{"_id":"628e7022ba7aeb30371e1f84","slug":"health-kannauj-kannauj-news-kannauj-news-knp698852361","type":"story","status":"publish","title_hn":"अब जिला अस्पताल में मिलेगी निशुल्क डायलिसिस की सुविधा","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अब जिला अस्पताल में मिलेगी निशुल्क डायलिसिस की सुविधा
विज्ञापन
कन्नौज। जिला चिकित्सालय परिसर में पीपीपी मॉडल पर डायलिसिस यूनिट का शुभारंभ बुधवार को हो गया। सांसद सुब्रत पाठक ने डायलिसिस यूनिट का लोकार्पण किया। डायलिसिस यूनिट शुरू हो जाने से किडनी के रोगियों को राहत मिलेगी। यहां सिर्फ एक रुपये के पर्चे पर डायलिसिस हो सकेगी। प्राइवेट अस्पतालों में एक बार डायलिसिस कराने पर तीन से छह हजार रुपये तक खर्च होते हैं।
लोकार्पण के दौरान सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था होने से न सिर्फ जिले के बल्कि आसपास के जनपदों के मरीजों को भी राहत मिलेगी।
जिला अस्पताल में लंबे समय से डायलिसिस यूनिट संचालित किए जाने की कवायद चल रही थी। अमर उजाला ने भी इसको लेकर अभियान चलाया था। कुल सात बेड की डायलिसिस यूनिट में एक बेड हेपेटाइटिस-बी के मरीजों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि छह पर सामान्य मरीजों की डायलिसिस होगी।
विज्ञापन
लगभग 70 लाख रुपये से डायलिसिस यूनिट का संचालन किया जा रहा है। फुली आटोमेटिक मशीनों से डायलिसिस की जाएगी। इस दौरान सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु, चंदन त्रिपाठी, डॉक्टर एके चंद्रा, नफीस, इंद्रेश कुमार और शिवम प्रताप सिंह मौजूद रहे।
पहले दिन दो मरीजों की डायलिसिस
छिबरामऊ के मोहल्ला छिपट्टी निवासी पुनीत कुमार दुबे की डायलिसिस की गई। नवंबर से उन्हें हर माह डायलिसिस करानी पड़ती है। अब तक वे इटावा के प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस कराते थे। जहां हर बार ढाई हजार रुपये फीस जमा करनी पड़ती थी। पुनीत ने बताया कि डायलिसिस निशुल्क होने से राहत मिली है। अब डायलिसस के लिए इटावा बार-बार जाना नहीं पड़ेगा। मकरंदनगर निवासी नीता सिंह को भी डायलिसिस की आवश्यकता रहती है। अभी तक वे कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस कराती थीं, जो काफी महंगी पड़ती थी।
विज्ञापन
लोकार्पण के दौरान सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि निशुल्क डायलिसिस की व्यवस्था होने से न सिर्फ जिले के बल्कि आसपास के जनपदों के मरीजों को भी राहत मिलेगी।
विज्ञापन
जिला अस्पताल में लंबे समय से डायलिसिस यूनिट संचालित किए जाने की कवायद चल रही थी। अमर उजाला ने भी इसको लेकर अभियान चलाया था। कुल सात बेड की डायलिसिस यूनिट में एक बेड हेपेटाइटिस-बी के मरीजों के लिए आरक्षित रहेगा, जबकि छह पर सामान्य मरीजों की डायलिसिस होगी।
विज्ञापन
लगभग 70 लाख रुपये से डायलिसिस यूनिट का संचालन किया जा रहा है। फुली आटोमेटिक मशीनों से डायलिसिस की जाएगी। इस दौरान सीएमएस डॉक्टर शक्ति बसु, चंदन त्रिपाठी, डॉक्टर एके चंद्रा, नफीस, इंद्रेश कुमार और शिवम प्रताप सिंह मौजूद रहे।
पहले दिन दो मरीजों की डायलिसिस
छिबरामऊ के मोहल्ला छिपट्टी निवासी पुनीत कुमार दुबे की डायलिसिस की गई। नवंबर से उन्हें हर माह डायलिसिस करानी पड़ती है। अब तक वे इटावा के प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस कराते थे। जहां हर बार ढाई हजार रुपये फीस जमा करनी पड़ती थी। पुनीत ने बताया कि डायलिसिस निशुल्क होने से राहत मिली है। अब डायलिसस के लिए इटावा बार-बार जाना नहीं पड़ेगा। मकरंदनगर निवासी नीता सिंह को भी डायलिसिस की आवश्यकता रहती है। अभी तक वे कानपुर के एक प्राइवेट अस्पताल में डायलिसिस कराती थीं, जो काफी महंगी पड़ती थी।