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साइकिल की रफ्तार पर अपनों ने ही लगा रखा है ब्रेक
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झांसी। आगामी विधानसभा चुनाव में प्रदेश की सत्ता पर वापसी का दावा कर रही सपा के लिए राह आसान नहीं हैं। साइकिल की रफ्तार पर सपा के सिपहसलार ही ब्रेक लगा रहे हैं। इसका अंदाजा पार्टी की झांसी की सियासत से लगाया जा सकता है। यहां पार्टी गुटबाजी की चपेट में हैं। चुनाव के लिए मजबूत संगठन तैयार करने की जगह यहां कई नेता अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं।
2017 के चुनाव में सूबे की सत्ता गंवा चुकी समाजवादी पार्टी 2022 के चुनाव में सरकार में आने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सत्ता पक्ष के विरोध में एकदम मुखर बना हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन की मजबूती पर भी जोर बनाए हुए हैं। बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन पार्टी की प्राथमिकता पर बना हुआ है। बावजूद, धरातल पर हालात एकदम इतर है। जिले में सपा तीन अलग-अलग धड़ों में बंटी नजर आ रही है। इनमें से दो धड़े आगामी चुनाव के मद्देनजर अपनी-अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं। जबकि, एक धड़ा एकदम चुप्पी साधे बैठा हुआ है। इस खेमेबाजी का सबसे बड़ा खामियाजा पार्टी संगठन को भुगतना पड़ रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि तीन माह से भंग चल रही जिला इकाई को जिलाध्यक्ष तो मिल गया है, परंतु जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। जिला संगठन की स्थिति को देखकर निचले स्तर पर संगठन की स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
पिछली कार्यकारिणी में मामूली फेरबदल के बाद जल्द ही नई जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसके अलावा बूथ स्तर पर कमेटियों के गठन का काम लगातार जारी है। पार्टी में कोई खेमेबाजी नहीं है। पूरी एकजुटता के साथ पार्टी आगामी चुनाव लड़ेगी। - महेश कश्यप, जिलाध्यक्ष - सपा
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2017 के चुनाव में सूबे की सत्ता गंवा चुकी समाजवादी पार्टी 2022 के चुनाव में सरकार में आने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगाए हुए हैं। पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व सत्ता पक्ष के विरोध में एकदम मुखर बना हुआ है। इसके अलावा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव संगठन की मजबूती पर भी जोर बनाए हुए हैं। बूथ स्तर पर कमेटियों का गठन पार्टी की प्राथमिकता पर बना हुआ है। बावजूद, धरातल पर हालात एकदम इतर है। जिले में सपा तीन अलग-अलग धड़ों में बंटी नजर आ रही है। इनमें से दो धड़े आगामी चुनाव के मद्देनजर अपनी-अपनी राजनीति चमकाने में जुटे हुए हैं। जबकि, एक धड़ा एकदम चुप्पी साधे बैठा हुआ है। इस खेमेबाजी का सबसे बड़ा खामियाजा पार्टी संगठन को भुगतना पड़ रहा है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि तीन माह से भंग चल रही जिला इकाई को जिलाध्यक्ष तो मिल गया है, परंतु जिला कार्यकारिणी का गठन नहीं हो पाया है। जिला संगठन की स्थिति को देखकर निचले स्तर पर संगठन की स्थिति का आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है।
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पिछली कार्यकारिणी में मामूली फेरबदल के बाद जल्द ही नई जिला कार्यकारिणी घोषित कर दी जाएगी। इसके अलावा बूथ स्तर पर कमेटियों के गठन का काम लगातार जारी है। पार्टी में कोई खेमेबाजी नहीं है। पूरी एकजुटता के साथ पार्टी आगामी चुनाव लड़ेगी। - महेश कश्यप, जिलाध्यक्ष - सपा
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