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Kannauj News: माता-पिता के बाद चार भाई व दिव्यांग बहन का सहारा था असलम
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हसेरन (कन्नौज)। यमुना एक्सप्रेसवे पर हुए सड़क हादसे में कन्नौज के हसेरन क्षेत्र के ग्राम गढ़े का पुरवा निवासी 32 वर्षीय असलम की मौत हो गई। इस खबर से परिवार में कोहराम मच गया। माता-पिता की मौत के बाद चार भाई-बहनों और अपनी पत्नी व दो साल की बेटी का सहारा बने असलम की अचानक मृत्यु से पूरा परिवार सदमे में है।
असलम के माता-पिता का निधन कई वर्ष पहले हो चुका था। परिवार में सबसे बड़ा होने के नाते उसने चार भाइयों और दिव्यांग बहन अफरीन के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाली थी। गांव में खेती योग्य जमीन न होने के कारण वह परिवार के भरण-पोषण के लिए दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। उसने पत्नी निशा और दो साल की बेटी नाबिया के साथ-साथ गर्भवती पत्नी का पेट भरने के लिए यह काम चुना था।
यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास हुए सड़क हादसे में असलम की मृत्यु की सूचना मिलते ही उसके घर पर चीख-पुकार मच गई। पति का शव घर पहुंचते ही पत्नी निशा (30) बेहोश होकर गिर पड़ी। वहीं, चार भाई और दिव्यांग बहन अफरीन का रो-रोकर बुरा हाल था। आस-पड़ोस के ग्रामीण भी शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे, लेकिन परिजनों के दुख को देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। किसी को ढांढस बंधाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
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चार भाई-बहनों और एक बेटी का सहारा छिन गया
असलम की मौत से उसके भाई-बहन और दो साल की बेटी नाबिया का सहारा छिन गया है। उसकी पत्नी निशा इस समय गर्भवती भी है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ और गहरा गया है। परिवार के लिए अब भरण-पोषण का कोई जरिया नहीं बचा है। ग्रामीण इस दुख की घड़ी में परिवार को सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं।
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असलम के माता-पिता का निधन कई वर्ष पहले हो चुका था। परिवार में सबसे बड़ा होने के नाते उसने चार भाइयों और दिव्यांग बहन अफरीन के पालन-पोषण की जिम्मेदारी संभाली थी। गांव में खेती योग्य जमीन न होने के कारण वह परिवार के भरण-पोषण के लिए दिल्ली में रहकर मजदूरी करता था। उसने पत्नी निशा और दो साल की बेटी नाबिया के साथ-साथ गर्भवती पत्नी का पेट भरने के लिए यह काम चुना था।
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यमुना एक्सप्रेसवे पर मथुरा के पास हुए सड़क हादसे में असलम की मृत्यु की सूचना मिलते ही उसके घर पर चीख-पुकार मच गई। पति का शव घर पहुंचते ही पत्नी निशा (30) बेहोश होकर गिर पड़ी। वहीं, चार भाई और दिव्यांग बहन अफरीन का रो-रोकर बुरा हाल था। आस-पड़ोस के ग्रामीण भी शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए बड़ी संख्या में पहुंचे, लेकिन परिजनों के दुख को देखकर सभी की आंखें नम हो गईं। किसी को ढांढस बंधाने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
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चार भाई-बहनों और एक बेटी का सहारा छिन गया
असलम की मौत से उसके भाई-बहन और दो साल की बेटी नाबिया का सहारा छिन गया है। उसकी पत्नी निशा इस समय गर्भवती भी है, जिससे परिवार पर दुखों का पहाड़ और गहरा गया है। परिवार के लिए अब भरण-पोषण का कोई जरिया नहीं बचा है। ग्रामीण इस दुख की घड़ी में परिवार को सहारा देने का प्रयास कर रहे हैं।