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नाबालिग बालिका ने पुलिस को फोन की अपनी शादी रुुकवाई
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कन्नौज। मंडी समिति के व्यापारियों द्वारा अधिक दाम पर किसानों से खरीदे गए मक्का के भाव अचानक गिर गए। ऐसे में मंडी में 28 हजार क्विंटल मक्का डंप है। भाव गिरने से मंडी के व्यापारियों को करीब चार करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
मंडी समिति के व्यापारियों ने बरसाती मक्का को किसानों से खरीदा। अधिकतर मक्का 1350 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की गई। मंडी के व्यापारियों ने सोचा था कि मक्का के भाव चढ़ेंगे। इससे व्यापारियों की 28 हजार क्विंटल मक्का मंडी समिति में डंप हो गई है। अब मक्का के थोक भाव 1325 से 1350 रुपये है। इस दर से मक्का बेचने पर किसानों को खासा नुकसान होगा। एक आकलन के अनुसार, व्यापारी यदि गिरे रेट से मक्का को थोक में बेंचते है तो उनको चार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसको लेकर व्यापारी परेशान है।
कई व्यापारी तो घाटा होने के बाद भी मक्का बेच रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस उम्मीद के साथ उन्होंने मक्का को रोका था कि भाव अधिक होने पर वह बेच देंगे पर भाव लगातार गिर जाने से व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बीते वर्ष भी व्यापारियों ने मक्का रोकी थी उस समय भी व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इस साल मक्का के भाव गिरने की मुख्य वजह कोरोना के चलते पोल्ट्रीफार्म न चालू होना रहा। बताते हैं कि सबसे अधिक मक्का की खपत पोल्ट्रीफार्म में होती है।
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मंडी समिति के व्यापारियों ने बरसाती मक्का को किसानों से खरीदा। अधिकतर मक्का 1350 से 1400 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की गई। मंडी के व्यापारियों ने सोचा था कि मक्का के भाव चढ़ेंगे। इससे व्यापारियों की 28 हजार क्विंटल मक्का मंडी समिति में डंप हो गई है। अब मक्का के थोक भाव 1325 से 1350 रुपये है। इस दर से मक्का बेचने पर किसानों को खासा नुकसान होगा। एक आकलन के अनुसार, व्यापारी यदि गिरे रेट से मक्का को थोक में बेंचते है तो उनको चार करोड़ रुपये का नुकसान होगा। इसको लेकर व्यापारी परेशान है।
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कई व्यापारी तो घाटा होने के बाद भी मक्का बेच रहे हैं। व्यापारियों का कहना है कि इस उम्मीद के साथ उन्होंने मक्का को रोका था कि भाव अधिक होने पर वह बेच देंगे पर भाव लगातार गिर जाने से व्यापारियों को नुकसान का सामना करना पड़ रहा है। बीते वर्ष भी व्यापारियों ने मक्का रोकी थी उस समय भी व्यापारियों को करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ था। इस साल मक्का के भाव गिरने की मुख्य वजह कोरोना के चलते पोल्ट्रीफार्म न चालू होना रहा। बताते हैं कि सबसे अधिक मक्का की खपत पोल्ट्रीफार्म में होती है।
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