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लाखों रुपये से बना भवन हो रहा बदहाल
ब्यूूराे/अमर उजाला, कन्नौज
Updated Thu, 04 Feb 2016 12:48 AM IST
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नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पर डाक्टरों व कर्मचारियों के आवासों में निवास न करने से स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं। वहीं आवास खाली रहने से उसमें अराजकतत्वों का बोलबाला है। लाखों रुपये से बना भवन बदहाल हो रहा है। भवन की देखरेख न होने से खिड़की व गेट गायब हो गए हैं। लोग बिजली की वायरिंग भी उखाड़ ले गए।
क्षेत्र के शेरपाल, वीरपाल, घनश्याम सिंह का कहना है कि अमोलर स्थित स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के समय लाखों रुपये की लागत से डाक्टर व कर्मियों के आवासों का निर्माण कराया गया था। मगर आज तक आवासों में कोई भी डाक्टर व कर्मचारी नहीं रुका, जिससे धीरे-धीरे आवास बदहाल होते गए। अब आवास रहने लायक नहीं रहे। आवास के गेट व खिड़कियों में दीमक लग गई।
डा. अमित, तरुण गुप्ता, फार्मेसिस्ट पीडी वर्मा, एएनएम रेखा कुमारी, हेल्थ विजिटर अभिषेक कुमार, वार्ड ब्वाय हरीकांत व अन्य स्टाफ दोपहर दो बजे के बाद सीएचसी में नहीं रहता है। फार्मेसिस्ट पीडी वर्मा का कहना है कि आवासों का निर्माण काफी पहले हुआ था। किसी के वहां न रहने के कारण अब वह जर्जर अवस्था में हैं। हालांकि आवास भत्ता की कटौती हो रही है। एमओआईसी डा. अजय यादव का कहना है कि कोई भी चिकित्सक वहां पर रहना नहीं चाहता है। किसी तरह की निगरानी की व्यवस्था न होने से आवास और भी बदतर हो गए हैं। यदि स्टाफ रुकने का मन बनाए तो उसकी मरम्मत कराई जा सकती है।
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क्षेत्र के शेरपाल, वीरपाल, घनश्याम सिंह का कहना है कि अमोलर स्थित स्वास्थ्य केंद्र निर्माण के समय लाखों रुपये की लागत से डाक्टर व कर्मियों के आवासों का निर्माण कराया गया था। मगर आज तक आवासों में कोई भी डाक्टर व कर्मचारी नहीं रुका, जिससे धीरे-धीरे आवास बदहाल होते गए। अब आवास रहने लायक नहीं रहे। आवास के गेट व खिड़कियों में दीमक लग गई।
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डा. अमित, तरुण गुप्ता, फार्मेसिस्ट पीडी वर्मा, एएनएम रेखा कुमारी, हेल्थ विजिटर अभिषेक कुमार, वार्ड ब्वाय हरीकांत व अन्य स्टाफ दोपहर दो बजे के बाद सीएचसी में नहीं रहता है। फार्मेसिस्ट पीडी वर्मा का कहना है कि आवासों का निर्माण काफी पहले हुआ था। किसी के वहां न रहने के कारण अब वह जर्जर अवस्था में हैं। हालांकि आवास भत्ता की कटौती हो रही है। एमओआईसी डा. अजय यादव का कहना है कि कोई भी चिकित्सक वहां पर रहना नहीं चाहता है। किसी तरह की निगरानी की व्यवस्था न होने से आवास और भी बदतर हो गए हैं। यदि स्टाफ रुकने का मन बनाए तो उसकी मरम्मत कराई जा सकती है।
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