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Kannauj News: एक क्लिक से खुलेगा बंदियों का आपराधिक इतिहास, ऑनलाइन डेटा फीडिंग शुरू
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गुगरापुर(कन्नौज)। अब अपराधियों का रिकार्ड खंगालने के लिए रजिस्टर पलटने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। एक क्लिक पर बंदी का पूरा आपराधिक इतिहास निकल कर सामने आ जाएगा। इससे पुलिस और जेल प्रशासन को काफी सुविधा मिलेगी। जिला जेल में अपराधियों का डेटा ऑनलाइन फीडिंग की प्रक्रिया शुरू हो गई है।
वर्ष 1980 में नाम, पिता का नाम, निवास, पहचान चिन्ह आदि लिखे जाते थे और अपराधियों का केवल अंगूठे का निशान लगता था। वर्ष 1990 के बाद ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगना शुरू हुआ। बाद में अपराधियों की पहचान, उनके नाम-पता सब लिखा जाने लगा था। अब पिछले कई साल से अपराधियों का रंगीन फोटो रजिस्टर पर चस्पा हो रहा है। उनका पूरा हुलिया और नाम पता सब कुछ दर्ज होता है, लेकिन यह रिकार्ड ऑनलाइन नहीं होता था। जेल में ज्यादा रिकार्ड एकत्र हो जाने की वजह से पिछला रिकार्ड हटा दिया जाता था। जब कभी पुराने रिकार्ड की आवश्यकता पड़ती है तो जेल प्रशासन को खोजबीन में काफी परेशानी होती है। अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि जेल प्रशासन द्वारा जेल के सभी अपराधियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इससे एक क्लिक से ही किसी भी अपराधी का पूरा आपराधिक इतिहास खुलकर सामने आ जाएगा। इससे पुलिस व जेल प्रशासन को काफी राहत मिलेगी।
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इनसेट
सभी बंदियों का तैयार हो रहा डाटा
जेल में इस समय करीब 526 बंदी और कैदी हैं। अब तक जो बंदी जेल आ रहे थे या आ रहे हैं और अपनी जमानत करवा कर बाहर जा रहे हैं, उनका सारा रिकार्ड रजिस्टर पर दर्ज किया जाता है। अब जेल प्रशासन द्वारा अपराधियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इसमें अपराधी का रंगीन फोटो, अंगूठा निशानी, हुलिया, नाम पता सबकुछ ऑनलाइन हो जाएगा, जिसे कभी भी कहीं से भी देखा जा सकता है। अपराधी के खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हैं, वह कब तक जेल में रहा, कब जमानत हुई। सारा रिकार्ड एक क्लिक पर प्राप्त हो जाएगा।
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इस समय जेल में सभी बंदियों का रिकार्ड ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इसमें जेल के सभी बंदियों का रंगीन फोटो, हुलिया, नाम पता और आपराधिक इतिहास सब रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड हो रहा है। इससे जेल प्रशासन और पुलिस विभाग को काफी मदद मिलेगी।
-भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक
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वर्ष 1980 में नाम, पिता का नाम, निवास, पहचान चिन्ह आदि लिखे जाते थे और अपराधियों का केवल अंगूठे का निशान लगता था। वर्ष 1990 के बाद ब्लैक एंड व्हाइट फोटो लगना शुरू हुआ। बाद में अपराधियों की पहचान, उनके नाम-पता सब लिखा जाने लगा था। अब पिछले कई साल से अपराधियों का रंगीन फोटो रजिस्टर पर चस्पा हो रहा है। उनका पूरा हुलिया और नाम पता सब कुछ दर्ज होता है, लेकिन यह रिकार्ड ऑनलाइन नहीं होता था। जेल में ज्यादा रिकार्ड एकत्र हो जाने की वजह से पिछला रिकार्ड हटा दिया जाता था। जब कभी पुराने रिकार्ड की आवश्यकता पड़ती है तो जेल प्रशासन को खोजबीन में काफी परेशानी होती है। अब ऐसा नहीं होगा। क्योंकि जेल प्रशासन द्वारा जेल के सभी अपराधियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इससे एक क्लिक से ही किसी भी अपराधी का पूरा आपराधिक इतिहास खुलकर सामने आ जाएगा। इससे पुलिस व जेल प्रशासन को काफी राहत मिलेगी।
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सभी बंदियों का तैयार हो रहा डाटा
जेल में इस समय करीब 526 बंदी और कैदी हैं। अब तक जो बंदी जेल आ रहे थे या आ रहे हैं और अपनी जमानत करवा कर बाहर जा रहे हैं, उनका सारा रिकार्ड रजिस्टर पर दर्ज किया जाता है। अब जेल प्रशासन द्वारा अपराधियों का डाटा ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इसमें अपराधी का रंगीन फोटो, अंगूठा निशानी, हुलिया, नाम पता सबकुछ ऑनलाइन हो जाएगा, जिसे कभी भी कहीं से भी देखा जा सकता है। अपराधी के खिलाफ कितने मुकदमे दर्ज हैं, वह कब तक जेल में रहा, कब जमानत हुई। सारा रिकार्ड एक क्लिक पर प्राप्त हो जाएगा।
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इस समय जेल में सभी बंदियों का रिकार्ड ऑनलाइन अपलोड कराया जा रहा है। इसमें जेल के सभी बंदियों का रंगीन फोटो, हुलिया, नाम पता और आपराधिक इतिहास सब रिकॉर्ड ऑनलाइन अपलोड हो रहा है। इससे जेल प्रशासन और पुलिस विभाग को काफी मदद मिलेगी।
-भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक