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स्वास्थ्य कर्मियों ने लिखे सुसाइड नोट: आत्महत्या के जिम्मेदार होंगे अफसर
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छिबरामऊ। सौ शय्या संयुक्त चिकित्सालय के स्वास्थ्य कर्मियों की नौकरी पर तलवार लटकी हुई है। आउट सोर्सिंग कर्मचारियों ने नौकरी से हटाए जाने की दशा में सुसाइड नोट तैयार कर अपनी जेब में डाल लिए हैं। जिसमें सौ शय्या अस्पताल सहित प्रशासनिक अधिकारियों को आत्महत्या के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए वीडियो वायरल के लिए परिजनों से कहा है।
सौ शय्या अस्पताल में एक जनवरी 2016 को स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होने के साथ ही आउट सोर्सिंग से स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्ति किया गया था। लगभग पांच साल से यह स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी निभा रहे हैं। ड्यूटी का निर्वहन करते हुए कई बार कोरोना से संक्रमित हुए। आरोप है कि संक्रमित होने के बाद भी उन्हें कोई सुविधाएं नहीं दी गईं। पांच अक्टूबर को सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने स्वास्थ्य कर्मियों को उनकी सेवा प्रदाता कंपनी अवनी परिधि का टेंडर समाप्त होने की जानकारी देते हुए नई सेवा प्रदाता कंपनी एस एम इंटर प्राइजेज में पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों ने उनकी सेवा प्रदाता अवनी परिधि से संपर्क किया तो उनको टेंडर जारी होने की जानकारी दी गई। उसके बाद से कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है। साथ ही सीएमएस ने अवगत कराया कि 15 स्टाफ नर्सों की तैनाती की ही अनुमति है, जबकि वर्तमान समय में 27 पुरुष व महिला स्टाफ नर्स ड्यूटी कर रहे हैं। रविवार को स्टॉफ नर्स विवेक की हालत बिगड़ने के बाद साथियों में आक्रोश है। किसी तरह की अनहोनी पर सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने इमरजेंसी गेट पर ही जान देने की घोषणा की। इस संबंध में सीएमओ डा. विनोद कुमार ने बताया कि पैरा मेडिकल स्टॉफ को नई सेवा प्रदाता कंपनी से संबद्ध किया जाएगा। ड्यूटी के प्रति लापरवाह एक दो कर्मियों को छोड़कर किसी भी कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
भर्ती खुली धन वसूली की पोल
आउट सोर्सिंग पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल में चल रही धन उगाही की पर्ते खोलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नियुक्ति से लेकर ज्वानिंग तक हर जगह पर उन्होंने चढ़ावा चढ़ाया। नौकरी के लिए दो से ढाई लाख रुपए लिए गए। किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने जेवर गिरवी रखकर नौकरी के लिए रुपयों की जुगाड़ की। कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति अभी चंद दिनों पहले ही हुई है।
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सौ शय्या अस्पताल में एक जनवरी 2016 को स्वास्थ्य सेवाएं शुरू होने के साथ ही आउट सोर्सिंग से स्वास्थ्य कर्मियों को नियुक्ति किया गया था। लगभग पांच साल से यह स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी निभा रहे हैं। ड्यूटी का निर्वहन करते हुए कई बार कोरोना से संक्रमित हुए। आरोप है कि संक्रमित होने के बाद भी उन्हें कोई सुविधाएं नहीं दी गईं। पांच अक्टूबर को सीएमएस डॉ. राजेश कुमार तिवारी ने स्वास्थ्य कर्मियों को उनकी सेवा प्रदाता कंपनी अवनी परिधि का टेंडर समाप्त होने की जानकारी देते हुए नई सेवा प्रदाता कंपनी एस एम इंटर प्राइजेज में पंजीकरण कराने के निर्देश दिए थे। कर्मचारियों ने उनकी सेवा प्रदाता अवनी परिधि से संपर्क किया तो उनको टेंडर जारी होने की जानकारी दी गई। उसके बाद से कर्मचारियों में असमंजस की स्थिति है। साथ ही सीएमएस ने अवगत कराया कि 15 स्टाफ नर्सों की तैनाती की ही अनुमति है, जबकि वर्तमान समय में 27 पुरुष व महिला स्टाफ नर्स ड्यूटी कर रहे हैं। रविवार को स्टॉफ नर्स विवेक की हालत बिगड़ने के बाद साथियों में आक्रोश है। किसी तरह की अनहोनी पर सभी स्वास्थ्य कर्मियों ने इमरजेंसी गेट पर ही जान देने की घोषणा की। इस संबंध में सीएमओ डा. विनोद कुमार ने बताया कि पैरा मेडिकल स्टॉफ को नई सेवा प्रदाता कंपनी से संबद्ध किया जाएगा। ड्यूटी के प्रति लापरवाह एक दो कर्मियों को छोड़कर किसी भी कर्मचारी पर कोई कार्रवाई नहीं होगी।
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आउट सोर्सिंग पर तैनात स्वास्थ्य कर्मियों ने अस्पताल में चल रही धन उगाही की पर्ते खोलना शुरू कर दिया है। कर्मचारियों का आरोप है कि नियुक्ति से लेकर ज्वानिंग तक हर जगह पर उन्होंने चढ़ावा चढ़ाया। नौकरी के लिए दो से ढाई लाख रुपए लिए गए। किसी ने कर्ज लेकर तो किसी ने जेवर गिरवी रखकर नौकरी के लिए रुपयों की जुगाड़ की। कई कर्मचारी तो ऐसे हैं जिनकी नियुक्ति अभी चंद दिनों पहले ही हुई है।
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