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बेटी की डोली से पहले उठा पिता का जनाजा
kannauj
Updated Tue, 28 Nov 2017 12:17 AM IST
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शव के पास रोते-बिलखते परिजन।
- फोटो : अमर उजाला
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सिकंदरपुर।
बेटी का निकाह हो गया और वह शौहर के साथ ससुराल जाने के लिए पीहर से विदा ले रही थी। बेटी को गले से लगाते समय वालिद को हार्ट अटैक पड़ गया। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया और बेटी की डोली उठने से पहले पिता का जनाजा उठ गया।
ग्राम शाहजहांपुर में बाबुद्दीन (70) की 9 संतानें हैं। इसमें सबसे छोटी बेटी शबाना की बारात जनपद फर्रुखाबाद के थाना जहानगंज अंतर्गत ग्राम पंजू खिरिया से आई थी। दूल्हा मजरूद्दीन पुत्र कमरुद्दीन के साथ निकाह की रस्म पूरी हुई। सोमवार की शाम को शबाना अपने मायके वालों से विदा लेकर ससुराल के लिए रवाना होने वाली थी।
विदाई के दौरान उसने नम आंखों से अपने वालिद बाबुद्दीन को गले से लगाया। ग्रामीणों के मुताबिक, उसी समय बाबुद्दीन की आंखों से आंसू बह निकले और वह वहीं अचेत हो गए।
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परिजनों और रिश्तेदारों ने चेहरे पर पानी छिड़क कर उन्हें होश में लाने का प्रयास किया। शरीर में चेतना नहीं लौटने पर परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने का इंतजाम कर ही रहे थे कि बाबुद्दीन ने दम तोड़ दिया।
बेटी की डोली उठने से पहले पिता का जनाजा उठा तो मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। देर शाम भारी मन से शबाना को ससुराल के लिए विदा किया गया।
बेटी का निकाह हो गया और वह शौहर के साथ ससुराल जाने के लिए पीहर से विदा ले रही थी। बेटी को गले से लगाते समय वालिद को हार्ट अटैक पड़ गया। परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने की तैयारी कर ही रहे थे कि तब तक उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना से परिजनों में कोहराम मच गया और बेटी की डोली उठने से पहले पिता का जनाजा उठ गया।
ग्राम शाहजहांपुर में बाबुद्दीन (70) की 9 संतानें हैं। इसमें सबसे छोटी बेटी शबाना की बारात जनपद फर्रुखाबाद के थाना जहानगंज अंतर्गत ग्राम पंजू खिरिया से आई थी। दूल्हा मजरूद्दीन पुत्र कमरुद्दीन के साथ निकाह की रस्म पूरी हुई। सोमवार की शाम को शबाना अपने मायके वालों से विदा लेकर ससुराल के लिए रवाना होने वाली थी।
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विदाई के दौरान उसने नम आंखों से अपने वालिद बाबुद्दीन को गले से लगाया। ग्रामीणों के मुताबिक, उसी समय बाबुद्दीन की आंखों से आंसू बह निकले और वह वहीं अचेत हो गए।
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परिजनों और रिश्तेदारों ने चेहरे पर पानी छिड़क कर उन्हें होश में लाने का प्रयास किया। शरीर में चेतना नहीं लौटने पर परिजन उन्हें अस्पताल ले जाने का इंतजाम कर ही रहे थे कि बाबुद्दीन ने दम तोड़ दिया।
बेटी की डोली उठने से पहले पिता का जनाजा उठा तो मौके पर मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। देर शाम भारी मन से शबाना को ससुराल के लिए विदा किया गया।