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एक्सप्रेसवे पर फिर धंसी सड़क, मचा हड़कंप
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एक्सप्रेसवे पर कुटाई करता प्रेशर रोलर व डामरीकरण करते मजदूर।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे के 176 किलोमीटर पर सड़क का एक हिस्सा धंस गया। शुक्रवार रात राहगीरों से सूचना मिलने के बाद यूपीडा और एफकॉन अधिकारी सक्रिय हुए। आगरा से लखनऊ जाने वाले वाहनों को एक्सप्रेसवे की चार में से तीन लेन पर जाने से रोक दिया गया। एक लेन से वाहन गुजारे गए। रात भर चली मरम्मत के बाद सुबह करीब सात बजे काम पूरा हो पाया। सुबह नौ बजे के करीब यातायात सामान्य हो सका।
शुक्रवार रात वाहन चालकों ने एक्सप्रेसवे के 176 किलोमीटर पर सड़क धंसी देखी। वाहन चालकों ने इसकी जानकारी यूपीडा के गश्ती दल को दी। कुछ वाहन चालकों ने पेट्रोल पंप पर भी जानकारी दी। इस पर यूपीडा और एफकॉन के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। आगरा से लखनऊ की लेन पर करीब 20-25 फीट चौड़ी और 15 फीट लंबाई में सड़क धंसी मिली। ऐसे में यहां से वाहन गुजरते रहते तो यह हिस्सा और बड़ा हो सकता था। अधिकारियों ने कर्मचारी लगाकर बैरिकेडिंग करवाई। आगरा से लखनऊ जाने वाली तीन लेन बंद करा दी गईं। एक लेन से वाहनों को गुजारा गया। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू हुआ। 19 ट्राली मिट्टी डालकर गड्ढे को बंद किया गया।
रातभर चले काम के बाद सुबह सात बजे डामरीकरण का काम पूरा हुआ। इसके करीब दो घंटे बाद यानी नौ बजे यातायात को सामान्य किया गया। एफकॉन कंपनी के कर्मचारी ने बताया कि धंसी सड़क पर डामरीकरण कराया गया है। कोई और लेन नहीं धंसी है। सुरक्षा अधिकारी एके दुबे ने बताया कि सड़क कुछ खराब हो गई थी। एफकॉन कंपनी ने डामरीकरण कराकर सही करा दिया है।
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17 सितंबर को भी धंस चुका है एक्सप्रेसवे
इससे पहले एक्सप्रेसवे 17 सितंबर को भी धंस गया था। लगातार हुई बारिश के बाद सड़क का एक हिस्सा धंसने की जानकारी होते ही यूपीडा ने रात में काम शुरू कराया था। शुक्र था कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। करीब एक महीने बाद 18 अक्तूबर की रात फिर सड़क धंस गई। गनीमत रही कि इस बार भी कोई हादसा नहीं हुआ।
जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त न होना है वजह
जानकार बताते हैं कि एक्सप्रेसवे पर जलनिकासी के लिए होल हैं। पाइप भी लगाए गए हैं। जगह-जगह होल बंद हैं। बारिश के पानी की निकासी न होने से यह किनारों पर रुक जाता है। यह रिसकर कर नीचे पहुंचने लगता है। सड़क धंसने की यह बड़ी वजह है।
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शुक्रवार रात वाहन चालकों ने एक्सप्रेसवे के 176 किलोमीटर पर सड़क धंसी देखी। वाहन चालकों ने इसकी जानकारी यूपीडा के गश्ती दल को दी। कुछ वाहन चालकों ने पेट्रोल पंप पर भी जानकारी दी। इस पर यूपीडा और एफकॉन के कर्मचारी मौके पर पहुंच गए। आगरा से लखनऊ की लेन पर करीब 20-25 फीट चौड़ी और 15 फीट लंबाई में सड़क धंसी मिली। ऐसे में यहां से वाहन गुजरते रहते तो यह हिस्सा और बड़ा हो सकता था। अधिकारियों ने कर्मचारी लगाकर बैरिकेडिंग करवाई। आगरा से लखनऊ जाने वाली तीन लेन बंद करा दी गईं। एक लेन से वाहनों को गुजारा गया। इसके बाद मरम्मत का काम शुरू हुआ। 19 ट्राली मिट्टी डालकर गड्ढे को बंद किया गया।
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रातभर चले काम के बाद सुबह सात बजे डामरीकरण का काम पूरा हुआ। इसके करीब दो घंटे बाद यानी नौ बजे यातायात को सामान्य किया गया। एफकॉन कंपनी के कर्मचारी ने बताया कि धंसी सड़क पर डामरीकरण कराया गया है। कोई और लेन नहीं धंसी है। सुरक्षा अधिकारी एके दुबे ने बताया कि सड़क कुछ खराब हो गई थी। एफकॉन कंपनी ने डामरीकरण कराकर सही करा दिया है।
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17 सितंबर को भी धंस चुका है एक्सप्रेसवे
इससे पहले एक्सप्रेसवे 17 सितंबर को भी धंस गया था। लगातार हुई बारिश के बाद सड़क का एक हिस्सा धंसने की जानकारी होते ही यूपीडा ने रात में काम शुरू कराया था। शुक्र था कि कोई बड़ा हादसा नहीं हुआ। करीब एक महीने बाद 18 अक्तूबर की रात फिर सड़क धंस गई। गनीमत रही कि इस बार भी कोई हादसा नहीं हुआ।
जलनिकासी की व्यवस्था दुरुस्त न होना है वजह
जानकार बताते हैं कि एक्सप्रेसवे पर जलनिकासी के लिए होल हैं। पाइप भी लगाए गए हैं। जगह-जगह होल बंद हैं। बारिश के पानी की निकासी न होने से यह किनारों पर रुक जाता है। यह रिसकर कर नीचे पहुंचने लगता है। सड़क धंसने की यह बड़ी वजह है।