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सालभर बाद यूनिफार्म घोटाले की जांच शुरू, विवेचकों ने गेस्टहाउस में सील कमरे को खोला, सैंपल लिए
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कन्नौज। करीब एक साल बाद यूनिफार्म घोटाले की जांच शुरू हो गई। तीन सदस्यीय जांच टीम ने तिर्वा रोड स्थित गेस्टहाउस में सील कमरों को खोलकर यूनिफार्म के सैंपल लिए। कमरों को दोबारा सील कर दिया गया।
तत्कालीन बीएसए केके ओझा ने 23 अक्तूबर 2020 को सदर कोतवाली में दर्ज कराई थी। उन्होंने तहरीर में बताया था कि 28 सितंबर को तिर्वा रोड स्थित गांव शरीफापुर के गेस्ट हाउस कम मैरिज हाल में भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत समेत कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने 341 बंडल बरामद किए थे। इन बंडलों में परिषदीय स्कूलों को वितरित करने के लिए छात्र-छात्राओं के यूनिफार्म व कपड़े थे। साथ ही 19 अन्य बंडलों में रील, बटन व कालर आदि सामग्री थी। बीएसए ने रात में बरामद माल को दो कमरों में सील करा दिया था। उन्होंने घटना की जानकारी डीएम राकेश कुमार मिश्र को दी थी।
डीएम के आदेश पर मामले की जांच सीडीओ आरएन सिंह, एसडीएम सदर गौरव शुक्ल व जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार ने की थी। इसमें सीओ की तरफ से विवेचक सुरेंद्र सिंह, बीएसए की तरफ से बीईओ शिव सिंह और एसडीएम की तरफ से तहसीलदार राम शंकर को कमरे की सील खोलने के लिए नामित किया गया था। एक माह की मशक्कत के बाद सील कमरे की चाबी पूर्व तहसीलदार अरविंद कुमार के पास मिली थी।
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12 नवंबर को गेस्ट हाउस के दोनों कमरों को खोला गया। विवेचकों ने यूनिफार्म के सैंपल लेकर कमरों को दोबारा सील कर दिया। अभी तक पूर्व के विवेचक ने कोई जांच नहीं की थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद फाइल बंद कर दी गई थी। अब इसकी विवेचना सुरेंद्र सिंह को दी गई।
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तत्कालीन बीएसए केके ओझा ने 23 अक्तूबर 2020 को सदर कोतवाली में दर्ज कराई थी। उन्होंने तहरीर में बताया था कि 28 सितंबर को तिर्वा रोड स्थित गांव शरीफापुर के गेस्ट हाउस कम मैरिज हाल में भाजपा जिलाध्यक्ष नरेंद्र राजपूत समेत कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं ने 341 बंडल बरामद किए थे। इन बंडलों में परिषदीय स्कूलों को वितरित करने के लिए छात्र-छात्राओं के यूनिफार्म व कपड़े थे। साथ ही 19 अन्य बंडलों में रील, बटन व कालर आदि सामग्री थी। बीएसए ने रात में बरामद माल को दो कमरों में सील करा दिया था। उन्होंने घटना की जानकारी डीएम राकेश कुमार मिश्र को दी थी।
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डीएम के आदेश पर मामले की जांच सीडीओ आरएन सिंह, एसडीएम सदर गौरव शुक्ल व जिला समाज कल्याण अधिकारी अंजनी कुमार ने की थी। इसमें सीओ की तरफ से विवेचक सुरेंद्र सिंह, बीएसए की तरफ से बीईओ शिव सिंह और एसडीएम की तरफ से तहसीलदार राम शंकर को कमरे की सील खोलने के लिए नामित किया गया था। एक माह की मशक्कत के बाद सील कमरे की चाबी पूर्व तहसीलदार अरविंद कुमार के पास मिली थी।
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12 नवंबर को गेस्ट हाउस के दोनों कमरों को खोला गया। विवेचकों ने यूनिफार्म के सैंपल लेकर कमरों को दोबारा सील कर दिया। अभी तक पूर्व के विवेचक ने कोई जांच नहीं की थी। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद फाइल बंद कर दी गई थी। अब इसकी विवेचना सुरेंद्र सिंह को दी गई।