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Kannauj News: लाख बहोसी झील में 20 प्रवासी पक्षियों का शिकार
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लाख-बहोसी पक्षी विहार में झील के किनारे पड़े मृत पक्षी।
- फोटो : लाख-बहोसी पक्षी विहार में झील के किनारे पड़े मृत पक्षी।
इंदरगढ़। लाख बहोसी पक्षी विहार में शिकारियों ने 20 प्रवासी पक्षियों को जहरीला दाना खिलाकर मार डाला। ग्रामीणों ने जब झील के किनारे पक्षियों के शव पड़े देखे तो प्रबंधन को जानकारी दी। झील के पास ही कई स्थानों पर जहरीले दाने भी पत्तों में रखे मिले, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि इन्हीं को खाने के बाद पक्षियों की मौत हो गई है। रात के अंधेरे में शिकारी इन पक्षियों को उठा कर ले जाने वाले थे। पक्षी विहार के प्रभारी ने पक्षियों के पोस्टमार्टम कराने की बात कही है।
थाना क्षेत्र के लाख बहोसी गांव स्थित पक्षी विहार में पक्षियों की मौत का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह पक्षी विहार एक समय प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता था। अब यह शिकारियों और लापरवाही के कारण खतरे में है। शनिवार को झील के किनारे कई मेहमान परिंदों के शव पड़े मिले। ग्रामीणों ने इसी जानकारी पक्षी विहार प्रबंधन को दी, जिस पर पक्षी गाइडर करन सिंह ने बताया कि यह साइबेरियन बेडवॉल पक्षी है जो अक्तूबर 2024 में हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं और यहां प्रजनन के बाद बच्चों को लेकर मार्च माह में लौटते हैं। मरने वाले में अधिकतर मादा बेडवॉल है।
झील प्रभारी ज्ञानचंद्र पटेल का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी ही नहीं है। वह लगातार शिकार होने की बात पर पर्दा डालते नजर आए। पक्षी विहार प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि वह अवकाश पर हैं। प्रवासी पक्षियों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और जहरीले दानों को भी प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलते ही शिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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प्रबंधन की लापरवाही से हो रहे शिकार
पक्षी विहार में आए दिन पक्षियों का शिकार किया जा रहा है। इसको लेकर अमर उजाला ने 23 जनवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद भी प्रबंधन की तंद्रा नहीं टूटी। एक दिन बाद ही 20 मेहमान परिंदों के शव मिले है। यह सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन की उदासीनता से स्थिति और बिगड़ रही है। शिकारियों की सक्रियता के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। लाख बहोसी पक्षी विहार अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है और हर साल हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, लेकिन शिकार और लापरवाही के कारण पक्षी अपना रास्ता बदल रहे हैं। पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह पक्षी विहार अपनी पहचान खो सकता है।
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थाना क्षेत्र के लाख बहोसी गांव स्थित पक्षी विहार में पक्षियों की मौत का खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। यह पक्षी विहार एक समय प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के लिए सुरक्षित आश्रय स्थल माना जाता था। अब यह शिकारियों और लापरवाही के कारण खतरे में है। शनिवार को झील के किनारे कई मेहमान परिंदों के शव पड़े मिले। ग्रामीणों ने इसी जानकारी पक्षी विहार प्रबंधन को दी, जिस पर पक्षी गाइडर करन सिंह ने बताया कि यह साइबेरियन बेडवॉल पक्षी है जो अक्तूबर 2024 में हजारों किलोमीटर दूर से आते हैं और यहां प्रजनन के बाद बच्चों को लेकर मार्च माह में लौटते हैं। मरने वाले में अधिकतर मादा बेडवॉल है।
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झील प्रभारी ज्ञानचंद्र पटेल का कहना है कि उन्हें घटना की जानकारी ही नहीं है। वह लगातार शिकार होने की बात पर पर्दा डालते नजर आए। पक्षी विहार प्रभारी विकास सक्सेना ने बताया कि वह अवकाश पर हैं। प्रवासी पक्षियों का पोस्टमार्टम कराया जाएगा और जहरीले दानों को भी प्रयोगशाला भेजा जाएगा। रिपोर्ट मिलते ही शिकारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा।
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प्रबंधन की लापरवाही से हो रहे शिकार
पक्षी विहार में आए दिन पक्षियों का शिकार किया जा रहा है। इसको लेकर अमर उजाला ने 23 जनवरी को प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया था, इसके बाद भी प्रबंधन की तंद्रा नहीं टूटी। एक दिन बाद ही 20 मेहमान परिंदों के शव मिले है। यह सिलसिला लगातार जारी है, लेकिन संबंधित विभाग और प्रशासन की उदासीनता से स्थिति और बिगड़ रही है। शिकारियों की सक्रियता के बावजूद जिम्मेदार अधिकारियों की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। लाख बहोसी पक्षी विहार अंतरराष्ट्रीय महत्व रखता है और हर साल हजारों प्रवासी पक्षी यहां आते हैं, लेकिन शिकार और लापरवाही के कारण पक्षी अपना रास्ता बदल रहे हैं। पक्षी प्रेमियों और पर्यावरणविदों का कहना है कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाए गए, तो यह पक्षी विहार अपनी पहचान खो सकता है।