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Kannauj News: 5257 मीट्रिक टन आलू भेजा दूसरे राज्यों में
Wed, 15 Mar 2023 11:06 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
संवाद न्यूज एजेंसी, कन्नौज
Updated Wed, 15 Mar 2023 11:06 PM IST
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छिबरामऊ। आलू की दुर्दशा में सुधार लाने के लिए प्रशासन ने दूसरे राज्यों में 5257 मीट्रिक टन आलू की खेप भेजी है। आलू के भाव बढ़ने के दावे अफसरों की ओर से किए गए थे पर जमीनी हकीकत कुछ और ही है। पहले की तरह बुधवार को भी कृषि उत्पादन मंडी समिति में 180 से लेकर 220 रुपये प्रति पैकेट के हिसाब से आलू की खरीद हुई। उधर, मंडी सचिव बृजभान ने बताया कि अभी तक शासन स्तर से आलू खरीद के लिए कोई दिशा निर्देश नहीं आए हैं। निर्देश आते ही विपणन शाखा, नैफेड समेत अन्य सरकारी खरीद करने वाली संस्थाएं खरीद शुरू करेंगी।
जनपद में इस बार हुई आलू की बंपर पैदावार के कारण आलू के दाम औंधे मुंह गिर गए थे। लागत न मिलने पर किसानों ने मुनाफे की आस में कोल्ड स्टोरेज की ओर रुख कर दिया। भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज के सामने ट्रैक्टर ट्रालियों की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं। भीड़ को देखते हुए कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने मनमानी करते हुए भंडारण शुल्क बढ़ा दिया। सरकार 230 रुपये प्रति क्विंटल भंडारण शुल्क लेने का दावा कर रही है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज मालिक 270-280 रुपये ले रहे हैं। बर्बादी को रोकने के लिए प्रशासन ने आलू को दूसरे प्रदेशों में बिक्री के लिए भिजवाना शुरू कर दिया है।
एसडीएम अशोक कुमार ने बताया कि कृषि उत्पादन मंडी समिति से बिहार में 78, झारखंड 15, छत्तीसगढ़ 18, राजस्थान नौ, महाराष्ट्र 23, कर्नाटक 19, मध्य प्रदेश 37, दिल्ली व आंध्र प्रदेश में दो-दो, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना एक-एक ट्रक भेजा जा चुका है। इन ट्रकों में लगभग 5257 मीट्रिक टन आलू को दूसरे प्रदेशों में निर्यात किया गया है।
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मंडी समिति में कम हुई आलू की आवक
आलू व्यापारी पंकज प्रसाद दुबे ने बताया कि लागत मूल्य से भी कम पर आलू बिकने के कारण किसानों ने आलू को मंडी में लाना कम कर दिया है। ऐसे में कई आढ़तों पर सन्नाटा है। किसानों ने आलू को मिट्टी के भाव आलू बेचने के बजाय भंडारण शुरू कर दिया है। दूसरे प्रांतों में आलू भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू होने से कुछ सुधार की संभावना है।
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चिकने आलू की आवक कम
आलू व्यापारी वरुण गुप्ता ने बताया कि जनपद में कंचन, पुखराज, हालैंड, ख्याति आलू की पैदावार ज्यादा है जबकि चिकने आलू के अलावा चिपसोना व 3797 वैरायटी की मांग अधिक होती है। हैदराबाद व मुंबई की मंडियों में अधिक मांग है। वर्तमान में चिकना आलू का भाव भी लगभग पांच सौ से छह सौ रुपये में बिक रहा है। तहसील क्षेत्र में इस आलू की पैदावार बमुश्किल दस या बीस प्रतिशत ही होती है।
