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कन्नौज : केमिकल के बेतहाशा उपयोग से बिगड़ रहा मिट्टी का भूगोल

Wed, 10 Aug 2022 11:57 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 10 Aug 2022 11:57 PM IST
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Kannauj: Geography of soil deteriorating due to excessive use of chemical
फोटो- 22- भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में जांच करते तकनीकी सहायक सुशील कुमार। संवाद - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। अधिक उत्पादन लेने की होड़ में किसान उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग कर रहे हैं। इससे मिट्टी की सेहत बिगड़ रही है। कुछ जागरूक किसानों ने मिट्टी की जांच कराई कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मिट्टी में पोटाश और फास्फोरस की मात्रा कम मिली। आर्गेनिक कंपोनेंट भी कम मिले, जबकि पीएच वैल्यू ज्यादा मिली।
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जिले के किसान आलू की फसल ज्यादा करते हैं। इसकी पैदावार बढ़ाने के लिए किसान उर्वरकों का प्रयोग ज्यादा कर रहे हैं, जबकि जैविक खादों का इस्तेमाल कम किया जा रहा है। उर्वरकों से फौरी तौर पर फसल तो ज्यादा हो जाती है, लेकिन इससे मिट्टी की सेहत दिन-ब-दिन खराब होती जा रही है। कृषि विभाग के अधीन संचालित भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में मिट्टी की सेहत परखी गई तो
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पता चला है कि पीएच वैल्यू लगातार बढ़ती जा रही है। इतना ही नहीं मेेजर कंपोनेंट्स में शामिल नाइट्रोजन और माइक्रो कंपोनेंट्स में शामिल आयरन और सल्फर की मात्रा भी तेजी से घट रही है। यदि किसान जल्द न चेते तो धरती बंजर हो जाएगी। (संवाद)
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केस-1 : सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत चयनित छिबरामऊ विकास खंड के गांव कसाबा में 29 अलग-अलग खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए। जांच हुई तो पता चला कि 12 नमूनों में पीएच वैल्यू बहुत ज्यादा है, जबकि जीवांश यानी आर्गेनिक कंपोनेंट बेहद कम। इसी तरह फास्फेट भी काफी कम मिला।
केस-2 : उमरन विकास खंड के गांव गाड़ापुरवा में मिट्टी की सेहत की स्थिति जांचने के लिए 20 नमूने लिए गए। जांच रिपोर्ट ने तकनीकी सहायकों और मृदा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया। लगभग सभी नमूनों में पीएच वैल्यू आठ से ज्यादा आई और आर्गेनिक कंपोनेंट भी बेहद कम मिले। फास्फेट की मात्रा यहां भी काफी कम मिली।
केस-3 : हसरेन विकास खंड के गांव रामपुरा में भी अलग-अलग खेतों से मिट्टी के नमूने लिए गए। भूमि परीक्षण प्रयोगशाला में जांच हुई तो रिपोर्ट में ऑगेनिक कंपोनेंट काफी कम मिले। पीएच वैल्यू मानक से कहीं अधिक 8.2 तक मिली। फास्फेट की मात्रा मध्यम मिली, लेकिन बहुत अच्छी स्थिति रिपोर्ट में नहीं आई।
102 रुपये देकर करा सकते हैं मिट्टी की जांच
कन्नौज में विकास भवन के पीछे की ओर तिर्वा रेलवे क्रासिंग के पास कृषि विभाग की भूमि परीक्षण प्रयोगशाला है। कोई भी किसान यहां अपने खेत की मिट्टी की सेहत की जांच करा सकता है। मेजर और माइक्रो कंपोनेंट्स यानी प्रमुख पोषक तत्व और सूक्ष्म पोषक तत्वों की जांच के लिए किसान को 102 रुपये शुल्क प्रति नमूना जमा करना होता है। कम से कम 500 ग्राम मिट्टी खेत के सभी कोनों से मिलाकर जांच के लिए देनी चाहिए।
इनसेट
ये हैं मिट्टी में प्रमुख पोषण तत्व की श्रेणी
-जीवांश कार्बन प्रतिशत .20 तक अति न्यून स्तर माना जाता है। .20 से .50 तक न्यून स्तर, .51 से .08 तक मध्यम स्तर और .80 से अधिक उच्चस्तर माना जाता है। इसी तरह फॉस्फेट प्रति किलोग्राम प्रति हेक्टेयर 10.0 तक अति न्यून स्तर, 10.1 से 20 तक न्यून स्तर, 20.1 से 40.0 तक मध्यम स्तर और 40 से अधिक उच्च स्तर माना जाता है। पोटाश 50 तक अति न्यून स्तर, 51 से 100 तक न्यून स्तर 101 से 250 मध्यम स्तर और 250 से अधिक उच्च स्तर माना है।

- मिट्टी में पीएच वैल्यू 6.5 से 7.5 तक अच्छी मानी जाती है। इससे अधिक या कम दोनों में ही मिट्टी खराब मानी जातीं हैं। इसी तरह सल्फर, जिंक, लोहा, कॉपर और मैगनीज की भी मात्रा निर्धारित है।
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