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जानलेवा हमले में पिता-पुत्र को 10-10 वर्ष की कैद
ब्यूरो, अमर उजाला कन्नौज
Updated Sat, 08 Jul 2017 12:00 AM IST
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Court
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जानलेवा हमले के मामले में शुक्रवार को फास्ट ट्रैक कोर्ट द्वितीय ने पिता-पुत्र कोे 10-10 वर्ष का कठोर कारावास व 23 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई। इसी मामले में एक अन्य आरोपी पर किशोर न्यायालय में मामला चल रहा है।
छिबरामऊ थाना क्षेत्र के दायमगंज निवासी बृजकिशोर पुत्र रामदत्त ने 13 अक्तूबर 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपने छोटे भाई देवेंद्र व सतेंद्र के साथ खेत में गया था तभी गांव के ही रामसेवक पुत्र श्याम लाल, अपने बेटे प्रेमचंद्र व एक अन्य के साथ उसके खेत में आ गए। जमीनी विवाद को लेकर गाली-गलौज किए। विरोध करने पर रामसेवक के तीसरे साथी ने तमंचे से उन तीनों भाइयों पर हत्या की नियत से हमला कर दिया। सीने में गोली लगने से उसका भाई देवेंद्र घायल हो गया। वहीं, प्रेमचंद्र ने उस पर फावड़े से हमला कर दिया।
गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण खेतों की ओर दौड़े तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायाधीश हितेंद्र हरि ने सभी साक्ष्यों व विवेचना पत्र के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी हमलावरों को जानलेवा हमला करने का दोषी माना।
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अदालत ने रामसेवक पुत्र श्यामलाल व प्रेमचंद्र पुत्र रामसेवक को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनो दोषियों से अलग-अलग 11 हजार 500 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूलने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में वसूली जाने वाली राशि से 50 फीसदी राशि पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया। वहीं एक अन्य आरोपी घटना के समय नाबालिग था। इसके चलते उसका मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।
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छिबरामऊ थाना क्षेत्र के दायमगंज निवासी बृजकिशोर पुत्र रामदत्त ने 13 अक्तूबर 2005 को रिपोर्ट दर्ज कराई कि वह अपने छोटे भाई देवेंद्र व सतेंद्र के साथ खेत में गया था तभी गांव के ही रामसेवक पुत्र श्याम लाल, अपने बेटे प्रेमचंद्र व एक अन्य के साथ उसके खेत में आ गए। जमीनी विवाद को लेकर गाली-गलौज किए। विरोध करने पर रामसेवक के तीसरे साथी ने तमंचे से उन तीनों भाइयों पर हत्या की नियत से हमला कर दिया। सीने में गोली लगने से उसका भाई देवेंद्र घायल हो गया। वहीं, प्रेमचंद्र ने उस पर फावड़े से हमला कर दिया।
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गोली की आवाज सुनकर ग्रामीण खेतों की ओर दौड़े तो आरोपी जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया। शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे ने बताया कि फास्ट ट्रैक द्वितीय न्यायाधीश हितेंद्र हरि ने सभी साक्ष्यों व विवेचना पत्र के आधार पर सुनवाई करते हुए आरोपी हमलावरों को जानलेवा हमला करने का दोषी माना।
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अदालत ने रामसेवक पुत्र श्यामलाल व प्रेमचंद्र पुत्र रामसेवक को 10-10 वर्ष का कठोर कारावास की सजा सुनाई। दोनो दोषियों से अलग-अलग 11 हजार 500 रुपये अर्थदंड के रूप में वसूलने का आदेश दिया। कोर्ट ने अपने फैसले में वसूली जाने वाली राशि से 50 फीसदी राशि पीड़ित पक्ष को देने का आदेश दिया। वहीं एक अन्य आरोपी घटना के समय नाबालिग था। इसके चलते उसका मामला किशोर न्यायालय में विचाराधीन है।