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मेडिकल कॉलेज में हो सकेगी हीमोफीलिया की जांच
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तिर्वा। मेडिकल कॉलेज में अब हीमोफीलिया की जांच संभव हो सकेगी। इसके लिए कॉलेज में कोएगुलेशन एनलाइजर (जमावट विश्लेषक) मशीन मंगवा ली गई है। हालांकि इसे अभी एक कमरे में बंद रखा गया है। हीमोफीलिया जांच रक्तस्राव न रुकने के दौरान सही वजह जानने के लिए की जाती है।
मनुष्य में यह आनुवांशिक रोग होता है। जब शरीर में रक्तस्राव होने के बाद नहीं रुकता तो हीमोफीलिया जांच की जरूरत होती है। कई बार यह रक्तस्राव जानलेवा हो जाता है। जांच कराने के लिए मरीजों को बाहर निजी अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते थे। वहां इसकी अलग-अलग रकम ली जाती है। हीमोफीलिया जांच मेडिकल कालेज में शुरू कराने के लिए कालेज प्रशासन ने इस जांच में प्रयोग की जाने वाली मशीन मंगवा ली है।
ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.अनीता ओमहरे ने बताया कि जब रक्तस्राव होता है और वह बहने से नहीं रुकता। या फिर रक्तस्राव के थक्के जम जाते हैं तो इसके लिए हीमोफीलिया की जांच करवाई जाती है। अभी तक इसकी जांच के लिए लोगों को प्राइवेट पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता था। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है।
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मनुष्य में यह आनुवांशिक रोग होता है। जब शरीर में रक्तस्राव होने के बाद नहीं रुकता तो हीमोफीलिया जांच की जरूरत होती है। कई बार यह रक्तस्राव जानलेवा हो जाता है। जांच कराने के लिए मरीजों को बाहर निजी अस्पताल के चक्कर लगाने पड़ते थे। वहां इसकी अलग-अलग रकम ली जाती है। हीमोफीलिया जांच मेडिकल कालेज में शुरू कराने के लिए कालेज प्रशासन ने इस जांच में प्रयोग की जाने वाली मशीन मंगवा ली है।
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ब्लड बैंक प्रभारी डॉ.अनीता ओमहरे ने बताया कि जब रक्तस्राव होता है और वह बहने से नहीं रुकता। या फिर रक्तस्राव के थक्के जम जाते हैं तो इसके लिए हीमोफीलिया की जांच करवाई जाती है। अभी तक इसकी जांच के लिए लोगों को प्राइवेट पैथोलॉजी का सहारा लेना पड़ता था। विशेषज्ञों के अनुसार इस रोग का कारण एक रक्त प्रोटीन की कमी होती है, जिसे क्लॉटिंग फैक्टर कहा जाता है। इस फैक्टर की विशेषता यह है कि यह बहते हुए रक्त के थक्के जमाकर उसका बहना रोकता है।
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