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पड़ने लगा कोहरा, सतर्क हो जाएं आलू किसान
Updated Thu, 29 Nov 2018 12:09 AM IST
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कन्नौज। सर्दी बढ़ने के साथ ही सुबह-शाम कोहरा पड़ने लगा है। इससे फसलों पर संकट मंडराने लगा है। कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि कोहरा आलू, मटर व सरसों की फसलों को बर्बाद कर सकता है। समय से दवा का छिड़काव कर फसलों को नुकसान से बचाया जा सकता है।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि कोहरे से फसलों में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। आसमान में घना कोहरा छाने से मौसम में नमी बनी रहेगी। इससे आलू की फसल में झुलसा का खतरा गहराने लगा है। नवंबर की शुरुआत में आलू बोने का कार्य शुरू हुआ था। अभी फसल तैयार होने में वक्त है। कोहरे से आलू में ब्लाइट रोग की आशंका बढ़ गई है। इस रोग से पौधे झ़ुलस जाते हैं। इससे बड़े पैमाने पर पैदावार प्रभावित होती है।
मटर और सरसों के लिए भी समय से पहले पड़ने वाला कोहरा हानिकारक है। इन फसलों में नमी के कारण चेंपा रोग का खतरा पैदा हो गया है। डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि रबी की बुआई होने के बाद करीब एक माह तक मौसम में ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। ज्यादा नमी होने से पौधों के पत्ते झुलसने लगते हैं। इससे पैदावार घट जाती है। फसल को झुलसा से बचाने के लिए पांच सौ लीटर पानी में 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर मेटाक्सल 80 प्रतिशत और मोकोजेब 64 प्रतिशत का स्प्रे किया जाना चाहिए। सरसों और मटर की फसल में डाईक्लोरोफोस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करना फायदेमंद होगा।
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पड़ने लगा कोहरा, सतर्क हो जाएं आलू किसान
क्रासर
- फसल को झुलसा से बचाने के लिए किसानाें ने शुरू किया दवा का छिड़काव
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो 28केएनजेपी 01- आलू में दवा का छिड़काव करता किसान।
कृषि वैज्ञानिक डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि कोहरे से फसलों में नुकसान की आशंका बढ़ गई है। आसमान में घना कोहरा छाने से मौसम में नमी बनी रहेगी। इससे आलू की फसल में झुलसा का खतरा गहराने लगा है। नवंबर की शुरुआत में आलू बोने का कार्य शुरू हुआ था। अभी फसल तैयार होने में वक्त है। कोहरे से आलू में ब्लाइट रोग की आशंका बढ़ गई है। इस रोग से पौधे झ़ुलस जाते हैं। इससे बड़े पैमाने पर पैदावार प्रभावित होती है।
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मटर और सरसों के लिए भी समय से पहले पड़ने वाला कोहरा हानिकारक है। इन फसलों में नमी के कारण चेंपा रोग का खतरा पैदा हो गया है। डॉ. वीके कनौजिया ने बताया कि रबी की बुआई होने के बाद करीब एक माह तक मौसम में ज्यादा नमी नहीं होनी चाहिए। ज्यादा नमी होने से पौधों के पत्ते झुलसने लगते हैं। इससे पैदावार घट जाती है। फसल को झुलसा से बचाने के लिए पांच सौ लीटर पानी में 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर मेटाक्सल 80 प्रतिशत और मोकोजेब 64 प्रतिशत का स्प्रे किया जाना चाहिए। सरसों और मटर की फसल में डाईक्लोरोफोस 1.5 लीटर प्रति हेक्टेयर 600 लीटर पानी में डालकर स्प्रे करना फायदेमंद होगा।
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क्रासर
- फसल को झुलसा से बचाने के लिए किसानाें ने शुरू किया दवा का छिड़काव
अमर उजाला ब्यूरो
फोटो 28केएनजेपी 01- आलू में दवा का छिड़काव करता किसान।