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दो दिनों से लाइन में लगे किसान
आलू भंडारण के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर आए सफा खेड़ा निवासी फूल सिंह, सराय दायमगंज निवासी चरन सिंह, कांग्रेसी नेता विनोद दुबे का कहना है कि दो दिन से कोल्ड स्टोरेज के सामने लाइन लगी हैं। कोल्ड स्टोर में भी भंडारण के लिए सिफारिश लगानी पड़ रही है। सिफारिश न होने पर मय ट्राली आल वापस कर दिया जाता है। ऐसे में ट्रैक्टरों का अतिरिक्त भाड़ा अदा करना पड़ रहा है।
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जनपद में इस बार हुई आलू की बंपर पैदावार के कारण आलू के दाम औंधे मुंह गिर गए थे। लागत न मिलने पर किसानों ने मुनाफे की आस में कोल्ड स्टोरेज की ओर रुख कर दिया। भंडारण के लिए कोल्ड स्टोरेज के सामने ट्रैक्टर ट्रालियों की लंबी लाइनें लगनी शुरू हो गईं। भीड़ को देखते हुए कोल्ड स्टोरेज मालिकों ने मनमानी करते हुए भंडारण शुल्क बढ़ा दिया। सरकार 230 रुपये प्रति क्विंटल भंडारण शुल्क लेने का दावा कर रही है, लेकिन कोल्ड स्टोरेज मालिक 270-280 रुपये ले रहे हैं। बर्बादी को रोकने के लिए प्रशासन ने आलू को दूसरे प्रदेशों में बिक्री के लिए भिजवाना शुरू कर दिया है।
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एसडीएम अशोक कुमार ने बताया कि कृषि उत्पादन मंडी समिति से बिहार में 78, झारखंड 15, छत्तीसगढ़ 18, राजस्थान नौ, महाराष्ट्र 23, कर्नाटक 19, मध्य प्रदेश 37, दिल्ली व आंध्र प्रदेश में दो-दो, हरियाणा, पश्चिम बंगाल, उड़ीसा, तेलंगाना एक-एक ट्रक भेजा जा चुका है। इन ट्रकों में लगभग 5257 मीट्रिक टन आलू को दूसरे प्रदेशों में निर्यात किया गया है।
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मंडी समिति में कम हुई आलू की आवक
आलू व्यापारी पंकज प्रसाद दुबे ने बताया कि लागत मूल्य से भी कम पर आलू बिकने के कारण किसानों ने आलू को मंडी में लाना कम कर दिया है। ऐसे में कई आढ़तों पर सन्नाटा है। किसानों ने आलू को मिट्टी के भाव आलू बेचने के बजाय भंडारण शुरू कर दिया है। दूसरे प्रांतों में आलू भेजे जाने की प्रक्रिया शुरू होने से कुछ सुधार की संभावना है।
चिकने आलू की आवक कम
आलू व्यापारी वरुण गुप्ता ने बताया कि जनपद में कंचन, पुखराज, हालैंड, ख्याति आलू की पैदावार ज्यादा है जबकि चिकने आलू के अलावा चिपसोना व 3797 वैरायटी की मांग अधिक होती है। हैदराबाद व मुंबई की मंडियों में अधिक मांग है। वर्तमान में चिकना आलू का भाव भी लगभग पांच सौ से छह सौ रुपये में बिक रहा है। तहसील क्षेत्र में इस आलू की पैदावार बमुश्किल दस या बीस प्रतिशत ही होती है।
दो दिनों से लाइन में लगे किसान
आलू भंडारण के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली लेकर आए सफा खेड़ा निवासी फूल सिंह, सराय दायमगंज निवासी चरन सिंह, कांग्रेसी नेता विनोद दुबे का कहना है कि दो दिन से कोल्ड स्टोरेज के सामने लाइन लगी हैं। कोल्ड स्टोर में भी भंडारण के लिए सिफारिश लगानी पड़ रही है। सिफारिश न होने पर मय ट्राली आल वापस कर दिया जाता है। ऐसे में ट्रैक्टरों का अतिरिक्त भाड़ा अदा करना पड़ रहा है।