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डेंगू से महिला की मौत, बेटा और बेटी गंभीर
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गीता देवी की फाइल फोटो।
- फोटो : KANNAUJ
कन्नौज। कोरोना के बाद अब जिले में डेंगू का प्रकोप बढ़ रहा है। रोजाना बड़ी संख्या में डेंगू के मरीज सामने आ रहे हैं। शहर के काजी टोला मोहल्ले में डेंगू के चलते एक महिला की मौत हो गई। उसकी बेटी और बेटे की हालत गंभीर है। 40 दिनों में 255 लोगों की जांच रिपोर्ट में अब तक 50 लोगों में डेंगू की पुष्टि हो चुकी है। वहीं शहर में डेंगू का बेहतर उपचार न होने से मरीज कानपुर पहुंच कर नर्सिंग होम में उपचार करा रहे हैं।
शहर के मोहल्ला काजी टोला निवासी 40 वर्षीय गीता देवी के पति वीरेंद्र की एक साल पहले मौत हो गई थी। वह 20 वर्षीय पुत्र विक्की और 17 वर्षीय पुत्री नेहा के साथ घर में रहती थीं। रविवार को गीता देवी को बुखार आ गया। आराम न मिलने पर सोमवार को वह जिला अस्पताल पहुंचीं। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद शाम को बेटे विक्की और बेटी नेहा की भी हालत बिगड़ गई। इन्हें नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। वहीं मंगलवार सुबह गीता को चिकित्सकों ने कानपुर रेफर कर दिया। कानपुर जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पड़ोसियों ने गीता देवी के बच्चों को कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कराया है। जिला अस्पताल की लैब के अनुसार 12 सितंबर से अब तक 255 लोगों की जांच में 50 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
शहर में डेंगू मरीजों को नहीं मिल रहा बेहतर उपचार
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। इससे मरीज कानपुर और लखनऊ के अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। डेंगू पीड़िता मेहंदीगंज निवासी रमा तिवारी ने बताया कि उन्हें चार दिन से डेंगू है। शहर में बेहतर उपचार न मिलने पर वह कानपुर जाकर इलाज करा रही हैं। उनकी प्लेटलेट्स निरंतर घट रही थीं।
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कोविड हल्के और डेंगू तेज बुखार से होता शुरू
सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि डेंगू के कुछ केस सामने आए हैं। कोरोना होने पर हल्के बुखार से शुरुआत होती है। इसके बाद खांसी और गला खराब होता है। डेंगू में एकदम से तेज बुखार, शरीर में दर्द होने लगता है। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर जांच कर चिकित्सकों से परामर्श अवश्य लें। बिना चिकित्सक के परामर्श से कोई दवा न खाएं।
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शहर के मोहल्ला काजी टोला निवासी 40 वर्षीय गीता देवी के पति वीरेंद्र की एक साल पहले मौत हो गई थी। वह 20 वर्षीय पुत्र विक्की और 17 वर्षीय पुत्री नेहा के साथ घर में रहती थीं। रविवार को गीता देवी को बुखार आ गया। आराम न मिलने पर सोमवार को वह जिला अस्पताल पहुंचीं। जांच में डेंगू की पुष्टि हुई। जिला अस्पताल में भर्ती होने के बाद शाम को बेटे विक्की और बेटी नेहा की भी हालत बिगड़ गई। इन्हें नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया। वहीं मंगलवार सुबह गीता को चिकित्सकों ने कानपुर रेफर कर दिया। कानपुर जाते समय रास्ते में मौत हो गई। पड़ोसियों ने गीता देवी के बच्चों को कानपुर के हैलट अस्पताल में भर्ती कराया है। जिला अस्पताल की लैब के अनुसार 12 सितंबर से अब तक 255 लोगों की जांच में 50 लोगों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
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शहर में डेंगू मरीजों को नहीं मिल रहा बेहतर उपचार
जिला अस्पताल में डेंगू मरीजों को बेहतर उपचार नहीं मिल रहा है। इससे मरीज कानपुर और लखनऊ के अस्पतालों का रुख कर रहे हैं। डेंगू पीड़िता मेहंदीगंज निवासी रमा तिवारी ने बताया कि उन्हें चार दिन से डेंगू है। शहर में बेहतर उपचार न मिलने पर वह कानपुर जाकर इलाज करा रही हैं। उनकी प्लेटलेट्स निरंतर घट रही थीं।
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कोविड हल्के और डेंगू तेज बुखार से होता शुरू
सीएमओ डॉ. कृष्ण स्वरूप ने बताया कि डेंगू के कुछ केस सामने आए हैं। कोरोना होने पर हल्के बुखार से शुरुआत होती है। इसके बाद खांसी और गला खराब होता है। डेंगू में एकदम से तेज बुखार, शरीर में दर्द होने लगता है। ऐसे लक्षण मिलने पर तत्काल नजदीक के स्वास्थ्य केंद्र पहुंच कर जांच कर चिकित्सकों से परामर्श अवश्य लें। बिना चिकित्सक के परामर्श से कोई दवा न खाएं।