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धान खरीद: पचास फीसदी किसानों को ही हो सका भुगतान
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मंडी समिति के धान खरीद केंद्र पर लगे बोरे।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। निजी संस्थाओं के छह सरकारी धान खरीद केंद्रों ने समय बीतने के बाद भी पचास फीसदी किसानों को ही भुगतान किया है। बाकी किसान धान बेचने के बाद भुगतान के लिए भटक रहे हैं। अधिकारियों ने एक सप्ताह की हिदायत देते हुए शत-प्रतिशत भुगतान के लिए कहा है।
जिले में 33 धान खरीद केंद्र हैं। ज्यादातर केंद्र किसानों को समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं। 72 घंटे में भुगतान करने का निर्देश होने के बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। इसी से किसानों के खाते में समय से धान खरीद का भुगतान नहीं पहुंच रहा। सबसे खराब हाल जिले के छह धान खरीद केंद्रों का है। नेफेड व एनसीसीएफ के छह केंद्रों को सात दिन में भुगतान करने के आश्वासन पर तीन दिन बंद करने के बाद खोला गया। सात दिन में किसानों का भुगतान खाते में भेजने के कड़े निर्देश दिए गए थे। जिस समय इन केंद्रों पर धान खरीद पर रोक लगाई गई, उस समय तीस फीसदी किसानों को ही भुगतान हो सका था। करीब 200 किसानों का भुगतान नहीं हुआ था। दबाव के बाद अब तक 50 फीसदी किसानों को भुगतान किया जा सका है। 50 फीसदी किसान भुगतान के लिए अब तक भटक रहे हैं। यह कभी केंद्र प्रभारी तो कभी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इनका भुगतान एक करोड़ रुपये से अधिक है। इस वजह से एजेंसी इस धनराशि को एक साथ किसानों के खाते में नहीं भेज रही है।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी समरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में छह केंद्रों पर धान खरीद का भुगतान फंसने की बात सामने आई है। इन केंद्रों के अधिकारियों को एक सप्ताह का समय देते हुए भुगतान कराया जा रहा है। जल्द ही किसानों की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रयास होगा कि किसानों को धान खरीद का भुगतान निर्धारित समय में किया जाए।
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जिले में 33 धान खरीद केंद्र हैं। ज्यादातर केंद्र किसानों को समय से भुगतान नहीं कर रहे हैं। 72 घंटे में भुगतान करने का निर्देश होने के बाद भी लापरवाही बरती जा रही है। इसी से किसानों के खाते में समय से धान खरीद का भुगतान नहीं पहुंच रहा। सबसे खराब हाल जिले के छह धान खरीद केंद्रों का है। नेफेड व एनसीसीएफ के छह केंद्रों को सात दिन में भुगतान करने के आश्वासन पर तीन दिन बंद करने के बाद खोला गया। सात दिन में किसानों का भुगतान खाते में भेजने के कड़े निर्देश दिए गए थे। जिस समय इन केंद्रों पर धान खरीद पर रोक लगाई गई, उस समय तीस फीसदी किसानों को ही भुगतान हो सका था। करीब 200 किसानों का भुगतान नहीं हुआ था। दबाव के बाद अब तक 50 फीसदी किसानों को भुगतान किया जा सका है। 50 फीसदी किसान भुगतान के लिए अब तक भटक रहे हैं। यह कभी केंद्र प्रभारी तो कभी अधिकारियों के चक्कर काट रहे हैं। इनका भुगतान एक करोड़ रुपये से अधिक है। इस वजह से एजेंसी इस धनराशि को एक साथ किसानों के खाते में नहीं भेज रही है।
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जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी समरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि जिले में छह केंद्रों पर धान खरीद का भुगतान फंसने की बात सामने आई है। इन केंद्रों के अधिकारियों को एक सप्ताह का समय देते हुए भुगतान कराया जा रहा है। जल्द ही किसानों की समस्या का समाधान कर दिया जाएगा। इसके बाद प्रयास होगा कि किसानों को धान खरीद का भुगतान निर्धारित समय में किया जाए।
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