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जांच में खुलासा: सर्विस डोर की चौड़ाई घटाकर बस में बढ़ाई गई थीं सीटें

Wed, 15 Jan 2020 12:42 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 15 Jan 2020 12:42 AM IST
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jaanch mein khulaasa: sarvis dor kee chaudaee ghataakar bas mein badhaee gaee theen seeten
हादसे में जली बस के पास लगी लोगों की भीड़। - फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। बस हादसे के बाद शुरू हुई एआरटीओ और आरआई की जांच पूरी हो गई है। 10 बिंदुओं पर की गई जांच में चतुर्वेदी बस सर्विस की यह बस छह पर मानक विहीन मिली है। यात्रियों की जिंदगी के साथ बस सर्विस के संचालक ने जमकर खिलवाड़ किया। अतिरिक्त सीटें लगाने के लिए बस के सर्विस डोर की ही चौड़ाई घटा दी। बस की लंबाई भी मानक से ज्यादा थी। पिछले हिस्से में शीशे की जगह को पूरी तरह से स्टील की चादर से ढक दिया गया था। इसके अलावा इमरजेंसी डोर का भी न होना यात्रियों के बस में फंस जाने का बड़ा कारण बना। हादसे के बाद यात्रियों ने तेजी से निकलने का प्रयास किया लेकिन कई अंदर ही फंसे रहे गए और जान गंवा बैठे। दोनों अफसरों ने अपनी जांच रिपोर्ट कानपुर आरटीओ को भेजी है। रिपोर्ट के साथ बस का तैयार नक्शा भी साथ भेजा गया है।
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जांच में सामने आया है कि वाहन की लंबाई मानक से दशमलव आठ मीटर ज्यादा थी। केंद्रीय मोटर यान अधिनियम के तहत बस की लंबाई का मानक 12 मीटर तय है। यह 12.8 मीटर थी। बस 680 मिमी ओवरहैंग मिली है। यानी पिछले टायर के बाद इसका 680 मिमी हिस्सा ज्यादा बाहर निकला था। वाहन की सीट 49 की जगह 54 थीं। सर्विस डोर की चौड़ाई मानक के हिसाब से 685 मिमी होनी चाहिए। बस में यह 640 मिमी थी। यानी 45 मिमी डोर की चौड़ाई घटाई गई थी। आपातकालीन द्वार नहीं था। रियर विंड स्क्रीन (पीछे का शीशा) शीशे की बनी होनी चाहिए। हादसे का शिकार हुई बस में रियर विंड स्क्रीन पर स्टील की चादर लगाई गई थी। बस में यदि मानकों का ध्यान रखा जाता तो शायद हादसा न होता और लोगों की जान बच जाती।
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एआरटीओ संजय कुमार झा और आरआई जितेंद्र सिंह की जांच के बाद इन तथ्यों के सामने आने के बाद यहां के जिम्मेदार अफसरों की भी लापरवाही खुलकर सामने आई है। बस जिस तरह से मानकों की अनदेखी कर सड़क पर दौड़ाई जा रही थी उसे एक बाद तो स्पष्ट हो गई है कि यदि चेकिंग के नाम पर खानापूरी न कर ईमानदारी से काम किया जाता तो शायद इस बस का जिले में संचालन न हो रहा होता।
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एआरटीओ संजय कुमार झा ने बताया कि दस बिंदुओं पर की गई जांच में जो तथ्य सामने आए हैं, उसकी रिपोर्ट बनाकर आरटीओ कानपुर को भेज दी गई है। दस में से छह बिंदुओं पर बस मानक विहीन मिली है। आगे की कार्रवाई आलाधिकारियों के आदेश पर की जाएगी।
फर्रुखाबाद के वर्तमान व पूर्व एआरटीओ पर हो सकती कार्रवाई
एआरटीओ और आरआई की जांच में जिस तरह से फर्रुखाबाद के परिवहन विभाग की लापरवाही सामने आई है उससे शासन वहां के पूर्व और वर्तमान एआरटीओ के खिलाफ कार्रवाई कर सकता है। जांच में पाया गया है कि मानक विहीन बस का न सिर्फ रजिस्ट्रेशन हुआ बल्कि परमिट भी जारी कराया गया। समय-समय पर फिटनेस भी हुई और हर बार बस को सड़क पर चलने लायक बताकर आगे बढ़ा दिया गया। हादसे का शिकार हुई बस का 18 दिसंबर 2019 को वर्तमान एआरटीओ प्रशासन फर्रुखाबाद शांतिभूषण पांडेय ने ही फिटनेस प्रमाणपत्र जारी किया था। पूर्व एआरटीओ मोहम्मद हसीब भी कार्रवाई की जद में आ सकते हैं।

नया फंडा: चालान के साथ ले रहे गूगल लोकेशन
एआरटीओ विभाग डग्गामार बसों के खिलाफ कार्रवाई के लिए देर रात तक सड़क पर खाक छान रहा है। हादसे के बाद से प्राइवेट बसें दिखना ही कम हो गई हैं। मंगलवार को काफी प्रयास के बाद एआरटीओ संजय झा ने तिर्वा में एक और और एक हरदोई रोड पर पकड़ी। यह दोनों बसें रोडवेज बस अड्डे की एक किमी से की परिधि में सवारियां भर रही थीं। नियमानुसार, कोई भी प्राइवेट वाहन रोडवेज बस अड्डे की एक किमी की परिधि में सवारी नहीं बैठा सकता है। विभाग चालान के समय इसका भी ध्यान रख रहा है कि जरूरत पड़ने पर वह यह सिद्ध भी कर दे कि कार्रवाई की जद में आई बस रोडवेज बस अड्डे से कितनी दूरी पर खड़ी थी। ऐसे में एआरटीओ विभाग के अधिकारी ई-चालान करते समय अब गूगल लोकेशन भी चालान के साथ अटैच कर रहे हैं। इससे यह पता चलते रहे कि बस का जब चालान किया गया तो उसकी वास्तविक लोकेशन क्या थी। ताकि कोर्ट में साक्ष्य मांगे जाएं तो वह यह सिद्ध कर सकें।
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