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खरीद केंद्र पर धान बेचकर फंस गए किसान
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खरीद केंद्र पर धान के पैकेट तैयार करते कर्मचारी।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। सरकारी क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले जिले के करीब 300 किसान फंस गए हैं। यहां बिक्री के 72 घंटे के अंदर भुगतान करने का दावा खोखला निकला। पंद्रह केंद्रों पर किसानों का करीब पांच करोड़ रुपये का भुगतान दो माह से फंसा है। अपना ही रुपया पाने के लिए किसान अफसरों के चक्कर काट रहे हैं। अफसर समस्या का समाधान नहीं करा पा रहे हैं।
किसानों को धान का अच्छा भाव मिले, इसके लिए 33 धान खरीद केंद्रों पर 1868 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने की व्यवस्था हुई। पांच निजी कंपनियों के 15 धान खरीद केंद्र खोले गए। प्रचार-प्रसार कर किसानों से क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए कहा गया। बेचने वालों को भरोसा दिया गया कि 72 घंटे के अंदर उनके खातों में रकम पहुंच जाएगी। यह दावा खोखला निकला। कई केंद्र किसानों को बगैर भुगतान किए बंद कर दिए गए।
क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले करीब 300 किसानों का पांच करोड़ रुपया फंसा है। किसानों ने कई बार जिलाधिकारी से भुगतान कराने की गुहार लगाई। दो माह बीतने के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं हो सका। इससे किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी समरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि लिखा पढ़ी की गई है। जल्द किसानों का भुगतान कराया जाएगा।
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इन संस्थाओं ने रोक लिया किसानों का भुगतान
शासन के निर्देश पर जिले में एनसीसीएफ(राष्ट्रीय मर्यादित सहकारी उपभोक्ता संघ), नेफेड(भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ), एग्रो, मार्केटिंग, पीसीएफ ( उत्तर प्रदेश प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन)ने किसानों से धान खरीदा है। इन संस्थाओं के जिले में 15 केंद्र संचालित थे। यह सभी केंद्र अब बंद हैं। इन पर न तो धान की खरीद की जा रही, न ही किसानों को भुगतान किया जा रहा है।
जिले में 97 फीसदी हुई धान खरीद
जिले में 33 केंद्रों ने तीन लाख पचास हजार क्विंटल के लक्ष्य पर 6200 किसानों से तीन लाख 35 हजार क्विंटल धान खरीदा है। केंद्र 28 फरवरी तक खुलेंगे। इस अवधि तक धान खरीद 100 फीसदी कर लेने का दावा किया जा रहा है।
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किसानों को धान का अच्छा भाव मिले, इसके लिए 33 धान खरीद केंद्रों पर 1868 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदने की व्यवस्था हुई। पांच निजी कंपनियों के 15 धान खरीद केंद्र खोले गए। प्रचार-प्रसार कर किसानों से क्रय केंद्र पर धान बेचने के लिए कहा गया। बेचने वालों को भरोसा दिया गया कि 72 घंटे के अंदर उनके खातों में रकम पहुंच जाएगी। यह दावा खोखला निकला। कई केंद्र किसानों को बगैर भुगतान किए बंद कर दिए गए।
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क्रय केंद्रों पर धान बेचने वाले करीब 300 किसानों का पांच करोड़ रुपया फंसा है। किसानों ने कई बार जिलाधिकारी से भुगतान कराने की गुहार लगाई। दो माह बीतने के बाद भी किसानों को भुगतान नहीं हो सका। इससे किसान अपने को ठगा महसूस कर रहे हैं। दूसरी ओर जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी समरेंद्र प्रताप सिंह का कहना है कि लिखा पढ़ी की गई है। जल्द किसानों का भुगतान कराया जाएगा।
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इन संस्थाओं ने रोक लिया किसानों का भुगतान
शासन के निर्देश पर जिले में एनसीसीएफ(राष्ट्रीय मर्यादित सहकारी उपभोक्ता संघ), नेफेड(भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ), एग्रो, मार्केटिंग, पीसीएफ ( उत्तर प्रदेश प्रादेशिक कोऑपरेटिव फेडरेशन)ने किसानों से धान खरीदा है। इन संस्थाओं के जिले में 15 केंद्र संचालित थे। यह सभी केंद्र अब बंद हैं। इन पर न तो धान की खरीद की जा रही, न ही किसानों को भुगतान किया जा रहा है।
जिले में 97 फीसदी हुई धान खरीद
जिले में 33 केंद्रों ने तीन लाख पचास हजार क्विंटल के लक्ष्य पर 6200 किसानों से तीन लाख 35 हजार क्विंटल धान खरीदा है। केंद्र 28 फरवरी तक खुलेंगे। इस अवधि तक धान खरीद 100 फीसदी कर लेने का दावा किया जा रहा है।