिए विकास को दुकान पर भेज दिया। विकास अपने साथ पल्लेदार असलम को लेकर पहुंचा। विकास और असलम के दुकान पर पहुंचते ही रंजीत ने खुद को खाद्य विपणन अधिकारी बताकर नकली खाद बेचने की बात कहते हुए बोलेरो में बैठा लिया। बाद में असलम की पीठ पर पिस्टल लगाकर सुमित ने असलम को बैठा कर दोनों को अगवा कर लिया।
सुमित ने बुक की थी बोलेरो
फतेहगढ़ के रमपुरा गांव के सुमित यादव ने हरदोई जिले में तैनात खाद्य विपणन अधिकारी की प्राइवेट बोलेरो के ड्राइवर पंकज राठौर से बुक किया था। बोलेरो प्राइवेट थी, उत्तर प्रदेश सरकार लिखा हुआ था। पर्दे भी सफेद लगे थे। अब पंकज का इस अपहरण में कितना योगदान है, यह पुलिस उससे अभी कबूल नहीं करा पाई है। उसे गिरफ्तार किया जा चुका है। सुमित कुमार यादव नोएडा के सेक्टर 18 मेें निजी कंपनी में इंजीनियर था। कोरोना कर्फ्यू के दौरान अपने घर पर आया था। दस जुलाई को बर्थडे पार्टी में सुमित की रंजीत और कामिल से मुलाकात हुई। अपहरण का प्लान तैयार किया गया।
घटना में शामिल छह अन्य की तलाश जारी
इस घटना में गुरसहायगंज क्षेत्र का कामिल सिद्दिकी, फतेहगढ़ क्षेत्र के हिमांशु दूबे, शिवनाथ और रंजीत कुमार की तलाश जारी है। दो अन्य अज्ञात की भी तलाश की जा रही है। भागे आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को लगता है कि अभी कुछ और नाम भी आ सकते हैं।