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देवोत्थान एकादशी पर देवताओं से मांगा सुख, समृद्धि का वरदान
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छिबरामऊ में गन्ने की खरीदारी करते ग्राहक।
- फोटो : CHIBRAMAU
छिबरामऊ(कन्नौज)। कार्तिक महीने की शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवोत्थान एकादशी के रूप में परंपरागत ढंग से मनाया गया। घरों में लोगों ने भगवान विष्णु की पूजा अर्चना कर देवताओं से सुख, समृद्धि का वरदान मांगा।
मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार महीने तक विश्राम करने के बाद कार्तिक महीने की एकादशी पर उठते हैं। इसी से इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। सुबह से घरों में पूजा अर्चना के लिए तैयारियां शुरू हो गई थीं। लक्ष्मी व भगवान विष्णु का स्वागत करने के लिए चावल के घोल से महिलाओं ने मुख्य दरवाजे तक पूजा स्थल तक रंगोली बनाई। इसके बाद विधि विधान के साथ पूजा अर्चना का दौर शुरू हुआ। भक्तों ने गन्ना, सिंघाड़े, गुड़, फल व अनाज सहित अन्य सामग्री से भगवान विष्णु की पूजा की। महिलाओं ने अखंड सौभाग्य पाने के लिए भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह कर आशीर्वाद लिया। शक्ति पीठ मां गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसीदास शास्त्री ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से हिंदू समाज में धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाता है। धारणा है कि देवोत्थान एकादशी पर व्रत रखने वाले लोगों को यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक और पुण्यवर्धक है।
गन्ना व सिंघाड़े के चढ़े रहे दाम
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवोत्थान एकादशी पर गन्ना व सिंघाड़े से भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ फलदायक है। इससे नगर में एक सैकड़ा से अधिक जगहों पर बिक्री के लिए गन्नों के ढेर लगे थे। यहां गन्ना खरीदने के लिए मारामारी मची रही। दुकानदारों ने मनमाने ढंग से दाम वसूले। दस रुपये में बिकने वाला गन्ना बीस से तीस रुपये में बिका। एक किलो उबले हुए सिंघाड़े की बिक्री 100 रुपये में हुई।
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मान्यता है कि भगवान विष्णु क्षीरसागर में चार महीने तक विश्राम करने के बाद कार्तिक महीने की एकादशी पर उठते हैं। इसी से इसे देवोत्थान एकादशी कहा जाता है। सुबह से घरों में पूजा अर्चना के लिए तैयारियां शुरू हो गई थीं। लक्ष्मी व भगवान विष्णु का स्वागत करने के लिए चावल के घोल से महिलाओं ने मुख्य दरवाजे तक पूजा स्थल तक रंगोली बनाई। इसके बाद विधि विधान के साथ पूजा अर्चना का दौर शुरू हुआ। भक्तों ने गन्ना, सिंघाड़े, गुड़, फल व अनाज सहित अन्य सामग्री से भगवान विष्णु की पूजा की। महिलाओं ने अखंड सौभाग्य पाने के लिए भगवान विष्णु और तुलसी का विवाह कर आशीर्वाद लिया। शक्ति पीठ मां गमा देवी मंदिर के पुजारी पंडित बनारसीदास शास्त्री ने बताया कि देवोत्थान एकादशी के दिन से हिंदू समाज में धार्मिक व मांगलिक कार्यक्रमों का आयोजन शुरू हो जाता है। धारणा है कि देवोत्थान एकादशी पर व्रत रखने वाले लोगों को यशस्वी पुत्र की प्राप्ति होती है। यह व्रत पापनाशक और पुण्यवर्धक है।
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गन्ना व सिंघाड़े के चढ़े रहे दाम
धार्मिक मान्यता के अनुसार देवोत्थान एकादशी पर गन्ना व सिंघाड़े से भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ फलदायक है। इससे नगर में एक सैकड़ा से अधिक जगहों पर बिक्री के लिए गन्नों के ढेर लगे थे। यहां गन्ना खरीदने के लिए मारामारी मची रही। दुकानदारों ने मनमाने ढंग से दाम वसूले। दस रुपये में बिकने वाला गन्ना बीस से तीस रुपये में बिका। एक किलो उबले हुए सिंघाड़े की बिक्री 100 रुपये में हुई।
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