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Kannauj News: चारा लेकर खेत से लौटे किसान को पड़ा दिल का दौरा
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सिकंदरपुर। खेत से शुक्रवार को चार लेकर लौट रहे किसान की अचानक दिल का दौरा पड़ने से हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें अस्पताल ले गए, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर के मुखिया की असमय मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
ग्राम रौरी निवासी मनोज सक्सेना (45) रोजमर्रा की तरह जानवरों के लिए चारा लेने खेत पर गए थे। दोपहर में वह खेत से चारा लेकर घर लौटे और जैसे ही आराम करने के लिए तख्त पर बैठे, अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वह बेसुध होकर गिर पड़े। हालत बिगड़ती देख परिजन उन्हें तत्काल सौ शैया अस्पताल छिबरामऊ लेकर पहुंचे। अस्पताल में परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की पुष्टि होते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
ग्रामीणों के अनुसार मनोज बेहद गरीब थे। उनके पास मात्र 10 डिसमिल खेती है, जिससे साल भर का गुजारा संभव नहीं था। वह खुद मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। मनोज के परिवार में पत्नी ममता के अलावा दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़े पुत्र अंकित का विवाह हो चुका है, जबकि बड़ी बेटी रंजना (19), प्रिया (16), कोमल (14) और छोटा बेटा अर्पित (12) अभी अविवाहित व नाबालिग हैं। पिता का साया सिर से उठने के बाद बच्चों के भरण-पोषण और बेटियों के हाथ पीले करने की चिंता से बेहाल पत्नी ममता व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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ग्राम रौरी निवासी मनोज सक्सेना (45) रोजमर्रा की तरह जानवरों के लिए चारा लेने खेत पर गए थे। दोपहर में वह खेत से चारा लेकर घर लौटे और जैसे ही आराम करने के लिए तख्त पर बैठे, अचानक उनके सीने में तेज दर्द उठा और वह बेसुध होकर गिर पड़े। हालत बिगड़ती देख परिजन उन्हें तत्काल सौ शैया अस्पताल छिबरामऊ लेकर पहुंचे। अस्पताल में परीक्षण के बाद चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। मौत की पुष्टि होते ही परिजनों में चीख-पुकार मच गई।
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ग्रामीणों के अनुसार मनोज बेहद गरीब थे। उनके पास मात्र 10 डिसमिल खेती है, जिससे साल भर का गुजारा संभव नहीं था। वह खुद मेहनत-मजदूरी कर किसी तरह अपने परिवार का भरण-पोषण कर रहे थे। मनोज के परिवार में पत्नी ममता के अलावा दो बेटे और तीन बेटियां हैं। बड़े पुत्र अंकित का विवाह हो चुका है, जबकि बड़ी बेटी रंजना (19), प्रिया (16), कोमल (14) और छोटा बेटा अर्पित (12) अभी अविवाहित व नाबालिग हैं। पिता का साया सिर से उठने के बाद बच्चों के भरण-पोषण और बेटियों के हाथ पीले करने की चिंता से बेहाल पत्नी ममता व बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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