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Kannauj News: दहशत के आठ घंटे, पुलिस प्रशासन के भी हलक में अटकी जान

Sat, 20 Sep 2025 12:36 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sat, 20 Sep 2025 12:36 AM IST
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Eight hours of terror, even the police administration was in a fix.
छिबरामऊ। सिरफिरे दीपू चक ने करीब आठ घंटे तक कांशीराम कॉलोनी में दहशत का माहौल बनाए रखा। इस दौरान बच्चों के साथ ही पुलिस प्रशासन के भी हलक में जान अटकी रही। 13 वर्षीय प्रीति अपने सूझबूझ से दीपू को चकमा देकर खुद ही बाहर निकल आई थी। हालांकि, वह भाई को बचाने के लिए आसपास मौजूद भीड़ से हाथ जोड़कर मिन्नतें करती रही।
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पुलिस अधिकारियों के मौके पर पहुंचने के बाद सिरफिरे के साथ अधिकारियों की लगातार बातचीत चलती रही। इस दौरान पुलिस ने लगातार उसे बंधक बनाए गए बच्चे को छोड़ने के लिए कहती रही। दीपू अर्चना से मिलने की जिद पर अड़ा कभी तमंचे की नाल बच्चे के मुंह में डाल देता तो कभी खुद के सिर पर रखकर भेजा उड़ाने की धमकी देता। जिले के आलाधिकारी शाम तक इस पूरे घटनाक्रम के पल-पल की सूचना लेते रहे और शाम को उसके पकड़े जाने की खबर के साथ राहत भरी सांस ली।
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इनसेट
प्रीति ने इस तरह झांसा देकर बचाई अपनी जान

प्रीति और प्रियांशु को तमंचे की दम पर बंधक बनाने के बाद काफी देर तक दीपू कभी बच्चे की मुंह में तमंचे की नाल डालता तो कभी कनपटी पर लगाकर अर्चना को बुलाने के लिए धमकाता। इस बीच प्रीति ने सूझबूझ दिखाते हुए फोन लाकर मां से बात कराने की बात कहकर कमरे से बाहर निकल गई। दूसरे तरफ भाई के मौत के मुंह में होने पर वह आसपास के लोगों से चीख-चीख कर उसे बचाने के लिए हाथ पैर जोड़ती रही।
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दिल्ली में महिला अचानक हो गई लापता
खुद की कनपटी पर तमंचा रखे दीपू और पास में ही मौत के खौफ की दहशत में बैठा मासूम सिसक रहा था। एएसपी व सीओ युवक के समझाने में जुटे थे। युवक ने बताया कि उसने चार माह पहले अर्चना के साथ कन्नौज में कोर्ट मैरिज की थी। इसके बाद दोनों दिल्ली चले गए। वहां से अर्चना बिना बताए कहीं लापता हो गई। फोन भी बंद कर लिया। युवक बार-बार अफसरों को धमका रहा था कि अर्चना को मौके पर बुलाओ। उसके आने में चाहे कितना भी समय लग जाए। न तो खुद की कनपटी से तमंचा हटाएगा और न ही बच्चे को छोड़ेगा।


इनसेट

सिपाही पर लगाया 10 हजार लेने का आरोप

अर्चना की काॅलोनी के बाहर भारी पुलिस बल के साथ बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा रही। दीपू लगातार पुलिस कर्मियों व मीडिया कर्मियों को लाइन में लगकर इंतजार करने की धमकी दे रहा था। अफसरों के सामने दीपू ने पुलिस की धन उगाही का मामला उजागर किया। बताया कि अर्चना के साथ कोर्ट मैरिज के बाद कार्रवाई की धमकी देकर कोतवाली के एक सिपाही ने उससे 10 हजार रुपये लिए थे। अफसरों को सिपाही का मोबाइल नंबर भी दिया। सिपाही की धन उगाही का मामला सामने आने पर अफसर सकते में आ गए।


इनसेट

अंधेरा होते ही मंगवाया गया जेनरेटर

अंधेरा होने के बाद भी युवक ने काॅलोनी का दरवाजा नहीं खोला। तब अफसरों ने रोशनी के इंतजाम के लिए जनरेटर मंगवा लिया। साथ ही किसी आपात स्थिति में मौके पर ही चिकित्सीय व्यवस्था के लिए सौ शैय्या अस्पताल के डाॅ. महेश विश्वकर्मा, स्वास्थ्य कर्मियों को भी बुला लिया गया। देर शाम एसओजी टीम ने भी मौके पर पहुंच कर अफसरों के साथ मोर्चा संभाल लिया था।

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इनसेट

सिरफिरे आशिक एनकाउंटर का घटनाक्रम

- सुबह 11:30 बजे दीपू चिक ने कालोनी पहुंचकर प्रीति व प्रियांशु को कमरे में बंधक बनाया।

- दोपहर 12:15 बजे दीपू को चकमा देकर प्रीति कमरे से बाहर निकली।

- दोपहर 12:30 बजे डायल 112 पुलिस पहुंची।

- दोपहर 1:00 बजे अतिरिक्त निरीक्षक बृजमोहन पाल पुलिस के साथ मौके पर पहुंचे।

- दोपहर 1:15 बजे सीओ सुरेश मलिक ने पहुंचकर युवक को समझाने का प्रयास किया।

- दोपहर 1:30 बजे एएसपी अजय कुमार भी मौके पहुंच गए

-- शाम 5:00 बजे एसओजी प्रभारी देवेश पाल टीम के साथ पहुंचे।

- शाम 5:30 बजे जेनरेटर का इंतजाम कराया गया

- शाम 6:00 बजे एसओजी टीम ने काॅलोनी के बाहर मोर्चा संभाला

- शाम 7:13 बजे दीपू चिक ने प्रियांशू को बंधन मुक्त कर बाहर भेजा।
-शाम 7:15 बजे दीपू की फायरिंग के दौरान एसओजी प्रभारी चोटिल। साथ ही एसओजी टीम की जवाबी फायरिंग में दीपू घायल।

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भीड़ ने कई बार किया पथराव

छिबरामऊ। कांशीराम काॅलोनी के ब्लॉक नंबर 84 के सबसे निचले तल की काॅलोनी में प्रति के के रोते बिखलते हुए मदद की गुहार लगाते ही कॉलोनी के बाशिंदे जमा होने लगे। बच्चों को बंधन मुक्त कराने के लिए लोगों ने कई बार पथराव किया। इसके बाद भी दीपू ने जब गेट नहीं खोला तो लोगों ने हाथों में लाठी डंडे थाम लिए। प्रीति ने बाहर आकर जब लोगों को दीपू के पास तमंचा होने की जानकारी दी तो भीड़ ठिठक गई।

इनसेट

प्रियांशु के मुंह से नहीं फूटे शब्द

करीब 7:13 बजे सिरफिरे दीपू के चंगुल से छूटा आठ वर्षीय प्रियांशु इस कदर दहशत में था कि उसके मुंह से बोल नहीं निकल रहे थे। करीब आठ घंटे तक भूखे और प्यासे रहे प्रियांशु के लिए लोगों ने आनन-फानन में भोजन और पानी की व्यवस्था की। उसकी आंखों के सामने मौत का मंजर घूम रहा था। किसी भी चीज को हाथ लगाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। पुलिस कर्मियों के साथ लोगों ने उसे ढाढ़स बंधाया।
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