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भ्रष्टाचार छिपाने के लिए स्कूलों में टांगे प्रवेश वर्जित के बोर्ड

Fri, 21 Feb 2020 12:39 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 21 Feb 2020 12:39 AM IST
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bhrashtaachaar chhipaane ke lie skoolon mein taange pravesh varjit ke bord
विद्यालय गेट पर मीडिया का प्रवेश वर्जित का लगा बोर्ड। - फोटो : KANNAUJ
तिर्वा(कन्नौज)। दो महीने में ही स्वेटर फटने का मामला उजागर होते ही उमर्दा के प्राथमिक विद्यालयों में मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया गया। कई विद्यालयों में प्रधानाध्यापकों ने गेट पर बिना अनुमति के प्रवेश वर्जित के बोर्ड टांग दिए। इस फरमान की जानकारी अधिकारियों को हुई तो इन्हें हटवा दिया गया। डीएम ने पूरे मामले की जांच के आदेश दिए हैं।
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उमर्दा विकास खंड के महसौनापुर प्राथमिक विद्यालय में नवंबर महीने में छात्रों को स्वेटरों का वितरण किया गया। दो माह गुजरने के बाद कई छात्रों के स्वेटरों का रंग हल्का होने लगा था। कई छात्रों के स्वेटर फटने लगे। 19 फरवरी को अमर उजाला ने ‘‘दो माह भी नहीं चले, फटने लगे स्वेटर’’ खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद उमर्दा बीईओ अरविंद कुशवाहा ने शिक्षकों पर खबर से संबधित बयान न देने का दबाव बनाकर पत्र लिखवा लिया। शिक्षकों को निर्देश दिए कि कोई भी मीडिया कर्मी बिना अनुमति के स्कूल में नहीं घुसेगा। जूते, मोजे, बैग व स्वेटर के बारे में बयान भी नहीं दिया जाएगा।
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महसौनापुर प्राथमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक वैभव राजपूत समेत कई प्रधानाध्यापकों ने स्कूल गेट पर बिना अनुमति के मीडिया का प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगा दिया। यह खबर आला अधिकारियों तक पहुंची तो बोर्ड उतारने के निर्देश जारी कर दिए गए। प्रधानाध्यापक वैभव राजपूत ने बताया कि स्वेटर फटे होने की खबर प्रकाशित होने के बाद खंड शिक्षाधिकारी अरविंद कुशवाहा ने फोन पर किसी भी खबर के बारे में बयान देने के लिए मना किया था। मीडिया का प्रवेश वर्जित रखने के आदेश भी दिए। प्रबंध समिति के अध्यक्ष सुरजीत ने बताया कि जिस समय प्रधानाध्यापक के पास फोन आया, उस समय वह स्कूल में ही थे। उन्होंने बीईओ की बात सुनी थी। इसके बाद स्कूल में मीडिया का प्रवेश वर्जित का बोर्ड लगाया गया था। इस मामले में डीएम रवींद्र कुमार ने जांच कराने के लिए कहा है।
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वहीं भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत ने बताया कि मीडिया के प्रवेश पर रोक लगाना गलत बात है। अगर मीडिया पर रोक लगाने के आदेश दिए गए तो इसके लिए बीईओ जिम्मेदार हैं। प्रधानाध्यापक व बीएसए से बात कर मामले की जांच कराएंगे।
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