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दहेज हत्या में तीन को सात साल की कैद
अमर उजाला/कन्नौज
Updated Fri, 30 Sep 2016 12:19 AM IST
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कोर्ट
- फोटो : अमर उजाला
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दहेज हत्या के चार वर्ष पुराने मामले में एडीजे चतुर्थ न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने सास, ससुर और पति को दोषी पाते हुए सात-सात वर्ष का कारावास और दो-दो हजार रुपये जुर्माना भरने की सजा का आदेश दिया है। वहीं साक्ष्यों के अभाव में ननद को रिहा कर दिया है।
शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि तिर्वा के तारमऊ गढ़ी निवासी दिलीप कुमार पुत्र लालाराम ने छह अक्तूबर 2012 को लिखाई रिपोर्ट में बताया कि उसने अपनी बहन राखी (22) की शादी चार दिसंबर 2011 को तिर्वा के महुआपुर निवासी दिनेश चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र के साथ की थी। बताया कि उस समय अपनी क्षमता के अनुसार दान दहेज भी दिया था। लेकिन उसकी बहन के ससुरालीजन सास, ससुर, ननद और उसका पति उसकी बहन को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगा।
बताया कि सभी ससुरालीजन नौकरी के लिए उससे बराबर 3.5 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। वादी ने बताया कि घटना के दूसरे ही दिन सूचना मिलने पर वह अपनी बहन के ससुराल परिवार के साथ पहुंचा। जहां उसकी बहन ने उसे पूरी घटना के बारे में बताया। वादी के मुताबिक उसके बाद भी ससुरालीजनों ने उसके साथ मारपीट करना बंद नहीं किया।
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बताया कि पांच अक्तूबर 2012 को उसकी सास प्रेमवती पत्नी कैलाश चंद्र, ससुर कैलाश चंद्र पुत्र तेजराम, पति दिनेश चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र ने बहन को जहर देकर मार डाला। मामले की विवेचना तत्कालीन तिर्वा सीओ विपुल कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि एडीजे चतुर्थ न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई करते हुए मृतका की सास, ससुर और पति को दोषी मानते हुए सात-सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। तीनों से छह हजार रुपये दंड वसूलने का आदेश दिया। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने ननद को बरी कर दिया है।
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शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार यादव ने बताया कि तिर्वा के तारमऊ गढ़ी निवासी दिलीप कुमार पुत्र लालाराम ने छह अक्तूबर 2012 को लिखाई रिपोर्ट में बताया कि उसने अपनी बहन राखी (22) की शादी चार दिसंबर 2011 को तिर्वा के महुआपुर निवासी दिनेश चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र के साथ की थी। बताया कि उस समय अपनी क्षमता के अनुसार दान दहेज भी दिया था। लेकिन उसकी बहन के ससुरालीजन सास, ससुर, ननद और उसका पति उसकी बहन को अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगा।
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बताया कि सभी ससुरालीजन नौकरी के लिए उससे बराबर 3.5 लाख रुपये की मांग कर रहे थे। वादी ने बताया कि घटना के दूसरे ही दिन सूचना मिलने पर वह अपनी बहन के ससुराल परिवार के साथ पहुंचा। जहां उसकी बहन ने उसे पूरी घटना के बारे में बताया। वादी के मुताबिक उसके बाद भी ससुरालीजनों ने उसके साथ मारपीट करना बंद नहीं किया।
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बताया कि पांच अक्तूबर 2012 को उसकी सास प्रेमवती पत्नी कैलाश चंद्र, ससुर कैलाश चंद्र पुत्र तेजराम, पति दिनेश चंद्र पुत्र कैलाश चंद्र ने बहन को जहर देकर मार डाला। मामले की विवेचना तत्कालीन तिर्वा सीओ विपुल कुमार श्रीवास्तव को सौंपी गई।
शासकीय अधिवक्ता ने बताया कि एडीजे चतुर्थ न्यायाधीश दिवाकर प्रसाद चतुर्वेदी ने साक्ष्यों के आधार पर सुनवाई करते हुए मृतका की सास, ससुर और पति को दोषी मानते हुए सात-सात वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। तीनों से छह हजार रुपये दंड वसूलने का आदेश दिया। साक्ष्यों के अभाव में कोर्ट ने ननद को बरी कर दिया है।