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ईशन नदी में अप्रैल में ही उड़ने लगी धूल
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सूखी पड़ी ईशन नदी।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज/तालग्राम। मैनपुरी से बिल्हौर के बीच गुजरी ईशन नदी में अप्रैल माह में ही धूल उड़ने लगी है। इससे किसानों के सामने सिंचाई का संकट है। पहले मई के आखिरी या जून माह में ऐसा होता था। ऐसे में किसान निजी नलकूपों से महंगे दाम में सिंचाई करने के लिए मजबूर हैं। तमाम शिकायतों के बाद भी समस्या का हल नहीं हो पा रहा है। वन्यजीवों और मवेशियों के सामने भी पानी का संकट है।
ईशन नदी के किनारे के गांव ताहपुर, उहिदापुर, लालसहायपुर्वा, सुजानसराय, कुंडुआपुर्वा, छौछापुर, गदनापुर, ककराह, तरेपुर्वा, चचियापुर, घुसुआपुर, सिंघनापुर, फिरोजपुर, कुड़री, खबरामऊ, छदामीपुर्वा, टिकरी, खनियापुर, महचंदापुर, किस्तियापुर, बरई, छतनेपुर, नेकरामपुर, हसनापुर, चटोरापुर, ऊमरपुर, खगू नगला, बेहटा, नगला मधई, भीकमपुर सहनी, खानपुर के किसानों के सामने नदी के पानी से सिंचाई के अलावा दूसरा विकल्प निजी नलकूप ही हैं। किसान संजय कुमार, कुलदीप, जय सिंह, विजय पटेल, रामनरेश कनौजिया, अमर सिंह वर्मा, ओमकार गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, गौरव पटेल, जीवालाल, महेंद्र सिंह, प्रदीप मिश्रा ने नदी में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
खरबूजा, तरबूज, मक्का की फसलों पर संकट
मार्च माह की शुरुआत में बोई जाने वाली फसलों पर नदी के सूखने से सिंचाई का संकट पैदा हो गया है। ईशन नदी के आसपास के खेतों में सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, मक्का, मूंगफली की खेती होती है। किसान ईशन नदी के पानी से खेतों की आसानी से सिंचाई कर लेते हैं। इस बार अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह से नदी का सूखना शुरू हो गया। नदी के सूखने से तिर्वा से तालग्राम तक के किसान परेशान हैं।
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ईशन नदी के किनारे के गांव ताहपुर, उहिदापुर, लालसहायपुर्वा, सुजानसराय, कुंडुआपुर्वा, छौछापुर, गदनापुर, ककराह, तरेपुर्वा, चचियापुर, घुसुआपुर, सिंघनापुर, फिरोजपुर, कुड़री, खबरामऊ, छदामीपुर्वा, टिकरी, खनियापुर, महचंदापुर, किस्तियापुर, बरई, छतनेपुर, नेकरामपुर, हसनापुर, चटोरापुर, ऊमरपुर, खगू नगला, बेहटा, नगला मधई, भीकमपुर सहनी, खानपुर के किसानों के सामने नदी के पानी से सिंचाई के अलावा दूसरा विकल्प निजी नलकूप ही हैं। किसान संजय कुमार, कुलदीप, जय सिंह, विजय पटेल, रामनरेश कनौजिया, अमर सिंह वर्मा, ओमकार गुप्ता, वीरेंद्र कुमार, गौरव पटेल, जीवालाल, महेंद्र सिंह, प्रदीप मिश्रा ने नदी में पानी छोड़े जाने की मांग की है।
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खरबूजा, तरबूज, मक्का की फसलों पर संकट
मार्च माह की शुरुआत में बोई जाने वाली फसलों पर नदी के सूखने से सिंचाई का संकट पैदा हो गया है। ईशन नदी के आसपास के खेतों में सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्रफल में खरबूजा, तरबूज, ककड़ी, मक्का, मूंगफली की खेती होती है। किसान ईशन नदी के पानी से खेतों की आसानी से सिंचाई कर लेते हैं। इस बार अप्रैल माह के दूसरे सप्ताह से नदी का सूखना शुरू हो गया। नदी के सूखने से तिर्वा से तालग्राम तक के किसान परेशान हैं।
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