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अखिलेश की बर्खास्तगी वापस पर कन्नौज में खामोशी
अमर उजाला ब्यूरो कन्नौज।
Updated Sat, 31 Dec 2016 11:44 PM IST
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अखिलेश
- फोटो : amar ujala
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इत्र नगरी में सपाइयों की राजनीति में उलटफेर जारी है। अखिलेश के समर्थन में हंगामा, नारेबाजी और पुतला दहन करने वाले चेहरे शनिवार की दोपहर बाद खामोश नजर आए। वहीं विरोधी खेमे में चर्चाएं भी शुरू हो गईं। पान की गुमटी से लेकर गांव की चौपालों तक अखिलेश की बर्खास्तगी व निरस्त को नाटक बाजी बता चुटकियां लेते रहे। उधर, राजनीतिक उठापटक पर पुलिस भी सक्रिय रही। सपा और भाजपा कार्यालयों के सामने पुलिस ने विशेष निगरानी बनाए रखी।
शुक्रवार की देर शाम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बर्खास्त किए जाने के बाद सड़कों पर उतरे सपाइयों ने नारेबाजी कर शिवपाल के पुतले को आग लगा भड़ास निकाली थी। सपाइयों के विरोध से पुलिस प्रशासन रातभर परेशान रहा। वहीं सुबह सपाइयों के लखनऊ रवाना होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली थी।
इधर, शनिवार की दोपहर बाद सीएम के पार्टी से बर्खास्तगी वापस होने पर विरोध को गए सपाइयों के स्वर शांत हो गए हैं। सभी सपाई देर शाम तक कन्नौज लौट आए हैं। सपा कार्यालय से लेकर सड़कों पर सपाइयों की गतिविधियां खामोश हैं।
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लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर जिलाध्यक्ष मुन्ना दरोगा, पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि संजू कटियार, नीलू यादव, जिला पंचायत सदस्य रजनीकांत यादव, हसीब हसन, जिला पंचायत सदस्य प्रीतू कटियार, राजेश पाल सहित तमाम नेता मौजूद हैं। वहीं, सदर विधायक अनिल दोहरे, छिबरामऊ अरविंद सिंह यादव, तिर्वा विजय बहादुर पाल अखिलेश के पक्ष में बैठक में मौजूद रहे।
एडीजी ने कानून व्यवस्था पर निगरानी के दिए निर्देश
बदले हालात के बाद पुलिस विभाग भी चौकन्ना हो गया है। एडीजी ने निर्देश जारी किए कि हालातों पर पैनी नजर रखी जाए। धरना-प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को समझाया जाए, किसी भी सूरत में कहीं पर भी जाम व तोड़फोड़ की नौबत न आए। यदि कहीं पर कार्यकर्ता बेकाबू हो रहे हैं तो उनके साथ कड़ाई से पेश आया जाए।
टिकट के विरोध को खत्म करने की राजनीति तो नहीं
सपा में पिछले पांच साल से जमीन तलाश रहे सपाइयों को शिवपाल की सूची में टिकट न मिलने से कन्नौज समेत कई विधान सभाओं में विरोध के स्वर फूटने लगे थे। जिसके चलते चहेतों को शांत करने के लिए अखिलेश यादव को अपनी सूची जारी करनी पड़ गई थी। हालांकि कन्नौज में तीनों विधान सभाओं में दोनों सूचियों में कोई परिवर्तन नहीं था, लेकिन कन्नौज में टिकट की दावेदारी में कन्नौज सदर आरएस कठेरिया, तिर्वा से नवाब सिंह, अजय वर्मा व छिबरामऊ विधानसभा से नवाब सिंह भी दावेदारी में लगे हुए थे। लखनऊ में हुई उठापटक के बाद अब अखिलेश समर्थक पक्ष में खामोशी है।
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शुक्रवार की देर शाम मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को बर्खास्त किए जाने के बाद सड़कों पर उतरे सपाइयों ने नारेबाजी कर शिवपाल के पुतले को आग लगा भड़ास निकाली थी। सपाइयों के विरोध से पुलिस प्रशासन रातभर परेशान रहा। वहीं सुबह सपाइयों के लखनऊ रवाना होने पर प्रशासन ने राहत की सांस ली थी।
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इधर, शनिवार की दोपहर बाद सीएम के पार्टी से बर्खास्तगी वापस होने पर विरोध को गए सपाइयों के स्वर शांत हो गए हैं। सभी सपाई देर शाम तक कन्नौज लौट आए हैं। सपा कार्यालय से लेकर सड़कों पर सपाइयों की गतिविधियां खामोश हैं।
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लखनऊ में मुख्यमंत्री आवास के बाहर जिलाध्यक्ष मुन्ना दरोगा, पूर्व ब्लाक प्रमुख नवाब सिंह यादव, जिला पंचायत अध्यक्ष प्रतिनिधि संजू कटियार, नीलू यादव, जिला पंचायत सदस्य रजनीकांत यादव, हसीब हसन, जिला पंचायत सदस्य प्रीतू कटियार, राजेश पाल सहित तमाम नेता मौजूद हैं। वहीं, सदर विधायक अनिल दोहरे, छिबरामऊ अरविंद सिंह यादव, तिर्वा विजय बहादुर पाल अखिलेश के पक्ष में बैठक में मौजूद रहे।
एडीजी ने कानून व्यवस्था पर निगरानी के दिए निर्देश
बदले हालात के बाद पुलिस विभाग भी चौकन्ना हो गया है। एडीजी ने निर्देश जारी किए कि हालातों पर पैनी नजर रखी जाए। धरना-प्रदर्शन कर रहे कार्यकर्ताओं को समझाया जाए, किसी भी सूरत में कहीं पर भी जाम व तोड़फोड़ की नौबत न आए। यदि कहीं पर कार्यकर्ता बेकाबू हो रहे हैं तो उनके साथ कड़ाई से पेश आया जाए।
टिकट के विरोध को खत्म करने की राजनीति तो नहीं
सपा में पिछले पांच साल से जमीन तलाश रहे सपाइयों को शिवपाल की सूची में टिकट न मिलने से कन्नौज समेत कई विधान सभाओं में विरोध के स्वर फूटने लगे थे। जिसके चलते चहेतों को शांत करने के लिए अखिलेश यादव को अपनी सूची जारी करनी पड़ गई थी। हालांकि कन्नौज में तीनों विधान सभाओं में दोनों सूचियों में कोई परिवर्तन नहीं था, लेकिन कन्नौज में टिकट की दावेदारी में कन्नौज सदर आरएस कठेरिया, तिर्वा से नवाब सिंह, अजय वर्मा व छिबरामऊ विधानसभा से नवाब सिंह भी दावेदारी में लगे हुए थे। लखनऊ में हुई उठापटक के बाद अब अखिलेश समर्थक पक्ष में खामोशी है।