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हसेरन ब्लाक प्रमुख को वापस मिले अधिकार
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कन्नौज। कानूनी लड़ाई के बाद हसेरन ब्लाक प्रमुख को वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार वापस मिल गए हैं। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने पहले की तरह काम करने की स्वीकृति दे दी है। विकास कार्यों में गड़बड़ी की शिकायत पर 18 फरवरी 2019 को ब्लाक प्रमुख के अधिकार सीज किए गए थे।
कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग से शिकायत की थी कि हसेरन ब्लाक में हो विकास कार्यों में गड़बड़ी की जा रही है। प्रमुख सचिव के निर्देश पर डीएम ने अपर जिला मजिस्ट्रेट डीपी सिंह को जांच सौंपी थी। इसके बाद शासन ने ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। संचालन समिति का गठन कर दिया गया। संचालन समिति में बीडीसी सदस्य योगेंद्र कुमार, पुष्पेंद्र सिंह शाक्य और इंद्रपाल सिंह को रखा गया। शासन के निर्देश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
हाईकोर्ट ने 18 अक्तूबर को शासन के दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए ब्लाक प्रमुख के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार वापस करने के आदेश जारी कर दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने भी ब्लाक प्रमुख के अधिकार वापस कर दिए। तीन सदस्यीय संचालन समिति को निरस्त कर दिया। ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया ने बताया कि असत्य पर सत्य की जीत हुई है। आठ सदस्यों की ओर से शिकायत की गई थी। बाद में छह सदस्यों ने उनके पक्ष में बयान दिए। उनकी छवि को धूमिल करने के लिए नियोजित ढंग से आरोप लगाए गए थे।
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जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल किए गए हैं।
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कुछ क्षेत्र पंचायत सदस्यों ने प्रमुख सचिव पंचायती राज विभाग से शिकायत की थी कि हसेरन ब्लाक में हो विकास कार्यों में गड़बड़ी की जा रही है। प्रमुख सचिव के निर्देश पर डीएम ने अपर जिला मजिस्ट्रेट डीपी सिंह को जांच सौंपी थी। इसके बाद शासन ने ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया के वित्तीय अधिकार सीज कर दिए। संचालन समिति का गठन कर दिया गया। संचालन समिति में बीडीसी सदस्य योगेंद्र कुमार, पुष्पेंद्र सिंह शाक्य और इंद्रपाल सिंह को रखा गया। शासन के निर्देश के खिलाफ ब्लाक प्रमुख ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी।
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हाईकोर्ट ने 18 अक्तूबर को शासन के दोनों आदेशों को निरस्त करते हुए ब्लाक प्रमुख के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकार वापस करने के आदेश जारी कर दिए। हाईकोर्ट के आदेश के बाद शासन ने भी ब्लाक प्रमुख के अधिकार वापस कर दिए। तीन सदस्यीय संचालन समिति को निरस्त कर दिया। ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया ने बताया कि असत्य पर सत्य की जीत हुई है। आठ सदस्यों की ओर से शिकायत की गई थी। बाद में छह सदस्यों ने उनके पक्ष में बयान दिए। उनकी छवि को धूमिल करने के लिए नियोजित ढंग से आरोप लगाए गए थे।
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जिलाधिकारी रवींद्र कुमार ने बताया कि ब्लाक प्रमुख उमाशंकर बेरिया के वित्तीय एवं प्रशासनिक अधिकारी हाईकोर्ट के आदेश पर बहाल किए गए हैं।