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कछुआ चाल से चल रही क्राप कटिंग

Mon, 20 Apr 2015 11:43 PM IST
अमर उजाला कन्नाैैज
अमर उजाला कन्नाैैज Updated Mon, 20 Apr 2015 11:43 PM IST
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cutting crop Moving at snail's pace
कुदरत की मार से बेदम किसानों को खरीफ के बाद रबी की फसल में हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति पाने के लिए कई महीने तक इंतजार करना पड़ सकता है। वजह रबी की फसल में भी क्लेम के भुगतान का सारा दारोमदार क्राप कटिंग की रिपोर्ट पर टिका है। इसके बावजूद क्राप कटिंग का काम कछुआ चाल से चल रहा है। यदि जिले के आला अफसरों ने इस ओर ध्यान न दिया तो इसका खामियाजा जिले के 12866 किसानों को भुगतना पड़ेगा।
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उप निदेशक कृषि की ओर से शासन-प्रशासन को भेजे गए आंकड़ों के अनुसार इस बार रबी के सीजन में किसी भी किसान ने सरसों की फसल का योजना के तहत बीमा नहीं कराया है। केवल आलू व गेहूं बोने वाले किसानों को ही क्षतिपूर्ति का क्लेम मिलना है। लेकिन किस किसान को कितनी क्षतिपूर्ति दी जाएगी, इसका निर्धारण भूलेख विभाग की तरफ से कराई गई क्राप कटिंग के नतीजों पर निर्भर होगा।
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उधर कलेक्ट्रेट स्थित भूलेख कार्यालय की मानें तो इस बार हालात दयनीय होने के बावजूद क्राप कटिंग का काम काफी सुस्त है। इसकी मुख्य वजह लेखपालों व कानूनगो का सर्वे कार्य में व्यस्त होना है। इसीलिए शासन को भी क्राप कटिंग के आंकड़े अभी तक नहीं भेजे जा सके हैं। इस मुद्दे पर भूलेख कार्यालय की सहायक सांख्यिकी अधिकारी मनु दोहरे का कहना है कि लेखपालों से लगातार संपर्क का प्रयास चल रहा है।
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 अक्सर कई लेखपालों के फोन स्विच आफ बताते हैं। इस समस्या से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। भूलेख कार्यालय की तरफ से क्राप कटिंग में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी नहीं की जा रही है। तहसील स्तर से रिपोर्ट आने के बाद ही उसे उच्चाधिकारियों तक भेजा जा सकेगा।

उप निदेशक कृषि डा. राजेश कुमार का कहना है कि किसानों को बीमा कंपनी से क्लेम दिलाने में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी क्राप कटिंग है। कृषि विभाग ने सारे तथ्यों से उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। गेहूं में कुल बीमित धनराशि का अधिकतम 75 फीसदी और आलू में 80 फीसदी रुपया बतौर क्षतिपूर्ति देने का प्रावधान है।


फैक्ट फाइल : रबी की फसल
ॎ रबी का सीजन एक अक्तूबर से 31 मार्च तक रहता है।
ॎ जनपद में आलू, गेहूं और सरसों की तीन फसलें ही बीमा योजना के दायरे में आती हैं।
ॎ गेहूं में जनपद की सभी 81 न्याय पंचायतों के किसान बीमा करा सकते हैं।
ॎ आलू में 77 न्याय पंचायतें और सरसों में 14 न्याय पंचायतें बीमा योजना के कार्यक्षेत्र में हैं।
ॎ गेहूं पर प्रति हेक्टेयर 45095 रुपये व आलू का प्रति हेक्टेयर 200210 रुपये बीमा होता है।
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रबी की फसल बीमा की तस्वीर
ॎ कुल 6402 हेक्टेयर फसल का हुआ बीमा।
ॎ 16323000 रुपया प्रीमियम किसानों के क्रेडिट कार्ड से कटा।
ॎ केंद्र सरकार ने 67.50 लाख व प्रदेश सरकार ने 67.50 लाख का प्रीमियम दिया।
ॎ बीमा कंपनी को कुल 29823000 मिले।
ॎ कुल 47,23,90,000 रुपये का बीमा हुआ।
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क्राप कटिंग कार्य में तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं। विभागीय स्टाफ को तलब कर रोजाना मानीटरिंग करने के निर्देश दिए हैं। क्राप कटिंग कार्य जल्द पूर्ण कराकर नुकसान की रिपोर्ट शासन को भिजवाएंगे। जिससे किसानों को जल्द से जल्द फसल का क्लेम मिल सके।
--रमेश चंद्र यादव, एडीएम कन्नौज।
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