फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Kannauj News ›   Duty erases pain, nurse becomes angel by donating blood

Kannauj News: फर्ज से दर्द मिटा, खून देकर फरिश्ता बन रही नर्स दीदी

Tue, 12 May 2026 01:16 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज Updated Tue, 12 May 2026 01:16 AM IST
विज्ञापन
Duty erases pain, nurse becomes angel by donating blood
फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं - फोटो : 1
कन्नौज। आज अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग डे है, ऐसे में नर्सों की बात करना तो बनता ही। जिले के विभिन्न अस्पतालों में सेवा देकर नर्स दीदी फर्ज के साथ मरीजों का दर्द भी मिटा रहीं हैं। मरीजों की देखभाल, दवा के साथ कोई बच्चों को सालों से जिंदगी का टीका दे रहीं हैं तो कुछ सुरक्षित प्रसव करवाकर जच्चा-बच्चा की जानें बचा रहीं हैं। इसी कड़ी में जिला अस्पताल की कई नर्स दीदी समय-समय पर जान के लाले पड़ने पर जरूरतमंदों को अपना खून देकर उम्मीद की उभरी लौ बन रहीं हैं। वे थकी नहीं, रुकी नहीं, कभी अपनों से दूर तो कभी सुविधाओं से वंचित रहकर भी अपना फर्ज निभाती रहीं। कोविड-19 की भयावह लहर में जब चारों ओर डर का साया था तो जिला अस्पताल की एक सैकड़ा से अधिक नर्स दीदी फरिश्ता भी बनी थी। मंगलवार को अंतरराष्ट्रीय नर्सिंग डे मनाने के लिए सोमवार को जिला अस्पताल की नर्सें काम के साथ तैयारियों में जुटी रहीं। पौधा रोपण के साथ केक काट जश्न मनाया जाएगा।
विज्ञापन


जिला अस्पताल की यह नर्सें रक्तदान कर बचा चुकीं जानें


जिला अस्पताल में सेवा दे रहीं पूजा राजपूत, रचना शाक्य, सोनम सोनकर बताती हैं कि नर्सिंग सिर्फ एक पेशा नहीं, मानवता की सबसे सशक्त अभिव्यक्ति है। मरीजों की देखभाल, दवा का सही समय और उससे भी बढ़कर उनके मनोबल को संबल देना, यही है नर्स की असल भूमिका।इन तीनों के अलावा कई नर्स रक्तदान कर मरीजों की जानें बचा चुकीं हैं।
विज्ञापन





नर्सिंग कोर्स में बढ़ रहा रुझान, सीख रहीं सेवा के गुण


कन्नौज। जिले में नर्सिंग कोर्स करने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं है। तिर्वा मेडिकल कॉलेज सीटें कम होने के चलते छात्राओं को प्राइवेट कॉलेजों की ओर रुख करना पड़ रहा है। कोरोना काल के बाद से नर्सिंग कोर्स करने वालों की संख्या में इजाफा भी हुआ है। इसकी वजह है कि सरकारी और निजी क्षेत्रों में नर्सिंग कोर्स करने वालों को रोजगार के अच्छे अवसर मिले हैं बीएससी, एमएससी नर्सिंग करने के बाद कॉलेज में शिक्षक और अस्पतालों में स्टाफ नर्स की नौकरी भी आसानी से मिल जाती हैं। जिले में एएनएम, जीएनएम, पोस्ट बीएससी, बीएससी नर्सिंग, एमएससी नर्सिंग की लगभग कम सीटें हैं होने के चलते कोर्स को करने के लिए कॉलेजों में लंबी वेटिंग रहती है। इसलिए कोर्स करने के लिए कानपुर, लखनऊ आगरा सहित कई बड़े शहरों की ओर जाना पड़ रहा है। एसएनएमसी में दो कोर्स चलाए जाते हैं। चार साल बीएससी नर्सिंग कोर्स पूरा होता है जबकि दो वर्षीय जीएनएम का। अर्शी कॉलेज में कोर्स कर रहीं छात्राओं ने बताया कि मरीजों की सेवा करना काफी अच्छा लगता था। टीवी पर कई सीरियल में नर्सों को मरीजों की सेवा करते देखा, इन सब से बहुत प्रभावित हुईं और नर्सिंग का कोर्स किया।
विज्ञापन
विज्ञापन




