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जिला अस्पताल की ओपीडी पहले दिन फेल
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कन्नौज। जिला अस्पताल में आम रोगियों के लिए शुरू की गई ओपीडी डॉक्टरों के न बैठने से पहले दिन फेल नजर आई। यहां 90 मरीजों ने रजिस्ट्रेशन कराया। कुछ कुत्ता के काटने तो कुछ अन्य रोग से ग्रसित थे। नाक, कान व गला, नेत्र रोग के अलावा दंत रोग से संबंधित डॉक्टरों ने पूरे समय ओपीडी में बैठ कर मरीजों की जांच कर उपचार दिया। अन्य रोगों के डॉक्टर को दिखा कर दवा लेने आए मरीज इंतजार में अस्पताल की बेंच पर सोते रहे। इन्हें दोपहर एक बजे तक डॉक्टर नहीं मिले।
शासन ने चार जून से सभी अस्पतालों में ओपीडी शुरू करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को महकमे के जिम्मेदारों ने तैयारियां पूरी करने का भी दावा किया था। पहले दिन ही इंतजार धड़ाम रहे। इससे मरीजों को खासी परेशानी हुई। बताया गया कि सुबह के समय आयुष के अलावा सर्जन भी ओपीडी में बैठे थे। मरीज न होने से कक्ष छोड़ कर चले गए। सुबह के समय सीएमएस ने अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों से पूछताछ भी की थी। उस समय ओपीडी में अधिकतर डॉक्टर मरीजों की जांचकर उपचार दे रहे थे। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु का कहना है कि पहला दिन होने से कुछ डॉक्टर देर से आए। साथ ही मरीजों की संख्या भी कम रही। इन्हें चेतावनी दी गई है। पहले दिन व्यवस्था ठीक रही है।
सर्जन कक्ष में लगा रहा ताला
जिला अस्पताल की ओपीडी के सर्जन कक्ष में ताला लटक रहा था। बाहर कुर्सी पर कुछ मरीज डॉक्टर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। मरीजों ने बताया कि कक्ष का ताला सुबह से नहीं खुला है। पास के अन्य कक्ष में बैठे कर्मचारियों से मरीज सर्जन के संबंध में जानकारी करते तो बताया जाता कि देर से आते हैं। आएंगे, यह नहीं पता कि कब तक आएंगे।
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खाली पड़ा रहा हड्डी रोग का कक्ष
ओपीडी परिसर में हड्डी रोग से संबंधित कक्ष खुला था। यहां न तो कर्मचारी थे, और न ही डॉक्टर। दो मरीज पास की कुर्सी पर बैठे हड्डी रोेग से संबंधित डॉक्टर की प्रतीक्षा कर रहे थे। बताया गया कि डॉक्टर आए हैं। वह सीएमएस के कक्ष में बैठे हैं। बाद में पता चला कि वह नहीं आए हैं। इससे मरीज इधर-उधर भटकते हुए घर जाने को मजबूर हो गए।
ओपीडी में आए सिर्फ 90 मरीज
ओपीडी के दवा वितरण कक्ष के बाहर तीन मरीज दवा ले रहे थे। एक कर्मचारी पर्चे देख कर दवा दे रहा था। महिला कर्मचारी नाम पूछ कर पर्चा बना रही थी। बताया कि अब तक 90 मरीज पर्चा बनवा कर पंजीकरण करा चुके हैं। पहला दिन होने से कम मरीज आए। यहां 700 से 900 मरीज नियमित पंजीकरण कराते रहे हैं।
कर्मचारियों को लगाई फटकार
सीएमएस कार्यालय में कुछ डॉक्टर व कर्मचारी बैठे थे। सीएमएस डॉ. शक्ति बसु कर्मचारियों को दिशा निर्देश दे रहे थे। कह रहे थे कि किसी तरह की लापरवाही नहीं की जाएगी। शासन के निर्देश पर ओपीडी की व्यवस्था ठीक तरह से संचालित की जाएगी। सभी डॉक्टर नियमित अस्पताल पहुंच कर अपने कक्ष में बैठ कर कार्य करें।
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शासन ने चार जून से सभी अस्पतालों में ओपीडी शुरू करने के निर्देश दिए थे। गुरुवार को महकमे के जिम्मेदारों ने तैयारियां पूरी करने का भी दावा किया था। पहले दिन ही इंतजार धड़ाम रहे। इससे मरीजों को खासी परेशानी हुई। बताया गया कि सुबह के समय आयुष के अलावा सर्जन भी ओपीडी में बैठे थे। मरीज न होने से कक्ष छोड़ कर चले गए। सुबह के समय सीएमएस ने अस्पताल का निरीक्षण कर मरीजों से पूछताछ भी की थी। उस समय ओपीडी में अधिकतर डॉक्टर मरीजों की जांचकर उपचार दे रहे थे। जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. शक्ति बसु का कहना है कि पहला दिन होने से कुछ डॉक्टर देर से आए। साथ ही मरीजों की संख्या भी कम रही। इन्हें चेतावनी दी गई है। पहले दिन व्यवस्था ठीक रही है।
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सर्जन कक्ष में लगा रहा ताला
जिला अस्पताल की ओपीडी के सर्जन कक्ष में ताला लटक रहा था। बाहर कुर्सी पर कुछ मरीज डॉक्टर के आने की प्रतीक्षा कर रहे थे। मरीजों ने बताया कि कक्ष का ताला सुबह से नहीं खुला है। पास के अन्य कक्ष में बैठे कर्मचारियों से मरीज सर्जन के संबंध में जानकारी करते तो बताया जाता कि देर से आते हैं। आएंगे, यह नहीं पता कि कब तक आएंगे।
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खाली पड़ा रहा हड्डी रोग का कक्ष
ओपीडी परिसर में हड्डी रोग से संबंधित कक्ष खुला था। यहां न तो कर्मचारी थे, और न ही डॉक्टर। दो मरीज पास की कुर्सी पर बैठे हड्डी रोेग से संबंधित डॉक्टर की प्रतीक्षा कर रहे थे। बताया गया कि डॉक्टर आए हैं। वह सीएमएस के कक्ष में बैठे हैं। बाद में पता चला कि वह नहीं आए हैं। इससे मरीज इधर-उधर भटकते हुए घर जाने को मजबूर हो गए।
ओपीडी में आए सिर्फ 90 मरीज
ओपीडी के दवा वितरण कक्ष के बाहर तीन मरीज दवा ले रहे थे। एक कर्मचारी पर्चे देख कर दवा दे रहा था। महिला कर्मचारी नाम पूछ कर पर्चा बना रही थी। बताया कि अब तक 90 मरीज पर्चा बनवा कर पंजीकरण करा चुके हैं। पहला दिन होने से कम मरीज आए। यहां 700 से 900 मरीज नियमित पंजीकरण कराते रहे हैं।
कर्मचारियों को लगाई फटकार
सीएमएस कार्यालय में कुछ डॉक्टर व कर्मचारी बैठे थे। सीएमएस डॉ. शक्ति बसु कर्मचारियों को दिशा निर्देश दे रहे थे। कह रहे थे कि किसी तरह की लापरवाही नहीं की जाएगी। शासन के निर्देश पर ओपीडी की व्यवस्था ठीक तरह से संचालित की जाएगी। सभी डॉक्टर नियमित अस्पताल पहुंच कर अपने कक्ष में बैठ कर कार्य करें।