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दहेज हत्या में आरोपी को आजीवन कारावास
अमर उजाला ब्यूरो/कन्नौज
Updated Sun, 29 May 2016 01:27 AM IST
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लाोक अदालत
दहेज हत्या के मामले में कोर्ट ने दोषी को अजीवन कारावास की सजा सुनाई है। सात साल पुराने मामले में यह फैसला शनिवार को आया है। शासकीय अधिवक्ता नवीन कुमार दुबे के मुताबिक वादी फर्रुखाबाद के कायमगंज निवासी रईश खां पुत्र स्व. अहमद शेर ने गुरसहायगंज थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया कि उसने अपनी बहन शमशीदा (25) की शादी साल 2005 में गुरसहायगंज के किदवई नगर निवासी सलाउद्दीन उर्फ खुमटी पुत्र बस्सू खां उर्फ बसूरद्दीन के साथ की थी।
शादी के बाद से सलाउद्दीन उसकी उसकी बहन को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। वह उसकी बहन से मारपीट भी करता था। बताया कि 10 फरवरी 2009 को उसके बहनोई ने उसकी बहन के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। मोहल्ले वालों ने उसे मामले की सूचना दी। इस पर पास के गांव के रहने वाले उसके दूसरे बहनोई रिजवान ने मौके पर जाकर भेजा तब शमशीदा जिंदा थी।
उसने रिजवान को बताया कि उसके पति सलाउद्दीन ने उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर उसे जला दिया। उसके बाद उसकी मौत हो गई। गुरसहायगंज पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शमशीदा पूरी तरह से जल चुकी थी।
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मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ शिवप्रकाश मिश्रा को सौंपी गई। विवेचक ने विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। साक्ष्यों के व विवेचना के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम न्यायाधीश सूर्य प्रकाश शर्मा ने सलाउद्दीन को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
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शादी के बाद से सलाउद्दीन उसकी उसकी बहन को दहेज के लिए प्रताड़ित करने लगा। वह उसकी बहन से मारपीट भी करता था। बताया कि 10 फरवरी 2009 को उसके बहनोई ने उसकी बहन के ऊपर मिट्टी का तेल छिड़ककर आग लगा दी। मोहल्ले वालों ने उसे मामले की सूचना दी। इस पर पास के गांव के रहने वाले उसके दूसरे बहनोई रिजवान ने मौके पर जाकर भेजा तब शमशीदा जिंदा थी।
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उसने रिजवान को बताया कि उसके पति सलाउद्दीन ने उसके ऊपर मिट्टी का तेल डालकर उसे जला दिया। उसके बाद उसकी मौत हो गई। गुरसहायगंज पुलिस ने रिपोर्ट लिखने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के अनुसार शमशीदा पूरी तरह से जल चुकी थी।
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मामले की विवेचना तत्कालीन सीओ शिवप्रकाश मिश्रा को सौंपी गई। विवेचक ने विवेचना पूरी होने के बाद आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किया। साक्ष्यों के व विवेचना के आधार पर फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम न्यायाधीश सूर्य प्रकाश शर्मा ने सलाउद्दीन को दहेज हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।