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कन्नौज : जान जोखिम में डाल कर जर्जर भवन में तालीम लेने पर विवश नौनिहाल
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छिबरामऊ। उच्च प्राथमिक विद्यालय खानपुर कसावा के कमरों की छतें जर्जर हो गई हैं। छतों से बारिश का पानी टपकता है। प्लास्टर भी टूटकर गिर रहे हैं। यहां पढ़ने वाले बच्चों ने विद्यालय आने से इन्कार कर प्रदर्शन किया। प्रधानाचार्य ने किसी तरह बच्चों को समझा-बुझाकर विद्यालय आने के लिए राजी किया।
क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय खानपुर कसावा में 55 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में चार कमरे बने हैं, लेकिन सभी कमरों की छतों से पानी टपकता है और प्लास्टर भी गिरता है। इससे बच्चों की जान जोखिम में रहती है। बुधवार को विद्यालय में बच्चों ने आने से इन्कार कर प्रदर्शन किया।
इनका कहना है कि विद्यालय में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। इस कारण आवारा मवेशी विद्यालय परिसर में ही विचरण करते रहते हैं। इससे स्कूल में गंदगी रहती है। प्रधानाचार्य नीरज पाल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को यहां की समस्याआें से अवगत करा दिया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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यह भी बताया कि विद्यालय में स्टॉफ की भी कमी है। यहां तैनात शिक्षक अखिलेश बाबू शुक्ला सौरिख में एआरपी हो गए हैं। अब वह अकेले ही विद्यालय 55 बच्चों को किसी तरह पढ़ा रहे हैं।
कायाकल्प योजना के तहत विद्यालय की छतों को सही कराया जाएगा। इसके लिए खंड विकास अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। -डॉ. विमल कुमार, बीईओ छिबरामऊ।
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क्षेत्र के उच्च प्राथमिक विद्यालय खानपुर कसावा में 55 बच्चे पंजीकृत हैं। विद्यालय में चार कमरे बने हैं, लेकिन सभी कमरों की छतों से पानी टपकता है और प्लास्टर भी गिरता है। इससे बच्चों की जान जोखिम में रहती है। बुधवार को विद्यालय में बच्चों ने आने से इन्कार कर प्रदर्शन किया।
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इनका कहना है कि विद्यालय में बाउंड्रीवाल भी नहीं है। इस कारण आवारा मवेशी विद्यालय परिसर में ही विचरण करते रहते हैं। इससे स्कूल में गंदगी रहती है। प्रधानाचार्य नीरज पाल ने बताया कि विभागीय अधिकारियों को यहां की समस्याआें से अवगत करा दिया है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई।
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यह भी बताया कि विद्यालय में स्टॉफ की भी कमी है। यहां तैनात शिक्षक अखिलेश बाबू शुक्ला सौरिख में एआरपी हो गए हैं। अब वह अकेले ही विद्यालय 55 बच्चों को किसी तरह पढ़ा रहे हैं।
कायाकल्प योजना के तहत विद्यालय की छतों को सही कराया जाएगा। इसके लिए खंड विकास अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। -डॉ. विमल कुमार, बीईओ छिबरामऊ।