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हसेरन तहसील का विरोध जारी, वकीलों का क्रमिक अनशन शुरू

Tue, 10 Dec 2019 12:12 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 10 Dec 2019 12:12 AM IST
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haseran tahaseel ka virodh jaaree, vakeelon ka kramik anashan shuroo
तहसील के मुख्य गेट पर हड़ताल पर बैठे अधिवक्ता। - फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ(कन्नौज)। हसेरन तहसील के विरोध में चल रही हड़ताल के 15 वें दिन वकीलों ने क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। आंदोलनरत वकीलों का कहना है कि अधिसूचना रद्द न होने तक आंदोलन जारी रहेगा। आगे आंदोलन उग्र होगा।
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बार एसोसिएशन के हसेरन तहसील के विरोध में किए जा रहे आंदोलन में सोमवार को वरिष्ठ उपाध्यक्ष केटी मिश्रा, पूर्व महासचिव सुशील पांडेय, राजीव हजेला, फहीम जमा खां तथा रूपेश दुबे को अध्यक्ष जितेंद्र श्रीवास्तव, महासचिव ललित प्रताप सिंह, पंकज मिश्रा ने माल्यार्पण कर अनशन पर बैठाया। इस अवसर पर वकीलों ने एकजुट होकर आंदोलन को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया।
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पूर्व विधायक संतोष चतुर्वेदी ने कहा कि अभी तक हसेरन का जला हुआ रिकार्ड दुरुस्त नहीं हुआ है। सही मायने में किसानों का भला करना है तो वहां का राजस्व रिकार्ड दुरुस्त कराया जाए। पूर्व अध्यक्ष राजकुमार सिंह ने कहा कि हसेरन तहसील बनने से खड़िनी, चपुन्ना, सकरावा तथा सौरिख क्षेत्र के ग्रामीणों को परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। इस अवसर पर राजेश कठेरिया, पूर्व अध्यक्ष रामचंद मिश्रा, संदीप दीक्षित, सुधाकर अग्निहोत्री, शिवप्रकाश यादव, शैलेंद्र सिंह, संजीव हजेला, अंकुर, चित्रांश सक्सेना, ओमेंद्र पाल सिंह, बृजेश, प्रमोद, सरोज पाल सहित कई लोग मौजूद रहे।
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आज बैठेंगे यह अधिवक्ता
बार एसोसिएशन के महासचिव पंकज मिश्रा ने बताया कि मंगलवार को पूर्व अध्यक्ष एमपी सिंह सेंगर, एसएमए रिजवी, अवनींद्र यादव, देवेंद्र वर्मा तथा विनीत चतुर्वेदी क्रमिक अनशन पर बैठेंगे। उन्होंने कहा कि शासन व प्रशासन से प्रभावी पहल न होने तक वकीलों का आंदोलन चलता रहेगा।
हड़ताल से वादकारी हो रहे परेशान
वकीलों की हड़ताल से लोगों को परेशानियां हो रही हैं। जेल में बंद आरोपियों की जमानत नहीं हो पा रही है। तहसील व एसडीएम न्यायालयों में कार्य ठप होने से वादकारी परेशान हैं।

राजस्व का हो रहा नुकसान
हड़ताल के चलते रजिस्ट्री दफ्तर का कार्य ठप हो गया है। बैनामा कराने वाले स्टांप खरीद लेते हैं। रजिस्ट्री न होने से मायूस होकर लौट जाते हैं। 15 दिन में सरकार को लाखों रुपये राजस्व की चपत लग चुकी है।
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