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Kannauj News: मेडिकल कॉलेज में डायलिसिस मशीनें बनी शोपीस
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तिर्वा। सरकार भले ही बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के बड़े-बड़े दावे कर रही हो लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। तिर्वा स्थित राजकीय मेडिकल कॉलेज में मरीजों की डायलिसिस नहीं हो पा रही है और आठ साल से मशीनें शोपीस हैं। जबकि जरूरतमंद मरीज दर-दर भटकने को मजबूर हैं।
आठ वर्षों से मेडिकल कॉलेज में लगी दो डायलिसिस मशीनें बंद पड़ी हैं। इन मशीनों के संचालन के लिए न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। नतीजा यह है कि लाखों रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हुई हैं और मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। जनपद में राज्यमंत्री होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो पा रही हैं।
मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों की कमी है। विभागाध्यक्ष के अभाव में एक असिस्टेंट प्रोफेसर और दो सीनियर डॉक्टरों के भरोसे पूरे विभाग का संचालन किया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. सीपी पाल ने बताया कि संसाधनों और स्टाफ की कमी को लेकर कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। कहा कि जल्द मेडिसिन विभाग में दो सीनियर रेजिडेंस डॉक्टरों की नियुक्ति हो रही है।
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आठ वर्षों से मेडिकल कॉलेज में लगी दो डायलिसिस मशीनें बंद पड़ी हैं। इन मशीनों के संचालन के लिए न तो पर्याप्त डॉक्टर हैं और न ही प्रशिक्षित स्टाफ। नतीजा यह है कि लाखों रुपये की मशीनें बेकार पड़ी हुई हैं और मरीजों को निजी अस्पतालों में महंगा इलाज कराने को मजबूर होना पड़ रहा है। जनपद में राज्यमंत्री होने के बाद भी स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर नहीं हो पा रही हैं।
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मेडिकल कॉलेज प्रशासन का कहना है कि मेडिसिन विभाग में डॉक्टरों की कमी है। विभागाध्यक्ष के अभाव में एक असिस्टेंट प्रोफेसर और दो सीनियर डॉक्टरों के भरोसे पूरे विभाग का संचालन किया जा रहा है। प्राचार्य डॉ. सीपी पाल ने बताया कि संसाधनों और स्टाफ की कमी को लेकर कई बार शासन को प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं। कहा कि जल्द मेडिसिन विभाग में दो सीनियर रेजिडेंस डॉक्टरों की नियुक्ति हो रही है।
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