बोले प्राचार्य



हर अस्पताल की रीढ़ नर्स
अर्शी नर्सिंग एंड पैरामेडिकल कॉलेज के प्राचार्य राम प्रसाद सिंह जादौन बताते हैं कि नर्सें हर अस्पताल की रीढ़ बनी हुई हैं, जो दिन-रात मरीजों की देखभाल में जुटी रहती हैं। वे थकी नहीं, रुकी नहीं, कभी अपनों से दूर तो कभी सुविधाओं से वंचित रहकर भी अपना फर्ज निभाती रहीं। इस वक्त कॉलेज में 200 छात्राएं नर्सिंग कोर्स कर रहीं हैं।


राजकीय मेडिकल कॉलेज तिर्वा के प्राचार्य डॉ. सीपी पाल बताते हैं कि पिछले कुछ सालों से नर्सिंग कोर्स करने के लिए संख्या बढ़ी है। राजकीय मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग के कोर्स के लिए 40 सीटें हैं। इस साल एक बैच का फाइनल है। यहां से निकलने वाली नर्सें सेवा देकर स्वास्थ्य विभाग के लिए काफी मददगार होंगी।


:::::::::::::::::::::::::::



चार साल में करवाए 1800 प्रसव
तालग्राम। चार साल से सीएचसी में कार्यरत स्टाफ नर्स रमा पटेल लगभग 1800 प्रसव करा चुकी हैं। परिवार की जिम्मेदारी संभालने के साथ ही अपने दायित्व को बखूबी निभाने वाली नर्स का कहना है कि रात में ड्यूटी अकेले निकलना पड़ता है तो डर भी लगता है, लेकिन दर्द से कराह रही प्रसूताओं और नवजात के कष्ट याद कर सब भूल कर ड्यूटी करती हैं। उन्होंने बताया कि मूल रूप से हरदोई गौसगंज तिर्वा निवासी हैं परिवार से इस दिशा में काम करने की प्रेरणा मिली। इसके बाद शादी हरदोई मल्लावां निवासी अवधेश कुमार से हुई है। पहली पोस्टिंग लखनऊ के ब्लॉक माल पीएचसी पर 2015 में हुई इसके बाद मलिहाबाद अस्पताल में तैनाती हुई। पांच साल तक वहां तैनाती रही प्रति माह करीब 450 प्रसव कराकर जच्चा-बच्चा को सुरक्षित किया।



पिता से मिली सेवा की प्रेरणा, करवा चुकीं 5,250 प्रसव
तालग्राम। नौ साल से उप स्वास्थ्य केंद्र पर तैनात सुषमा पटेल बताती है कि माता-पिता से सेवा करने की प्रेरणा मिली। इसलिए नर्सिंग कोर्स कर स्वास्थ्य विभाग में 28 फरवरी 2015 तैनाती हुई। अब तक 5,250 प्रसव करा चुकी हैं। उन्होंने बताया कि रात में जब गर्भवती आती हैं या भर्ती प्रसूता की हालत बिगड़ती है तो ज्यादातर अकेले या फिर सहयोगी नर्स, वार्ड बॉय स्वीपर की मदद से ही पूरी स्थिति को संभालना पड़ता है। कभी-कभी तो अकेले ही प्रसव कराना पड़ जाता है। वह मूल रूप से हरदोई की निवासी हैं। सास-ससुर की सेवा पति का ख्याल व दो बच्चों की देखरेख के साथ प्रसव से लेकर गर्भवती महिलाओं की देखभाल तक हर जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभा रही हैं। पति मनोज कुमार सहयोगी भाव के साथ उन्हें लगातार काम करने की प्रेरणा देते हैं।

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं

फोटो :46: पूजा राजपूत। स्रोत स्वयं- फोटो : 1

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed