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सेहतमंद बनाने की योजना बेपटरी

Thu, 14 Jan 2016 11:52 PM IST
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज Updated Thu, 14 Jan 2016 11:52 PM IST
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Derail health plans

बजट की कमी होने की वजह से बाल विकास एवं पुष्टाहार

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विभाग की ओर से संचालित हाटकुक्ड योजना पटरी से उतर गई है। बीते चार महीने से आंगनबाड़ी केंद्रों पर हाटकुक्ड नहीं बन पा रहा है। इस कारण कुपोषित बच्चे सेहतमंद नहीं हो पा रहे हैं। अधिकारी यह कहकर अपना बचाव कर रहे हैं कि बजट की डिमांड शासन स्तर पर की जा चुकी है।

ज्ञात हो कि कि शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चों को कुपोषण से बचाने के लिए आंगनबाड़ी विभाग संचालित हैं। यहां मानदेय के आधार पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों और सहायिकाओं की तैनाती की गई है। इन्हें पोषाहार बांटने के साथ ही बच्चों को हाटकुक्ड (पका पकाया गरमा गरम खाना) खिलाने की जिम्मेदारी दी गई है।

बीते कई सालों से चल रही इस योजना पर सितंबर माह से बजट के अभाव में ब्रेक लग गया है। जिलेभर में 1615 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। इनमें शून्य से पांच वर्ष तक के 1,66,646 बच्चे पंजीकृत हैं। वर्ष 2015 में जिलाधिकारी की ओर से वजन दिवस आयोजित कराकर कराए गए वजन के दौरान इनमें से 25,902 कुपोषित व 9,572 बच्चे अति कुपोषित निकल चुके हैं।

वर्तमान समय में जिले में कुपोषण का शिकार इन बच्चों को सेहतमंद बनाने के लिए सिर्फ पंजीरी ही मिल पा रही है। इस बाबत आंगनबाड़ी कर्मचारी संघ के उपाध्यक्ष विनोद शर्मा का कहना है कि हाटकुक्ड बनाने के लिए बजट की मांग कई बार विभागीय अफसरों से की जा चुकी है, पर आश्वासन के सिवाय कुछ नहीं मिला।

उन्होंने कहा कि फिलहाल कुपोषण से बच्चों को मुक्त करने के अभियान में तेजी नहीं आ पा रही है और अब बच्चे गरमागरम और पका-पकाया खाना खाने के लिए तरस रहे हैं। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी राजीव सिंह का कहना है कि हाटकुक्ड भोजन बच्चों को परोसने के लिए बजट आवंटित करने को शासन स्तर पर लिखापढ़ी की जा रही है।

ज्ञात हो कि वित्तीय वर्ष 14-15 में जून महीने में एक करोड़ 43 लाख 61 हजार 900 रुपये का ही आवंटन हुआ था। इससे दो जुलाई व अगस्त में हाटकुक्ड पकाकर बच्चों को खिलाया गया था। अप्रैल से लेकर मई तक भी हाटकुक्ड नहीं बना था।

जिला कार्यक्रम अधिकारी कार्यालय के अनुसार, हाटकुक्ड के दायरे में तीन से छह वर्ष तक के बच्चे आते हैं। पूरे जिले में आंगनबाड़ी केंद्रों पर इस आयु वर्ग में 76,585 बच्चे पंजीकृत हैं। केंद्रवार बच्चों की उपस्थिति के संख्या के अनुसार धनराशि का आवंटन किया जाता है।

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