{"_id":"5e9348738ebc3e76c83e2d1c","slug":"kannauj-news-kannauj-news-knp5549376111","type":"story","status":"publish","title_hn":"सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कर निकले मजदूर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कर निकले मजदूर
विज्ञापन
सौरिख। प्रदेश में दिन पर दिन बढ़ रहे कोरोना संक्रमितों की संख्या को देखते हुए सभी जनपदों की सीमाएं सील हैं। इसके बाद भी पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में सेंधमारी कर तीन दर्जन मजदूर हरियाणा से साइकिलों द्वारा बिहार के लिए रवाना हुए हैं।
बिहार के जिला मुतिहारी के थाना पकड़ी दयाल के ग्राम चैता निवासी अक्षय, कृष्णा, सुनील, दिलीप, नरेश, अमरदीप, अनिल, शिवपूजन सहित लगभग तीन दर्जन मजदूर नौ अप्रैल को साइकिलों पर सवार होकर हरियाणा के सिकंदरपुर गुड़गांव से निकले थे। हरियाणा से लेकर सौरिख पहुंचने तक इन लोगों ने कई जनपदों की सीमाएं पार की लेकिन कहीं भी न तो इन लोगों को रोका गया और न ही चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
सरकार द्वारा ऐसे मजदूरों को जहां के तहां रोकने के लिए जगह-जगह क्वारंटीन वार्ड बनाए गए हैं। यहां इन लोगों को रोककर उनके भोजन व्यवस्था के साथ साथ स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। ऐसे में इन मजदूरों का एक्सप्रेस वे से निकलना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक है।
विज्ञापन
हरियाणा से बिहार के लिए निकले यह मजदूर साइकिलों से लगभग 1200 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। मजदूरों के अनुसार वे सभी टाइल्स फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी मालिक ने एक सप्ताह तक इन सभी को खाना खिलाया। बाद में एक सप्ताह का मेहनताना देकर उन्हें घर भेज दिया। जो मेहनताना दिया गया था, वह लगभग समाप्त हो चुके है। ऐसे में थकान के साथ साथ इन लोगों को भूख का भी सामना करना पड़ रहा है।
बिहार के इन मजदूरों ने पुलिस की रोक टोक से बचने के लिए जीटी रोड की बजाय आगरा लखनऊ एक्सप्रेस का सहारा लिया। मजदूरों के अनुसार यदि रास्ते में पुलिस उन्हें पकड़ लेती तो अवश्य ही 14 दिनों के क्वारंटीन वार्ड में रोक देती। इसलिए इन मजदूरों ने वार्डों में रुकने की बजाय चोरी छिपे अपने अपने घरों पहुंचना ही मुनासिब समझा।
विज्ञापन
बिहार के जिला मुतिहारी के थाना पकड़ी दयाल के ग्राम चैता निवासी अक्षय, कृष्णा, सुनील, दिलीप, नरेश, अमरदीप, अनिल, शिवपूजन सहित लगभग तीन दर्जन मजदूर नौ अप्रैल को साइकिलों पर सवार होकर हरियाणा के सिकंदरपुर गुड़गांव से निकले थे। हरियाणा से लेकर सौरिख पहुंचने तक इन लोगों ने कई जनपदों की सीमाएं पार की लेकिन कहीं भी न तो इन लोगों को रोका गया और न ही चिकित्सीय परीक्षण कराया गया।
विज्ञापन
सरकार द्वारा ऐसे मजदूरों को जहां के तहां रोकने के लिए जगह-जगह क्वारंटीन वार्ड बनाए गए हैं। यहां इन लोगों को रोककर उनके भोजन व्यवस्था के साथ साथ स्वास्थ्य की निगरानी की जा रही है। ऐसे में इन मजदूरों का एक्सप्रेस वे से निकलना पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था में बड़ी चूक है।
विज्ञापन
हरियाणा से बिहार के लिए निकले यह मजदूर साइकिलों से लगभग 1200 किलोमीटर की दूरी तय करेंगे। मजदूरों के अनुसार वे सभी टाइल्स फैक्टरी में काम करते थे। फैक्टरी मालिक ने एक सप्ताह तक इन सभी को खाना खिलाया। बाद में एक सप्ताह का मेहनताना देकर उन्हें घर भेज दिया। जो मेहनताना दिया गया था, वह लगभग समाप्त हो चुके है। ऐसे में थकान के साथ साथ इन लोगों को भूख का भी सामना करना पड़ रहा है।
बिहार के इन मजदूरों ने पुलिस की रोक टोक से बचने के लिए जीटी रोड की बजाय आगरा लखनऊ एक्सप्रेस का सहारा लिया। मजदूरों के अनुसार यदि रास्ते में पुलिस उन्हें पकड़ लेती तो अवश्य ही 14 दिनों के क्वारंटीन वार्ड में रोक देती। इसलिए इन मजदूरों ने वार्डों में रुकने की बजाय चोरी छिपे अपने अपने घरों पहुंचना ही मुनासिब समझा।