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Kannauj News: दिल्ली को 35 बसें, लखनऊ लिए सिर्फ एक
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कन्नौज। राजधानी दिल्ली के लिए कन्नौज रोडवेज डिपो से प्रतिदिन 35 बसें संचालित हो रही हैं। वहीं प्रदेश की राजधानी लखनऊ जाने वाले यात्रियों के लिए आज भी बसों की कमी है। हालात यह हैं कि लखनऊ रूट पर नियमित रूप से सिर्फ एक बस उपलब्ध है। ऐसे में यात्रियों को मजबूरी में बस अड्डे के बाहर खड़े डग्गामार वाहनों का सहारा लेना पड़ता है।
आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि राजधानी तक सफर आसान होगा और रोडवेज बसों की संख्या बढ़ेगी। सालों बाद भी लखनऊ रूट पर बसों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। नौकरीपेशा लोगों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, मरीजों और सरकारी काम से राजधानी जाने वालों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां से सुबह आठ बजे एक ही बस है। बस अड्डे के बाहर सुबह से शाम तक कई डग्गामार वाहन लखनऊ के लिए सवारियां भरते नजर आते हैं।
यात्रियों का कहना है कि रोडवेज की पर्याप्त बसें न होने के कारण उन्हें अधिक किराया देकर निजी वाहनों से सफर करना पड़ता है। कई बार समय पर वाहन न मिलने से जरूरी काम भी प्रभावित होते हैं। यात्रियों ने मांग की है कि प्रदेश की राजधानी के लिए बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि दिल्ली जैसे लंबे रूट पर दर्जनों बसें चल सकती हैं तो लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण रूट पर भी पर्याप्त बसें उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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वर्जन
लखनऊ रूट पर पहले कई बार बसों की संख्या बढ़ाई गई थी पर पर्याप्त सवारी नहीं मिली। इसलिए बसों को अन्य रूटों पर संचालित किया गया। आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था की समीक्षा की जाती रहती है।
-अभिषेक बाजपेयी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम
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आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे बनने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि राजधानी तक सफर आसान होगा और रोडवेज बसों की संख्या बढ़ेगी। सालों बाद भी लखनऊ रूट पर बसों की संख्या में कोई खास इजाफा नहीं हुआ। नौकरीपेशा लोगों, प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं, मरीजों और सरकारी काम से राजधानी जाने वालों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है। यहां से सुबह आठ बजे एक ही बस है। बस अड्डे के बाहर सुबह से शाम तक कई डग्गामार वाहन लखनऊ के लिए सवारियां भरते नजर आते हैं।
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यात्रियों का कहना है कि रोडवेज की पर्याप्त बसें न होने के कारण उन्हें अधिक किराया देकर निजी वाहनों से सफर करना पड़ता है। कई बार समय पर वाहन न मिलने से जरूरी काम भी प्रभावित होते हैं। यात्रियों ने मांग की है कि प्रदेश की राजधानी के लिए बसों की संख्या बढ़ाई जानी चाहिए। उनका तर्क है कि यदि दिल्ली जैसे लंबे रूट पर दर्जनों बसें चल सकती हैं तो लखनऊ जैसे महत्वपूर्ण रूट पर भी पर्याप्त बसें उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
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वर्जन
लखनऊ रूट पर पहले कई बार बसों की संख्या बढ़ाई गई थी पर पर्याप्त सवारी नहीं मिली। इसलिए बसों को अन्य रूटों पर संचालित किया गया। आवश्यकता के अनुसार व्यवस्था की समीक्षा की जाती रहती है।
-अभिषेक बाजपेयी, सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक, परिवहन निगम