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काम मिला नहीं,जेब भी खाली... कैसे चलेगा परिवार
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रोजगार न मिलने से परिवार के साथ उदास बैठे सुधीर कुमार।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज । लॉकडाउन में गैरप्रांतों से लौटे परिवारों के पास न पैसा है और न रोजगार। आर्थिक तंगी से दो वक्त की रोटी का संकट खड़ा होने लगा है। जिले में रोजगार के पर्याप्त संसाधन न होने से ज्यादातर परिवार लॉकडाउन खत्म होने का इंतजार कर रहे हैं। इससे कि गांव से लौटकर परदेस में पुराना काम शुरू कर सकें।
जसोदा इलाके किशवापुर निवासी सुधीर कुमार गुप्ता करीब 20 साल से मुंबई के सोलापुर में आइसक्रीम, कुल्फी और जूस का धंधा करते थे। बेटे संदीप कुमार, अनुपम, विवेक, रोहित और भाई हरिशंकर के परिवार के सदस्यों समेत 11 लोगों के साथ वहीं रहने लगे। लॉकडाउन में घर लौटने के बाद कोई काम नहीं मिला। पूंजी खर्च हो गई। अब रोटी का संकट होने लगा है।
सुधीर कुमार ने बताया कि मुंबई में उनके हाथ की बनी आइसक्रीम 100 से 150 रुपये तक बिकती थी। कन्नौज में 20 से 50 में भी मुश्किल में बिकेगी। इससे यहां धंधा करना मुश्किल होगा। लौटना पड़ेगा। वहीं हरिशंकर ने बताया कि लॉकडाउन में जमा पूंजी खत्म हो गई है। लॉकडाउन खुलते ही वह परिवार के साथ मुंबई चले जाएंगे।
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जसोदा इलाके किशवापुर निवासी सुधीर कुमार गुप्ता करीब 20 साल से मुंबई के सोलापुर में आइसक्रीम, कुल्फी और जूस का धंधा करते थे। बेटे संदीप कुमार, अनुपम, विवेक, रोहित और भाई हरिशंकर के परिवार के सदस्यों समेत 11 लोगों के साथ वहीं रहने लगे। लॉकडाउन में घर लौटने के बाद कोई काम नहीं मिला। पूंजी खर्च हो गई। अब रोटी का संकट होने लगा है।
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सुधीर कुमार ने बताया कि मुंबई में उनके हाथ की बनी आइसक्रीम 100 से 150 रुपये तक बिकती थी। कन्नौज में 20 से 50 में भी मुश्किल में बिकेगी। इससे यहां धंधा करना मुश्किल होगा। लौटना पड़ेगा। वहीं हरिशंकर ने बताया कि लॉकडाउन में जमा पूंजी खत्म हो गई है। लॉकडाउन खुलते ही वह परिवार के साथ मुंबई चले जाएंगे।
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