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Kannauj News: बेबसी और लोकलाज में विधवा मां ने अलग किए कलेजे के टुकड़े

Tue, 04 Aug 2026 11:14 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 04 Aug 2026 11:14 PM IST
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Driven by helplessness and the fear of social stigma, a widowed mother parted with her own flesh and blood.
छिबरामऊ (कन्नौज)। गरीबी, बेबसी और लोकलाज का डर इंसान से क्या-क्या न करा दे! विशुनगढ़ थाना क्षेत्र के एक गांव में आर्थिक तंगी से जूझ रही एक विधवा महिला ने बदनामी के डर से अपनी ही कोख से जन्मे नवजात जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को खुद से अलग कर दिया और गांव छोड़कर कहीं चली गई। चर्चा है कि दोनों बच्चों को महिला ने 1.80 लाख रुपये में बेच दिया है। यह मामला इन दिनों इलाके में चर्चाओं में है।
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ग्रामीणों के अनुसार, महिला कई साल पहले अपने पति और सात बच्चों के साथ मजदूरी करने जयपुर गई थी। करीब छह साल पहले सड़क हादसे में पति की मौत हो गई, जिसके बाद तीन बेटों और चार बेटियों के पालन-पोषण की पूरी जिम्मेदारी महिला के कंधों पर आ गई। उसने मेहनत-मजदूरी करके दो बेटियों और एक बेटे का विवाह भी कर दिया। बताया गया कि जयपुर में मजदूरी के दौरान महिला एक व्यक्ति के संपर्क में आकर गर्भवती हो गई। चर्चा है कि गर्भवती होने के बाद महिला ने उस व्यक्ति से 50 हजार रुपये ले लिए।
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हालांकि समाज के डर और बदनामी से बचने के लिए महिला अपने गांव लौट आई। दो दिन पहले उसने राजकीय मेडिकल कॉलेज में जुड़वां बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) को जन्म दिया। बताया जाता है कि मेडिकल कॉलेज से डिस्चार्ज होकर घर लौटते ही बच्चों की सौदेबाजी का खेल शुरू हो गया। ग्रामीणों की मानें तो बेटे को गांव के ही एक व्यक्ति को एक लाख रुपये में और बेटी को पास के गांव के एक परिवार को 80 हजार रुपये में बेच दिया गया। हैरत की बात यह रही कि इस सौदेबाजी के दौरान गांव के कई लोग गवाह के तौर पर मौजूद रहे। सौदा पूरा होते ही महिला रकम लेकर गांव से चली गई। विशुनगढ़ थानाध्यक्ष शशिकांत कनौजिया ने बताया कि फिलहाल यह मामला आधिकारिक तौर पर उनके संज्ञान में नहीं आया है। यदि कोई लिखित शिकायत या तहरीर मिलती है, तो मामले की गहनता से जांच कर कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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मामला संज्ञान में आया है, जिसके लिए चाइल्ड लाइन की टीम को मौके पर भेजा जाएगा और इसकी जांच कराई जाएगी। नवजात को बेचना अपराध की श्रेणी में आता है। बच्चों को गोद लेने की भी एक कानूनी प्रक्रिया है, जिस पर बाल कल्याण समिति निर्णय लेती है।
- उवैदुर्रहमान सिद्दीकी, जिला प्रोबेशन अधिकारी
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