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अवैध बिजली कनेक्शन प्रकरण: अफसरों के बीच आरोप प्रत्यारोप जारी
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सौरिख। हरिभानपुर रोड पर निर्माणाधीन इमारत में हुए कनेक्शन को लेकर मामला तूल पकड़ता जा रहा है। बिजली विभाग के अधिकारी एक दूसरे पर ही आरोप लगा रहे हैं। एसडीओ के नोटिस के जवाब में जेई ने प्रश्नचिह्न लगाते हुए कहा कि जांच के दौरान इमारत में अवैध डीपी मिलने एवं कनेक्शन निरस्त होने के बाद भी मुकदमा पंजीकृत क्यों नहीं कराया गया।
कस्बे के हरिभानपुर रोड पर निर्माणाधीन इमारत में 22 जनवरी को बिजली विभाग के अधिकारियों ने दो किलोवॉट का कनेक्शन किया था। नई डीपी लगाकर लाइन चालू करवा दी गई। जांच के दौरान 16 फरवरी को पहुंचे एसडीओ अरविंद कुमार ने लगी डीपी का वीडियो बनाते हुए कनेक्शन को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया था। साथ ही जेई सुनील कुमार वर्मा से अवैध कनेक्शन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। जवाब में जेई का कहना है कि अवैध कनेक्शन कैसे हुआ और किसने किया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। नोटिस मिलने के बाद जब जांच करने गया था, वहां पर न तो डीपी पाई गई और न ही केबल। एसडीओ को डीपी मिली थी, तो उन्होंने मुकदमा पंजीकृत क्यों नहीं कराया।
एसडीओ का कहना है कि कनेक्शन धारक ने 3498 रुपये शुल्क जमा किया है जो केवल बिजली कनेक्शन का है। फिर मौके पर डीपी कैसे लगा दी गई। जेई ने डीपी का स्टीमेट नहीं बनाया। अगर बना होता तो लगभग 85 हजार रुपये का शुल्क जमा किया गया होता। बता दें कि मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक इस प्रकरण में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
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कस्बे के हरिभानपुर रोड पर निर्माणाधीन इमारत में 22 जनवरी को बिजली विभाग के अधिकारियों ने दो किलोवॉट का कनेक्शन किया था। नई डीपी लगाकर लाइन चालू करवा दी गई। जांच के दौरान 16 फरवरी को पहुंचे एसडीओ अरविंद कुमार ने लगी डीपी का वीडियो बनाते हुए कनेक्शन को अवैध बताते हुए निरस्त कर दिया था। साथ ही जेई सुनील कुमार वर्मा से अवैध कनेक्शन को लेकर स्पष्टीकरण मांगा था। जवाब में जेई का कहना है कि अवैध कनेक्शन कैसे हुआ और किसने किया, इसकी कोई जानकारी नहीं है। नोटिस मिलने के बाद जब जांच करने गया था, वहां पर न तो डीपी पाई गई और न ही केबल। एसडीओ को डीपी मिली थी, तो उन्होंने मुकदमा पंजीकृत क्यों नहीं कराया।
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एसडीओ का कहना है कि कनेक्शन धारक ने 3498 रुपये शुल्क जमा किया है जो केवल बिजली कनेक्शन का है। फिर मौके पर डीपी कैसे लगा दी गई। जेई ने डीपी का स्टीमेट नहीं बनाया। अगर बना होता तो लगभग 85 हजार रुपये का शुल्क जमा किया गया होता। बता दें कि मामला उच्चाधिकारियों तक पहुंच चुका है, लेकिन अभी तक इस प्रकरण में कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
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