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विदेशी परिदों को सर्दी में लुभा रही लाख बहोसी झील
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झील में कलरव करते विदेशी मेहमान परिंदे। संवाद
- फोटो : KANNAUJ
तिर्वा। लाख बहोसी पक्षी विहार की झील इस समय विदेशी मेहमान परिंदों की कलरव से गुलजार है। यूरोपियन, चाइना, साइबेरिया व सेंट्रल एशिया समेत कई देशों से करीब 28 हजार परिंदे यहां पहुंचे हैं और सैलानियों को लुभा रहे हैं।
तिर्वा तहसील क्षेत्र के 80 वर्ग किलोमीटर में फैले लाख बहोसी पक्षी विहार में भारत के अलावा कई देशों के पक्षी सर्दी शुरू होते ही सैकड़ों मील दूर से उड़कर आने लगते हैं। करीब चार माह तक विदेशी परिंदे यहां कलरव करते हैं।
लाख बहोसी के कर्मचारी करन सिंह ने बताया कि इस समय करीब 28 हजार पक्षी झील में आ चुके हैं। इसमें करीब आठ हजार यहीं के और 20 हजार विदेशी हैं। इस वक्त झील में यूरोपियन, ईस्टर्न साइबेरिया, नार्दन साइबेरिया, एशिया, चाइना, तिब्बत, लद्दाख से आए पक्षी मौजूद हैं।
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अक्तूबर से मार्च तक यहां रहते विदेशी परिंदे
प्रत्येक साल अक्तूबर से पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मार्च तक पक्षी यहां रुकते हैं। इसके बाद सर्दी कम होते ही अपने देशों को वापस चले जाते हैं। सर्दियां शुरू होने के साथ ही पक्षी यहां आ जाते हैं।
यहां 10 लोगों का स्टाफ
यहां वन विभाग की तरफ से फारेस्ट रेंजर एसके श्रीवास्तव, फारेस्ट दारोगा ओमप्रकाश, वन जीव रक्षक ज्ञान चंद्र पटेल, राजेश वर्मा, महिला कर्मचारी राजकुमारी, प्रेमचंद्र, बृज भूषण, संविदा कर्मचारी करन सिंह समेत 10 का स्टाफ तैनात है। नाविक का पद रिक्त है।
पर्यटकों को घूमने के लिए 30 रुपये का टिकट
पर्यटकों के घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 30 रुपये निर्धारित है। इसके अलावा बाइक का 20 रुपये लिया जाता है। चौपहिया वाहनों से 100 रुपये लिए जाते हैं। पक्षी विहार रेंजर एस के श्रीवास्तव का कहना है कि शिकारियों पर कड़ी निगाह रखी जाती है। पकड़े जाने पर समय समय पर कार्रवाई भी की जाती है। विदेशी पक्षियों की सुरक्षा व भोजन के पुख्ता इंतजाम हैं। जो पर्यटक आते हैं, उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी रहती है।
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तिर्वा तहसील क्षेत्र के 80 वर्ग किलोमीटर में फैले लाख बहोसी पक्षी विहार में भारत के अलावा कई देशों के पक्षी सर्दी शुरू होते ही सैकड़ों मील दूर से उड़कर आने लगते हैं। करीब चार माह तक विदेशी परिंदे यहां कलरव करते हैं।
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लाख बहोसी के कर्मचारी करन सिंह ने बताया कि इस समय करीब 28 हजार पक्षी झील में आ चुके हैं। इसमें करीब आठ हजार यहीं के और 20 हजार विदेशी हैं। इस वक्त झील में यूरोपियन, ईस्टर्न साइबेरिया, नार्दन साइबेरिया, एशिया, चाइना, तिब्बत, लद्दाख से आए पक्षी मौजूद हैं।
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अक्तूबर से मार्च तक यहां रहते विदेशी परिंदे
प्रत्येक साल अक्तूबर से पक्षियों के आने का सिलसिला शुरू हो जाता है। मार्च तक पक्षी यहां रुकते हैं। इसके बाद सर्दी कम होते ही अपने देशों को वापस चले जाते हैं। सर्दियां शुरू होने के साथ ही पक्षी यहां आ जाते हैं।
यहां 10 लोगों का स्टाफ
यहां वन विभाग की तरफ से फारेस्ट रेंजर एसके श्रीवास्तव, फारेस्ट दारोगा ओमप्रकाश, वन जीव रक्षक ज्ञान चंद्र पटेल, राजेश वर्मा, महिला कर्मचारी राजकुमारी, प्रेमचंद्र, बृज भूषण, संविदा कर्मचारी करन सिंह समेत 10 का स्टाफ तैनात है। नाविक का पद रिक्त है।
पर्यटकों को घूमने के लिए 30 रुपये का टिकट
पर्यटकों के घूमने के लिए प्रति व्यक्ति 30 रुपये निर्धारित है। इसके अलावा बाइक का 20 रुपये लिया जाता है। चौपहिया वाहनों से 100 रुपये लिए जाते हैं। पक्षी विहार रेंजर एस के श्रीवास्तव का कहना है कि शिकारियों पर कड़ी निगाह रखी जाती है। पकड़े जाने पर समय समय पर कार्रवाई भी की जाती है। विदेशी पक्षियों की सुरक्षा व भोजन के पुख्ता इंतजाम हैं। जो पर्यटक आते हैं, उनकी सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी रहती है।