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Kannauj News: चार हजार मासूमों पर कुपोषण का साया, बचपन मुरझाया
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कन्नौज। लाख प्रयासों के बाद भी जिले का बचपन कुपोषण की गिरफ्त में नजर आ रहा है। इस कारण बचपन मुरझा रहा है तो कुपोषण का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। आठ ब्लाॅकों में चार हजार बच्चे कुपोषित हैं। इनमें 741 बच्चे अतिकुपोषित श्रेणी में हैं। ग्राफ सामने आने के बाद एक बार फिर से बाल विकास पुष्टाहार विभाग सक्रिय होने का दावा करने लगा है जबकि अभिभावकों को अपने लाडलों को लेकर भय सताने लगा है।
नवजातों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित हैं। इसके बावजूद नवजातों का बचपन कुपोषण की चपेट में आकर मुरझा रहा है। जिले में हर साल कुपोषित मासूमों की संख्या बढ़ती जा रही है। आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में शून्य से पांच साल तक के 1,52,667 बच्चे हैं। इनमें 1,49,436 नवजातों का बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से वजन किया गया। इनमें 741 बच्चे अतिकुपोषित और 3480 बच्चे कुपोषित मिले हैं। यही नहीं, लाल श्रेणी में 2485 और पीली श्रेणी में 17,557 बच्चे हैं। विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। इससे बच्चे सामान्य श्रेणी में आ सके लेकिन बच्चों के माता-पिता ही इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश वर्मा का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर भेजकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर सामान्य श्रेणी में लाया जा सके। साथ ही केंद्रों पर पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है।
आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होती दलिया और लड्डू
आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहाल व गर्भवतियों के लिए मीठा-नमकीन दलिया व लड्डू बांटे जाते हैं। हर महीने तीन किलोग्राम प्रति युवक के हिसाब पुष्टाहार भी देने की व्यवस्था है। केंद्र पर आने वाले नौनिहालों को हॉट कुक्कड भोजन भी दिया जाता है। इसके बावजूद कुपोषितों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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नवजातों को कुपोषण से बचाने के लिए सरकार की ओर से कई योजनाएं संचालित हैं। इसके बावजूद नवजातों का बचपन कुपोषण की चपेट में आकर मुरझा रहा है। जिले में हर साल कुपोषित मासूमों की संख्या बढ़ती जा रही है। आंकड़ों को देखा जाए तो जिले में शून्य से पांच साल तक के 1,52,667 बच्चे हैं। इनमें 1,49,436 नवजातों का बाल विकास पुष्टाहार विभाग की ओर से वजन किया गया। इनमें 741 बच्चे अतिकुपोषित और 3480 बच्चे कुपोषित मिले हैं। यही नहीं, लाल श्रेणी में 2485 और पीली श्रेणी में 17,557 बच्चे हैं। विभाग की ओर से कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर पौष्टिक आहार उपलब्ध कराया जाता है। इससे बच्चे सामान्य श्रेणी में आ सके लेकिन बच्चों के माता-पिता ही इसको लेकर गंभीर नजर नहीं आ रहे हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेश वर्मा का कहना है कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को घर-घर भेजकर लोगों को जागरूक किया जा रहा है, जिससे कुपोषित बच्चों को पोषण पुनर्वास केंद्र में भर्ती कर सामान्य श्रेणी में लाया जा सके। साथ ही केंद्रों पर पुष्टाहार भी वितरित किया जाता है।
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आंगनबाड़ी केंद्रों पर वितरित होती दलिया और लड्डू
आंगनबाड़ी केंद्रों पर नौनिहाल व गर्भवतियों के लिए मीठा-नमकीन दलिया व लड्डू बांटे जाते हैं। हर महीने तीन किलोग्राम प्रति युवक के हिसाब पुष्टाहार भी देने की व्यवस्था है। केंद्र पर आने वाले नौनिहालों को हॉट कुक्कड भोजन भी दिया जाता है। इसके बावजूद कुपोषितों की संख्या बढ़ती जा रही है।
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