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अरे दादा, हम जौ कैं रए, आओ सबरन के गुर्दा छील दें

Fri, 29 Nov 2019 08:57 PM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Fri, 29 Nov 2019 08:57 PM IST
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yogesh tripathi came jhansi in a school aual function
खाती बाबा स्थित माउंट लिट्रा जी स्कूल के वार्षिक उत्सव कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश की बॉक्सिग की ?
झांसी। अरे दादा हम जौ के रए, अपनी भाषा बोलवे में कोनऊ संकोच न करो। पेल- पेल कैं बोलो। कूट- कूट कर बुंदेलखंड वालों में टैलेंट भरो है, आओ आगे बढ़ो और सबरन के गुर्दा छील दो। शुक्रवार को बुंदेलखंड वासियों को यह संदेश ‘भाभी जी घर पर हैं’ और ‘हप्पू की उलटन पलटन’ टीवी सीरियल के लोकप्रिय कलाकार दरोगा हप्पू सिंह उर्फ योगेश त्रिपाठी ने खाती बाबा स्थित माउंट लिट्रा स्कूल में आयोजित वार्षिक उत्सव कार्यक्रम के दौरान दिया।
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उन्होंने छात्र- छात्राओं से कहा कि जिस भी क्षेत्र में जाना हो, पहले उसकी तैयारी करें। तैयारी करके जाएंगे तो कभी असफलता हाथ नहीं लगेगी। एक्टिंग के क्षेत्र में चेहरा देखकर नहीं टैलेंट देखकर काम मिलता है। उन्होंने ‘भाभी जी घर पर हैं’ और ‘हप्पू की उलटन पलटन‘ सीरियल के अपने कई डायलॉग सुनाकर बच्चों को खूब गुदगुदाया। बच्चे भी इसमें पीछे नहीं रहे। बच्चों ने भी उनसे खूब सवाल पूछे और उनकी एक्टिंग में उनके डायलॉग सुनाकर हतप्रभ कर दिया। साथ ही, बच्चों को अपनी प्रतिभा को निखारने तथा उनकी रुचि के अनुसार करियर बनाने की सलाह दी। इस मौके पर उन्होंने उत्तर प्रदेश सीनियर बालिका बाक्सिंग टीम की खिलाड़ियों को सम्मानित किया। उनके साथ सेल्फी और फोटो खिंचवाने के लिए बच्चों और अभिभावकों में होड़ लगी रही।
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इस अवसर पर स्कूल प्रबंधक डॉ. रोहित पांडे ने कहा कि दो दिसंबर की शाम स्कूल में पलाश सेन के यूफोरिया बैंड (मुंबई) के शो का आयोजन होगा। कार्यक्रम में प्रधानाचार्य विंसेंट स्टूअर्ट, प्रशासनिक अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल एसएस चौहान मौजूद रहे।
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मां के साथ देखी फिल्मों से मिली अभिनय की प्रेरणा
दरोगा हप्पू सिंह ने पत्रकारों से कहा कि एक्टिंग की तरफ प्रोत्साहित करने के लिए उनकी मां जब भी अपने मायके झांसी आती थीं, उनको एक दिन में तीन फिल्में सिनेमाघर में दिखाने ले जाती थीं। गृह निवास राठ में बीएससी करने के बाद वे साल 2000 में लखनऊ चले गए। जुलाई 2005 में मुंबई पहुंच गया। एक्टिंग के मजे लेता हूं। मुझे सीरियल करने में ही मजा आता है। फिल्मों में एक्टिंग करने पर अभी कोई विचार नहीं है। व्यस्तता इतनी ज्यादा है कि ‘जीजाजी छत पर हैं’ एक साल बाद ही छोड़ना पड़ा।
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